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20 January, 2011

लो फिर आई ऋतू बसंत

बुलबुल के चहकने से -
कोयल के कुहुकने से -
फूलों के महकने से -
प्रभु-कृति जीवंत ....!!  
लो फिर आई -
ऋतु  बसंत...!!
लिए संग-संग-
 सुरभि अनंत ...!!!
डार -डार पर रही है डोल-
गाती हुयी राग हिंडोल -

है कैसी कुसुमित अनुभूति -
बोल रही मृदु वचन बहार -
कितने अद्भुत रंग बिरंगे -
फूलों पर लायी निखार-
हरसूं झूम रही बहार -
ऋतु में बहार -
उर में बहार -
सुर में बहार समाया -
कितने दिनों के बाद 
पवन ने राग बहार है गाया  ...!!

पेरी पहन के अवनि
चपला सी लर्जाती  है-
अँचरा  की पीली सरसों -
खेतों में लहराती है-
लहर लहर अलमस्त -
राग बसंत गाती है  -


कड़ी धूप हो या हो पाला-
देखा था एक सपन निराला  -
 करता था  अनवरत  परिश्रम--
मन  में  नहीं था कोई भी भ्रम -
बोये थे मेहनत   के  बीज-
 सींचा था पसीने से-
अपनी बगिया को  माली ने-
अब  जो  फैली है खुशहाली -
ताकता है व्योम से भी -
धीमे से मुस्कुराता -
 कंचन  सा चमचमाता-
     अंशुमाली ....!!!


  



30 comments:

  1. मौसमों की कठोरता के बाद अब आया है बसन्त।

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  2. राग -हिंडोल,बहार और बसंत ये तीनो बसंत ऋतू में गए जाते हैं -इस भावना को कविता में लाने का प्रयास किया है -पता नहीं कितना सफल हुई हूँ

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  3. सींचा था पसीने से माली ने-
    अब जो फैली है खुशहाली -
    ताकता है व्योम से भी -
    धीमे से मुस्कुराता -
    शब्दों की सुन्दरता से रचना और भी सुन्दर हो गयी है ,बधाई

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  4. बसंत के पूर्व बसंत के आगमन की सूचना देती अद्भुत रचना...वाह...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  5. सार्थक चित्रण बसन्त बहार का.

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  6. your creation is very good with apt words and beautiful expression. sachi me aa gayi BASANT.

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  7. प्रकृति का सुन्दर चित्रण !
    सुन्दर रचना बधाई दोस्त !

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  8. Priya Anupama, fir se ek anupam sukruti dene ke liye badhai. samajh me nahi aa raha ki ise geet kahoon ya sangeet, jo bhi hai bada hi shashwat aur sunder hai.vasant ko aai kahne ke liye sadhuvad aur dhanyavad.

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  9. बसंत का बहुत सुन्दर शब्दचित्र उकेरा है..बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  10. कविता पढ़ने तथा पसंद करने के लिए ह्रदय से आभार -
    नीरज जी -मेरी समझ से माघ का आगमन ही बसंत ऋतू का आगमन है -यह शुक्ल पक्ष है और माघ के कृष्ण पक्ष की पंचमी को बसंत -पंचमी का उत्सव मनाया जाता है .ऋतुओं के वर्णन में शीत का कम होना और माघ का आगमन -ये दोनों ही बसंत ऋतू के आगमन का प्रतीक हैं .-
    एक बार पुनः आप सभी का आभार .

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  11. @ अर्चना दीदी -आपकी शुभकामनाओं के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ...!! बात अगर हम सुन्दरता की कर रहे हैं और बसंत में अगर हम सृष्टि का स्वर्णिम विहान देख रहे हैं तो बसंत आई कहना और सोचना ही उचित लगता है .
    Thanks for your warm blessings .Please do keep guiding me .

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  12. पेरी का अर्थ पीली साड़ी से है जो ब्याह के सात फेरे लेते समय वधु पहनती है .वही रंग होता है जो सरसों के खेत का होता है .जब बसंती हवा चलती है तो ऐसा प्रतीत होता है मानो नव वधु का आँचल उड़ रहा है हर तरफ सुंदर फूलों को देख कर शुभ विचार मन में आते हैं .इसी सन्दर्भ में पेरी शब्द का इस्तेमाल किया है -शुभ और सुंदर का द्योतक है -पेरी

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  13. बनन में बागन में बगरो बसंत है!
    बसंत का उल्लास प्रस्फुटित कराती कविता ! राग रागिनियों का संगम लिए हुए !

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  14. सार्थक चित्रण बसन्त बहार का| आभार|

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  15. वसंत का बहुत सुन्दर कविता के साथ आप स्वागत कर रही हैं

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  16. ऋतू में बहार ,उर में बहार ,
    सुर में बहार समाया ,
    कितने दिनों के बाद
    पवन ने राग बहार है गाया ...!!

    बसंत ऋतु का मनोहारी चित्रण है आपकी इस खूबसूरत कविता में।

    बधाई।

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  17. है कैसी कुसुमित अनुभूति -बोल रही मृदु वचन बहार -कितने अद्भुत रंग बिरंगे -फूलों पर लायी निखार-हरसूं झूम रही बहार -ऋतू में बहार -उर में बहार -सुर में बहार समाया -कितने दिनों के बाद पवन ने राग बहार है गाया ...!!

    बसंत पर सुन्दर और भावपूर्ण कविता । बधाई।

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  18. वसंत ऋतू का बहुत सुन्दर चित्रण किया है आपने |बधाई |जब आपकी टिप्पणी अपनी किसी रचना पर देखती हूँ बहुत अच्छा लगता है |इसी प्रकार अपना स्नेह बनाए रखिये |
    आशा

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  19. आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
    सादर
    ------
    गणतंत्र को नमन करें

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  20. कड़ी धूप हो या हो पाला-
    देखा था एक सपन निराला -
    करता था अनवरत परिश्रम--
    मन में नहीं था कोई भी भ्रम -
    बोये थे मेहनत के बीज-
    सींचा था पसीने से-

    अनुपमा जी
    बहुत प्रेरणादायी पंक्तियाँ हैं ...बार बार पढ़ा ..हर बार नया अर्थ निकला ..और यह सच्चे कवि की खासियत होती है कि उसकी कविता के कई अर्थ एक साथ संप्रेषित होते हैं ......शुक्रिया
    आपकी इस प्रस्तुति ने दिल पर गहरा असर किया और अब मैंने आपका अनुसरण कर लिया .....भविष्य में भी पढना चाहूँगा आपको .....आपका आभार

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  21. बेहतरीन .... लाजवाब . इस खुबसूरत रचना के लिए क्या कहूँ ......?आपको बधाई ....

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  22. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

    Happy Republic Day.........Jai HIND

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  23. आदरणीया अनुपमा जी
    नमस्कार !

    बासंती रस - रंग से सुरभित सुवासित इस सुंदर सरस रचना के लिए कोटिशः आभार !
    बहुत उत्तम रचना है … हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

    स्मरण रहे तो बसंतपंचमी के आस-पास की मेरी पोस्ट्स देखने के लिए शस्वरं पर भी आने का आपको अभी से आमंत्रण है…

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  24. सजीव चित्रण, सुन्दर शब्दों में बसंत के आगमन को पिरोया है

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  25. bahut sundar basant aaya hai aapki post kafi let padh raha hu bahut sundar

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!