नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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19 September, 2014

क्षणिकाएं.....!!

रे मन
प्रेम पर  ठहरी हैं
झील  सी गहरी हैं
तोरे मन की बतियाँ ......
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प्रवृत्ति है ये जल की ,
जल  भी
जब कभी नदी सा
कल कल कल कल ....
बह नहीं पाता
तब भी रुका हुआ .....
यह जल ,
सरोवर में,
ठहरा हुआ ,
शब्दों    के  हृदय कमल
  है खिलाता !!

06 September, 2014

तुम्हारे मेरे बीच की कड़ी

तुम्हारे मेरे बीच की कड़ी
सिर्फ एहसास ही नहीं है,
सिर्फ शब्द ही नहीं है,
सिर्फ प्रेम ,ईर्ष्या ,द्वेष या
सिर्फ  आक्रोश  भी नहीं है
बल्कि संकुलता से  परे ,
तुम्हारा वो सशक्त मौन है ,
मेरे चारों तरफ ,
जो तुम्हारे होने का प्रमाण  देता है
अपनी ऊर्जस्वितता में,

और बांधे रखता है सदा ,
दुख सुख में ,
हमे इस अटूट  बंधन में...!!