01 December, 2022

शब्द शब्द कहती है !!

पेड़ों की झुरमुठ में
चहकते हुए पंछी
और
अनायास झरती
 बूंदों की लड़ी ,
वो घड़ी ,
साँसों की सरगम में ,
भावों की चहकन में
गुंथी हुई .....
शब्दकार  के शब्दों में
जब अनगढ़ से भावों को
गढ़ती है
तब
मेरी कविता मुझसे
शब्द शब्द कहती है !!

अनुपमा त्रिपाठी
  "सुकृति "



12 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २