नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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28 January, 2012

आज...बसंत चहुँ ओर छाया है .....!!

जब बसंत पड़ा अटा..
झूम उठी धरा ...
हर तरफ दिखे बसंत की छटा  



बसंती बयार में ..
भंवरे के गुंजन में ..
गूंजती है राग बसंत ...

बासंती छवि ..बसंती  रूप ...
जब बसो अखियन आन  ......
धरा के अधरों पर ..
कैसी  खिल  गयी  ..
कुसुमित  ..ये बासंती मुस्कान ...!!

तुम्हारी भक्ति  में डूबी धरा ..
तुम्हारा ही गुणगान करे  ..
तुम्हारा ही रंग लिए ..
तितली  उड़े  ..


सुरभिमय प्राणवायु से भरी हुई  है धरा ..
अमराई  पर हर्षाई बौराई  है धरा ...
तुम्हें ही चढ़ाती है ...
तुम्हारे दिए हुए फूल ...!!

कैसा उन्माद  ...
कण-कण पर छाया ...
हुलक-हुलक....पुलक-पुलक .....
हुलक-पुलक  पुलक--हुलक
लहराती ..गीत गाती है धरा ...
एक बरस एक युग सा बीता ..
 ओढ़े  पीली चुनरिया .....
खनकाए  हरी-हरी पतियन सी चुड़ियाँ      ..
किसलय लूमे-झूमे ...
लहरिया .. केसरिया पगड़ी धर .. ...
 पिया  घर आया है ...
आज ..बसंत  चहुँ  ओर  छाया  है  .....!!
आज ..बसंत  चहुँ  ओर ............................................................................................... छाया  है  ............................................................................................................

45 comments:

  1. बासंती छवि ..बसंती रूप ...
    जब बसो अखियन आन ......
    धरा के अधरों पर ..
    कैसी खिल गयी ..
    कुसुमित ..ये बासंती मुस्कान ...!!
    अनुपम भाव संयोजन लिए बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ..बसंत पंचमी की शुभकामनाएं

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  2. बसती रंग बिखेरती हुई रचना सुन्दर बन पड़ी है . आप पर विशेष अनुकम्पा हो माँ की.शुभकामनाएं...

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  3. तुम्हारी भक्ति में डूबी धरा ..
    तुम्हारा ही गुणगान करे ..
    तुम्हारा ही रंग लिए ..
    तितली उड़े .......सुन्दर मनभावन रचना...बसंत पंचमी की शुभकामनाए....

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  4. उत्सव ही उत्सव ... लहराती ..गीत गाती है धरा ...
    एक बरस एक युग सा बीता ..
    ओढ़े पीली चुनरिया .....
    खनकाए हरी-हरी पतियन सी चुडियाँ ..
    किसलय लूमे-झूमे ...हवाएं गुनगुना रही हैं

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  5. है उन्माद मचा चहुँ ओर,
    आया बसन्त ले पीत छोर..

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  6. हुलक-हुलक....पुलक-पुलक .....
    हुलक-पुलक पुलक--हुलक
    लहराती ..गीत गाती है धरा ...

    ध्वन्यात्मक शब्दों का जोर
    बसंत छाया चहुँ ओर

    सुन्दर प्रस्तुति

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  7. कैसा उन्माद ...
    कण-कण पर छाया ...
    हुलक-हुलक....पुलक-पुलक .....
    हुलक-पुलक पुलक--हुलक
    लहराती ..गीत गाती है धरा ...

    आँखों के आगे सारी सृष्टि नाच उठी आपका वर्णन पढ़ कर..
    बहुत सुन्दर.

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  8. केसरिया पगड़ी धर
    पिया घर आया है ...
    आज बसंत चहुँ ओर छाया है.....

    सुंदर पंक्तियाँ बहुत सुंदर रचना

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  9. सुन्दर अभिव्यक्ति

    बसंत पंचमी की शुभकामनएं

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  10. बसंत पंचमी की शुभकामनाएं....!

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  11. बसंत का वर्णन ...बहुत बसंती है
    बसंत पञ्चमीं की शुभ कामनाएं

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  12. वाकई चारों ओर बसंत छाया है..सुन्दर प्रस्तुति.

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  13. बसंत पंचमी पर बेहतरीन रचना।


    वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  14. अनुपमा जी प्रणाम !
    "सुरभिमय प्राणवायु से भरी हुई है धरा ..
    अमराई पर हर्षाई बौराई है धरा ..."
    आपके ब्लॉग पर प्रथम आगमन का अनुभव प्रफुल्लित कर देने वाला रहा ....बसंत पंचमी की शुभकामनाएं - प्रदीप

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  15. कुछ अनुभूतियाँ इतनी गहन होती है कि उनके लिए शब्द कम ही होते हैं !
    बसंत पचंमी की शुभकामनाएँ।

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  16. स्वागत बसंत, स्वागत बसंत।

    सुंदर रचना।

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  17. प्रकृति के सुंदर रंग भी ईश्वर की ही दें हैं.... सुंदर वासंतिक रचना

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  18. बहुत सुंदर कविता. बसंत ऋतु की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  19. बेहतरीन रचना !


    वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  20. ब्लॉग बुलेटिन पर की है मैंने अपनी पहली ब्लॉग चर्चा, इसमें आपकी पोस्ट भी सम्मिलित की गई है. आपसे मेरे इस पहले प्रयास की समीक्षा का अनुरोध है.

    स्वास्थ्य पर आधारित मेरा पहला ब्लॉग बुलेटिन - शाहनवाज़

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  21. बहुत सुंदर
    सच कहू तो आपकी रचना पढने के बाद मुझे आज पता चल रहा है कि कल बसंत पंचमी थी। चुनावी सफर में हूं, बिल्कुल कुछ भी नहीं पता। ये सफर भी जल्दी खत्म नहीं होने वाला है।28 फरवरी तक जारी रहेगा।

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  22. सुंदर अभिव्यक्ति..

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  23. वसंत के इस स्वागत गान पर लगता है मुग्ध होकर वसंत बस यहीं ठहर जाने की कसम खाकर न बैठ जाए!! अनुपमा जी, अनुपम वर्णन!!

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  24. अरे वाह आपकी कविता ने तो विभोर कर दिया ! इस सुरभित मदमाती वासंती बयार ने हमारे मन की धरा पर भी वसन्त शानदार आमद की दस्तक दे दी है ! बहुत सुन्दर रचना ! वसन्त की आपको हार्दिक शुभकामनायें !

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  25. सुंदर रचना...बसंत पञ्चमीं की शुभ कामनाएं.

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  26. अमराई पर हर्षाई बौराई है धरा ..

    bahut sundar abhiwayakti

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  27. बधाई ||
    खूबसूरत प्रस्तुति ||

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  28. कैसा उन्माद ...
    कण-कण पर छाया ...
    हुलक-हुलक....पुलक-पुलक .....
    हुलक-पुलक पुलक--हुलक
    लहराती ..गीत गाती है धरा ...
    एक बरस एक युग सा बीता ..
    ओढ़े पीली चुनरिया .....
    वाह ....... बसेत बसंत पंचमी की शुभकामनायें

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  29. लहरिया .. केसरिया पगड़ी धर .. ...
    पिया घर आया है ...
    आज ..बसंत चहुँ ओर छाया है .....!!very nice.

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  30. पीताम्बर ओढे हुए धरती मधुमास है
    अंबर की छांव तले छाया उल्लास है

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  31. सजीव चित्रण वसंत का |
    आशा

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  32. बहुत ख़ूबसूरत एवं मनमोहक रचना! बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें !

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  33. बसंत ऋतू का सजीव बहुत सुंदर चित्रण , प्रस्तुति अच्छी लगी.,

    welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....

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  34. कैसा उन्माद ...
    कण-कण पर छाया ...
    हुलक-हुलक....पुलक-पुलक .....
    हुलक-पुलक पुलक--हुलक
    लहराती ..गीत गाती है धरा ...
    एक बरस एक युग सा बीता ..
    ओढ़े पीली चुनरिया .....

    बसंत आया है और आपकी इस सुंदर पोस्ट ने उसमें अद्भुत रंग भर दिये हैं, टन मन को बासंती रंग में रंग देने वाली सुंदर रचना...

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  35. लहरिया .. केसरिया पगड़ी धर .. ... पिया घर आया है ...
    आज ..बसंत चहुँ ओर छाया है .....!!

    बहुत खूब अनुपमा जी - शब्द, भाव और चित्र के संयोग से तो ऐसा ही लगता है कि सचमुच वसंत आ गया है आपके ब्लॉग पर भी -- वाह क्या बात है?
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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  36. आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी और हौसला अफ़जाही के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!

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  37. आपके इस उत्‍कृष्‍ठ लेखन का आभार ।

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  38. आभार ...रंग बसंती आपको भाये ...

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  39. आपकी इस रचना को कल (२-२-१२) की आंच पर लिया जा रहा है। कृपया पधार कर समीक्षक को प्रोत्साहित करें।

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार मनोज जी ...

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  40. बहुत खूबसूरत बासंती बयार

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!