नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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15 September, 2011

दो रूप मेरे ....!!

painting by Abro Khuda Bux
मदमाती  रूप  पर..
इठलाती  यौवन  पर ...
थक  कर ..
एक  दिन  शांत ..एकांत  ..
देखती  हूँ  ..स्वयं को ..
दर्पण  में ... 
बड़े ध्यान  से ..और...
बड़े  अरमान  से .....!
देखती  हूँ सोचती हूँ ..
समझने की कोशिश करती हूँ ..
फिर....
समझती हूँ ...!!
हतप्रभ ...ठिठकी सी ..एक पल ...!
यकायक दिख गयी सच्चाई...
फिर  ये  बात  समझ  में  आई ...

  मुझमे ही ये दो रूप ..
 अन्धकार और धूप..
रात और दिन का ये भेद ...
 देखकर होता तो  है  खेद ...
 किन्तु  क्रूर  सच्चाई  है  जीवन  की  ...
  यही दशा है मेरे- मन की....!!
  दो रूप हैं  मेरे  ..
  जानती  हूँ मानती   हूँ  ..
 स्वीकार  भी  करती  हूँ ...
 पर तुम इसी रूप में ..
क्या मुझे देख पाओगे...?
क्या मुझे स्वीकार कर पाओगे....?
तब  ही  मेरा  मान  बढ़ा  पाओगे  ..!

क्या स्वयं को स्वीकार  कर  पाओगे ...?
क्यूँ  छुपते  हो   रात के  अन्धकार  में   ..
हार  जाते  हो  स्वयं  से  ही ...
दिन की उज्जवलता में.....
खुद  को  जानो  मानो  और  पहचानो  ..
तब ही अपना भी मान बढ़ा पाओगे .....!!
स्वयं  को स्वयं  से  ...
स्वयं  के  लिए ....जीत  पाओगे...
सहज है जीवन जान पाओगे.....!!


                                      संगीत के विषय में जानना चाहें  तो पधारें यहाँ ......सुरों  का  तसव्वुर ...
                                                                      swaroj sur mandir (स्वरोज  सुर  मंदिर )

55 comments:

  1. बहुत गहन चिंतन चिंतन| धन्यवाद|

    ReplyDelete
  2. बहुत गहन चिंतन| धन्यवाद|

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  3. एक दिन बिक जायेगा माटी के मोल...

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  4. सरल शब्दों में बहुत गहरे भाव
    सुन्दर प्रस्तुति

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  5. देखी रचना ताज़ी ताज़ी --
    भूल गया मैं कविताबाजी |

    चर्चा मंच बढाए हिम्मत-- -
    और जिता दे हारी बाजी |

    लेखक-कवि पाठक आलोचक
    आ जाओ अब राजी-राजी |

    क्षमा करें टिपियायें आकर
    छोड़-छाड़ अपनी नाराजी ||

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. बहुत कुछ कहती पंक्तियाँ।
    ---------
    कल 16/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. अँधेरा और उजला दोनों ही पक्ष होते हैं इंसान के पास .. गहन बात कही है ...सुन्दर प्रस्तुति

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  8. दो रूप अन्धकार और धुप... बहुत ही सुन्दर लिखा है अनुपमा जी.जो जान ले , मान ले जीतेगा ही.

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  9. गहरे भाव छुपे हैं रचना में.बहुत प्राभावशाली

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  10. जब तक दो हैं तब तक ही सारी खोज है खोज उसी एक की है... बहुत सुंदर कविता, बधाई!

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  11. खुबसूरत शब्दों का चयन.... सुन्दर अभिवयक्ति.....

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  12. स्वयं को स्वयं से ...
    स्वयं के लिए ....जीत पाओगे...
    सहज है जीवन जान पाओगे.....!! bas yahi janana hai apko....

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  13. हिट्स ऑफ इस पोस्ट के लिए...........अपने ही द्वंद्ध को प्रदर्शित करती ये पोस्ट दिल को छू गयी........बहुत सुन्दर|

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  14. मुझमे ही ये दो रूप ..
    अन्धकार और धूप..
    रात और दिन का ये भेद ...
    देखकर होता तो है खेद ...
    किन्तु क्रूर सच्चाई है जीवन की ...
    यही दशा है मेरे- मन की....!!
    दो रूप हैं मेरे ..
    जानती हूँ मानती हूँ ..
    स्वीकार भी करती हूँ ...
    पर तुम इसी रूप में ..
    क्या मुझे देख पाओगे...?
    क्या मुझे स्वीकार कर पाओगे....?
    तब ही मेरा मान बढ़ा पाओगे ..!
    purjor abhivyakti

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  15. कितने ही भाव और रूप समाये हैं भीतर...

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  16. बहुत ही गहनाभिब्यक्ति /हमेशा की तरह लिखी बेमिसाल रचना /क्या खूब लिखा है आपने /बहुत बधाई आपको /
    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है /जरुर आइये /

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  17. अति गहरे भावो को सरल सुन्दर शब्दो में ्प्रस्तुत कर सिया ..धन्यवाद...

