नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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19 November, 2012

अक्षरतत्व .....अमरत्व की ओर ......!!!!

सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड अधीन अक्षर के .....
अक्षर का ...ज्ञान का बोलबाला ...
मन रे ......तू भी बन जा  राही मतवाला ...

अब प्रथम चरण  धर ....
ज्ञान मार्ग पर हो जा अग्रसर ....
ज्ञान का मान .....सदैव बढ़ाता सम्मान ....
अक्षरतत्व  ले जाएगा .....
अमरत्व की ओर ........
वर्ण  से सुवर्ण की ओर  .........
बोध से सुबोध की ओर ...
घ्यान से अध्ययन  की ओर ...
ध्याय से स्वाध्याय की ओर  .......
ब्रह्म  से नाद की ओर ...
नाद से अनहद की ओर ....
आई ...मन छाई .........जीवन में सुवर्ण विभोर ....


व्योम विहंगम ....
पंछी कलरव ....
टूटी तन्द्रा ...जागा सा मन ...
सकल जगत नाद युक्त .....
मन कर्मयुक्त ...
वचन प्रेम युक्त ....
घट घट रची प्रभु माया ...
खोल चक्षु देखा ...
प्रभु संदेस पाया ....
अक्षर तत्व में निहित .........
ज्ञान ही बल .....
ज्ञान ही क्षुधा मिटाए वो जल ...
ज्ञान ही ध्येय ....
ज्ञान ही प्रमेय .....
ज्ञान ही धारा ....ज्ञान ही प्रवाह .....
ज्ञान से  वंचित ....
ठहरे हुए पानी सा ....हठ ...अभिमान हुआ  मन में संचित ...!!!!
प्रकृति की सुकृति में रचित ..
सुवर्ण ग्रहण करती हुई ...
स्वर लहरी सुनती हुई ....
तेजस्वि नावधीतमस्तु ............
डग भरूँ  ...मग चले ....डग-मग अब ... अनंत की ओर .....!!!!!!!!!!!


त्रिवेणी पर मेरा चोका यहाँ पढ़ें ....
http://trivenni.blogspot.in/2012/11/blog-post_22.html?spref=fb

38 comments:

  1. तमसो मा ज्योतिर्गमय..

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  2. वाह...
    बहुत सुन्दर अनुपमा जी....
    आपको बहुत दिनों बाद पढ़ कर अच्छा लगा....अब रुकियेगा मत.
    <3
    सस्नेह
    अनु

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    Replies
    1. अनु बहुत बहुत आभार इतनी प्यारी भावना के लिए ....काव्य और गायन ईश्वरीय होता है ...!!ईश्वर की कृपा रहे बस .....
      हाँ ये ज़रूर है ...अब की बार लंबी छुट्टी पर जाऊँगी तो आप सब को इत्तला कर जाऊँगी .....कि ढूंढ न मचे ....:))
      घर-गृहस्थी में कभी कभी छुट्टी लेना तो चलता है न ...?

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  3. डग भरूँ ...मग चले ....डग-मग अब ... अनंत की ओर ...

    बहुत सुंदर,,उत्कृष्ट रचना,,

    recent post...: अपने साये में जीने दो.

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  4. आपके इस प्रविष्टी की चर्चा बुधवार (21-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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    Replies
    1. बहुत आभार प्रदीप जी ....

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  5. राकेट के अविष्कारक - शेर - ए - मैसूर टीपू सुल्तान - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    Replies
    1. बहुत आभार शिवम ....आपका प्रयास अद्भुत रहता है ....टीपू सुल्तान को नमन ....हृदय से आभार मेरे काव्य के चयन के लिए ....!!बहुत सुंदर बुलेटिन है ....

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  6. कविता बाकई मन की गहराईयों में उतर गयी,एकबार फिर अच्छी कविता के लिए बधाईयाँ !

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  7. अद्भुत प्रवाह लिये बहुत ही प्यारी रचना है अनुपमा जी ! आपको पढ़ना सदैव मन में अनोखी शान्ति का प्रसार करता है ! अनन्त शुभकामनायें !

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  8. वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति हमेशा की तरह अनुपमा जी आपको पढना बहुत अच्छा लगता है हार्दिक बधाई

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  9. पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  10. ज्ञान को महिमामंडित करती सुंदर रचना .... बहुत भाव प्रवण ॥

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  11. ज्ञान से वंचित ....
    ठहरे हुए पानी सा ....हठ ...अभिमान हुआ मन में संचित ...!!!! anmol..

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  12. ज्ञान ही बल .....
    ज्ञान ही क्षुधा मिटाए वो जल ...
    ज्ञान ही ध्येय ....
    ज्ञान ही प्रमेय .....
    ज्ञान ही धारा ....ज्ञान ही प्रवाह .....
    ज्ञान से वंचित ....
    ठहरे हुए पानी सा ....हठ ...अभिमान हुआ मन में संचित ...!!!!

    बहुत बहुत बधाई आपको इस कविता के लिए...उत्कृष्ट कृति. एक एक शब्द दिल को छो गए.

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  13. डग भरूँ ...मग चले ....डग-मग अब ... अनंत की ओर .....!!!!!!!!
    ये भाव सदा यूँ ही रहें ...
    सादर

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  14. बहुत सुंदर दिव्यता भरे भाव....!

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  15. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.......जज़्बात पर भी नज़रे इनायत हो ।

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  16. ह्रदय अमरत्व भाव को संचित कर रहा है . अति सुन्दर..

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  17. ज्ञान ही धारा ....ज्ञान ही प्रवाह .....
    ज्ञान से वंचित ....
    ठहरे हुए पानी सा ....हठ ...अभिमान हुआ मन में संचित ...!!!!
    ...कितना सच और सुन्दर !!!!!

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  18. इस ज्ञान की धारा में झरने जैसे बहते चले गए....
    बहुत सुन्दर रचना !:)
    ~सादर

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  19. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.......

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  20. अति सुंदर रचना। मेरे नए पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद।

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  21. ब्रम्ह से नाद की ओर ...
    नाद से अनहद की ओर ....
    रचनात्मकता को पंख लग गए हैं इस रचना में .

    ब्रह्म कर लें .

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    Replies
    1. जी बहुत आभार .....त्रुटि सुधार दी है ....!!

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  22. नाद अक्षर ब्रह्म और आरम्भ से अंत तक गुंजायमान ओंकार

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  23. बहुत सुंदर आध्यात्मिक प्रस्तुति . नाद से अनहद की ओर असत्य से सत्य की ओर ।

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  24. बहुत ही दार्शनिक, अध्यात्मिक ... सुन्दर अलंकृत रचना
    सादर
    मधुरेश

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  25. पढ़ने के बाद मन में देर तक गूंजती रहने वाली कविता।

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  26. व्योम विहंगम ....
    पंछी कलरव ....
    टूटी तन्द्रा ...

    जागा सा मन ...
    शब्द प्रवाह बहुत सुंदर

    बेहतरीन !

    आदरणीया अनुपमा जी
    सुंदर भाव - सुंदर शब्द !
    खूबसूरत और सार्थक रचना !

    आपकी पिछली पोस्ट पर सुने गए गीत की अनुगूंज मन को अभी भी आनंदित किए हुए है …
    आभार !
    …आपकी लेखनी और वाणी से सुंदर रचनाओं का सृजन ऐसे ही होता रहे, यही कामना है …
    शुभकामनाओं सहित…

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  27. सभी गुणी जानों का हृदय से आभार .....!!

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  28. गहन दर्शन
    सादर -
    देवेंद्र
    मेरे ब्लॉग पर नयी पोस्ट -
    विचार बनायें जीवन

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!