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11 January, 2011

शुभप्रभात

आज है शुभप्रभात  -
गुनगुनी गुनगुनाती सी धूप में -
गुनगुना उठा है वातावरण  -
तीर सी चुभती -
हवा की ठंडक -
मिटती चली  जाती है -
नव -वधूसी आसमान 
ओढ़े है चुनरिया -
सुर्ख लाल माथे पर -
सूर्य की चमके-
ज्यों बिंदिया -
हल्का गुलाबी है-
चहुँ ओर का आवरण-
रंग बिरंगे खिल उठे हैं-
ह्रदय सुमन -
दूर ................देखो ..!!  -
ध्येय अब-
फिर निहारता  है -
लक्ष्य  अब-
फिर पुकारता   है -
चलो अब मत रुको  -
सुंदर से सुंदरतम पर हो-
हम सभी का  गमन -
भोर भई अब -
उल्लसित मन श्रवण करे -
अति सुमधुर कर्णप्रिय-
आलाप गायन ......!!
राग भैरव जैसा  -
चहक -चहक-
वृहग- वृन्दों का -
मंगल गीत गवन-
दूर .....क्षितिज पर -
सतरंगी रंग रंगा है -
मंगल कलश सजा है-
ध्येय नया सा शायद-
हाँ शायद ...!!-
दूर ......!!!!! -
कुछ दिखता तो है ...!!
अब फिर चल पड़ा है-
कौतुक मन -
संग लिए-
गाती हुई पवन ....!!



29 comments:

  1. इतनी दिनों की ठंड के बाद यदि सूरज निकले तो मन मयूर हो उठेगा।

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  2. वाह...अलग सा रंग लिए हुए अद्भुत कविता...बधाई

    नीरज

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  3. क्षितिज पर -सतरंगी रंग रंगा है -मंगल
    बहुत बढ़िया ..बिम्ब का चयन किया है ..

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  4. कविता का हर एक शब्द बहुत सजगता से प्रयोग किया है ..भाव के अनुकूल शब्द का चयन आपकी लेखन प्रतिभा का परिचायक है ..शुक्रिया आपका

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  5. अनुपमा जी
    नमस्कार
    बहुत दिनों बाद
    मौसम ने करवट ली है
    आज कुछ धूप खिली है
    ........शब्दों का बहुत ही खुबसूरत ताना बाना !
    बधाई

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  6. नव -वधूसी आसमान
    ओढ़े है चुनरिया -
    सुर्ख लाल माथे पर -
    सूर्य की चमके ज्यों बिंदिया!!

    बहुत सुन्दर बिम्ब |
    अच्छी रचना | बधाई |

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  7. बहुत सुन्दर रचना!
    आपका शब्दचयन बहुत बढ़िया है!

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  8. बहुत सुन्दर कविता. बधाई.

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  9. राग भैरव जैसा-
    चहक-चहक विहग वृन्दों का-
    मंगल गीत गवन-

    शांतरस से ओत-प्रोत एक उत्तम कविता।
    बहुत सुंदर रचना, मन को प्रभावित कर गई।

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  10. suprabhat, suwichaar, sab kuchh suhana suhana........

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  11. बहुत सुन्दर बिम्ब |
    अच्छी रचना | बधाई |

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  12. bahut achi atiuttam kavita.shabdon ka chayan bahut achaa hai.badhi ho aapko.itani achi kavita likhane ke liya.गुनगुनी गुनगुनाती सी धुप में -गुनगुना उठा है वातावरण -तीर सी चुभती -हवा की ठंडक -मिटती चली जाती है -
    नव -वधूसी आसमान ओढ़े है चुनरिया -सुर्ख लाल माथे पर -सूर्य की चमके ज्यों बिंदिया -हल्का गुलाबी है चहुँ ओर का आवरण-
    रंग बिरंगे खिल उठे हैं ह्रदय सुमन -wah kya baat hai.

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  13. अच्छे भाव लिए सुंदर रचना

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  14. लक्ष्य अब फिर पुकारता है -
    चलो अब मत रुको -सुंदर से सुंदरतम पर हो-
    हम सभी का गमन -भोर भई अब -उल्लसित मन श्रवण करे

    बहुत खूबसूरत रचना ...

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  15. सुन्दर शब्दों की बेहतरीन शैली ।
    भावाव्यक्ति का अनूठा अन्दाज ।
    बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।

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  16. "ध्येय अब फिर निहारता है
    लक्ष्य अब फिर पुकारता है " बहुत सुन्दर पंक्तियाँ |
    बधाई
    आशा

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  17. वाह, बहुत ही सुन्दर भावों को समेटे हुई है आपकी कविता !
    अच्छा लिखती हैं आप !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  18. उत्कृष्ट कविता
    शब्द संयोजन बेहतरीन है
    बधाई
    आभार

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  19. शब्द संयोजन बहुत ही खुबसूरत ,बधाई

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  20. अच्छा है विचारों का जाल.

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  21. a beautiful, musical poem from a very musical person.

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  22. आप सभी को धन्यवाद -
    आपने मेरे लेखन को सराहा -
    आपकी टिप्पणियां मेरे लिए मार्गदर्शन हैं -
    कृपया ज़रूर पढ़े और मार्ग दर्शन दें -
    पुनः आभार

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  23. आपकी उत्कृष्ट रचना के साथ प्रस्तुत है आज कीनई पुरानी हलचल

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  24. धन्यवाद सुनीता जी ...इस प्रशस्ति के लिए ...

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!