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  18. ANUPAMA JI
    sundar rachna ke liye badhai sweekaren.
    मेरी १०० वीं पोस्ट , पर आप सादर आमंत्रित हैं

    **************

    ब्लॉग पर यह मेरी १००वीं प्रविष्टि है / अच्छा या बुरा , पहला शतक ! आपकी टिप्पणियों ने मेरा लगातार मार्गदर्शन तथा उत्साहवर्धन किया है /अपनी अब तक की " काव्य यात्रा " पर आपसे बेबाक प्रतिक्रिया की अपेक्षा करता हूँ / यदि मेरे प्रयास में कोई त्रुटियाँ हैं,तो उनसे भी अवश्य अवगत कराएं , आपका हर फैसला शिरोधार्य होगा . साभार - एस . एन . शुक्ल

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  19. गहन चिंतन..गहन अभिव्यक्ति

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  20. bahut mushkil hi insan khud ke aaine me khud ko dekh pata hai varna to khud hi katrata rahta hai.
    sunder, gehen abhivyakti.

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  21. सत्यम्‌! शिवम्‌!! सुन्दरम्‌!!!

    हम ख़ुद को आइना ही तो दिखाना नहीं चाहते।

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  22. बहुत उम्दा और गहरी प्रस्तुति!

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  23. बहुत अच्छी बात आपकी इस रचना में । धन्यवाद .. शुभकामनाएँ ...

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  24. मुझमे ही दो रूप...अन्धकार और धूप ...
    जिसने समझ लिया , जी लिया !
    गहन अभिव्यक्ति!

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  25. शुक्रवार
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  26. bahut gahan aur sateek bhaav prastut kiye hain aapne.badhaai.

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  27. रविकर जी आभार आपका आज चर्चा मंच पर मेरी कविता लेने के लिए......

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  28. यशवंत जी आभार आपका आज नयी-पुरानी हलचल पर मेरी कविता लेने के लिए......

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  29. बहुत ही अच्‍छी शब्‍द रचना ।

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  30. क्या कहने,
    बहुत सुंदर

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  31. Truth of life...A poem of deep emotions and thoughts.

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  32. मोती पिरो लाई है पंक्तियों में . क्या कहू . अति सुँदर .

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  33. बहुत गहरी अभिव्यक्ति ..

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  34. Hi I really liked your blog.

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  35. बहुत सुंदर कविता, बधाई!

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  36. मुझमे ही ये दो रूप ..
    अन्धकार और धूप..

    सुन्दर चिंतन.....
    सादर...

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  37. दिन की उज्जवलता में.....
    खुद को जानो मानो और पहचानो ..
    तब ही अपना भी मान बढ़ा पाओगे .....!!
    स्वयं को स्वयं से ...
    स्वयं के लिए ....जीत पाओगे...
    सहज है जीवन जान पाओगे.....!!

    सुन्दर, सार्थक और प्रेरणापूर्ण अभिव्यक्ति के
    लिए बहुत बहुत आभार.

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  38. बहुत गहरा चिंतन और प्रस्तुति |बधाई
    आशा

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  39. तस्वीर और शब्दों दोनों से ही सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  40. ब्रम्हाण्ड की सभी कृतियों में इन्हीं दो रूपों का समावेश है . आपने अपनी कृति में इस पहलू को बड़े सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है. देर-सबेर हर एक को यह महसूस होता ही है किन्तु हर कोई अभिव्यक्त नहीं कर पाटा है. बधाई हो

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  41. अपने आप को जीतना ही तो बहुत कठिन कार्य है।
    कविता में छिपा संदेश अनुकरणीय है।

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  42. आप सभी का आभार ...कृपया यही स्नेह बनाये रखें....सहज जीवन के लिए आवश्यक है .....

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  43. आप ब्लोगर्स मीट वीकली (९) के मंच पर पर पधारें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/आप हमेशा अच्छी अच्छी रचनाएँ लिखतें रहें यही कामना है /
    आप ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर सादर आमंत्रित हैं /

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  44. आदरणीय अनुपमा त्रिपाठी जी
    नमस्कार !
    बहुत अच्छी बात आपकी इस रचना में ।बहुत ही सुंदर .....प्रभावित करती बेहतरीन पंक्तियाँ ....

    कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई

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  45. आदत.......मुस्कुराने पर
    आइये चले मेरे साथ छिंदवाड़ा स्थित श्री बादल भोई जनजातीय संग्रहालय...... संजय भास्कर

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  46. अनुपमा जी प्रणाम !
    बहुत ही सुन्दर चित्रण ..
    मेरी कविता दो छवियाँ भी इसी भाव पर लिखी गयी है ... अपने विचार जरुर दीजियेगा ...

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!