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17 June, 2010

सावन रीता .....बीतत जाए ...!!!!!-9











छाई चहुँ ओर घोर- घोर --
घन घटा निराली --काली काली ॥
उमड़ घुमड़ कर --गरज -गरज कर
बरस पड़ेंगे घनघोर -मृत्यु के बादल -
जाने किस पल किस पर.......?
क्षणभंगुर जीवन ..........!!!!!!!
भोला मानुस उछल पडा -
मौसम मनमोहक देख कर -
काले बादल को देख कर -

सावन की थी छटा निराली -
जीवन सावन था उसका ---
प्रीत पिया संग ऐसी उसकी --
कोमल यौवन --उज्जवल सा मन था उसका ....


चेहरा अंचरा बीच छिपा के ॥
जाने ढूंढे कौन पिया के -
नैना रो-रो नीर बहाए -
सावन रीता बीतत जाये .......
बी ....तत.........जाये .......बी ..........तत ................................................................................................................

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर्।

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  2. waah saavan aur virah bada dukhdaayi...adbhut rachna...

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  3. एक पल में ही जीवन कितना बदल जाता है .
    मेरी प्रिय सखी के पति की असामायिक मृत्यु पर-
    ये मेरे मन के उदगार हैं --
    पर जो होना था सो तो हो ही चुका है!!!!

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