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24 August, 2011

जश्न-ए ज़िन्दगी .......!!!!!!

''किस क़दर पुरक़ैफ है तुझसे इश्क़ ऐ ख़ुदा....
           न बेवफाई का डर न जुदाई का कोई खौफ़ ''


ये शेर पढ़ते-पढ़ते मैं इन भावों में डूब ही गयी ....ये भाव अपने ब्लॉग परहमेशा के लिए  रखने का मन हुआ ...!!
अब पढ़िए मेरी नज़र से ...जश्न-ए-ज़िन्दगी .....!!


ऐ जश्न-ए ज़िन्दगी तुझे ..
कितना प्यार किया.....!!
कितना सराहा है...
कि तुझे अंतिम सांस तक भी ..
डूब कर जीने ..
और जीते रहने की खातिर ...
कर रहा हूँ अपनी ख्वाइश पूरी....
हंसते-हंसते चढ़ रहा  हूँ सूली.......!!!!  

34 comments:

  1. यह जिन्दगी ..और यह खुदा ...!

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  2. बहुत खूब... जश्न-ए ज़िन्दगी....

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  3. वाह मन में उतर गयीं पंक्तियाँ ....

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  4. एह जिन्दगी ..
    मंजिले तो सामने है मेरी
    लेकिन मिटी हैं राहें ...
    उन मंजिलो पर पहुँचने को
    खुद कि आसान राहें बना रही हूँ ..........अनु

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  5. सुन्दर..कम शब्दों में बहुत कुछ...

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  6. बहत सुन्दर .....बहुत खूब

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  7. ऐ जश्न-ए ज़िन्दगी तुझे ..
    कितना प्यार किया.....!!
    कितना सराहा है...
    कि तुझे अंतिम सांस तक भी ..
    डूब कर जीने ..
    और जीते रहने की खातिर ...
    कर रहा हूँ अपनी ख्वाइश पूरी....
    हंसते-हंसते चढ़ रहा हूँ सूली.......
    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति बधाई

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  8. बहुत खूब !जिन्दगी से ऐसा ही मोह होता है .
    BHARTIY NARI

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  9. खुदा से इश्क हो या जश्ने जिंदगी से आपकी नजर में दोनों एक ही हैं... बहुत ऊँची सोच है यह... बधाई!

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  10. बहुत सुन्दर...
    कम शब्दों में पूरा जीवन दर्शन समेत लिया आपने...
    सादर बधाइयां...

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  11. बस यही है ज़िन्दगी

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  12. बहुत ही बढ़िया।

    ----------

    कल 25/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  13. जिन्दगी को बहुत प्यार हमने किया।

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  14. इस कविता को ‘रामलीला मैदान’ से जोड़कर देखता हूं तो इसका अर्थ कुछ अधिक विशाल हो जाता है।

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  15. जब तक जियो जी भर के जियो ।

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  16. बहुत सुंदर जश्ने जिंदगी कम शब्दों मैं लिखी शानदार,दिल को छु लेनेवाली गहन अभिब्यक्ति /बधाई आपको /

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  17. सौ टके की बात कही है आपने, जिंदगी तो अपने हाथ में है जश्न मनाये या मातम.

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  18. सत्य कहा आपने

    जीना इसी का नाम है.

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  19. वाह वाह क्या खूब कहा है ....इसको पढ़ कर ग़ालिब का एक शेर याद आ गया....

    इशरते कतरा है दरिया में फ़ना हो जाना .....
    दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना.....

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  20. मै जिंदगी का साथ निभाता चला गया .

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  21. सुभानाल्लाह...........सलाम है इस जज्बे को|

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  22. बहुत सुन्दर रचना प्रभावशाली पंक्तियाँ।

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  23. जिंदगी से प्यार करना ही असल जीवन है .. अनमोल है ये जिंदगी इसे पुरजोर जीना ही असल जीवन है ...

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  24. waah ..bahut sundar..sooli pe chadh kar ho jati hain sab khvahishe poori...

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  25. सुंदर पंक्तियां, अच्छे भाव।

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  26. आभार ...जश्ने ज़िन्दगी ...पर अपने विचार देने के लिए......!!

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  27. आप ने क्या खूबसूरती से बयां किया है 'जश्न-ए-जिंदगी' को
    कर रहा हूँ अपनी ख्वाइश पूरी....
    हंसते-हंसते चढ़ रहा हूँ सूली.......!!!!

    आपका भाव जगत बहुत अनुपम है,अनुपमा जी.

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!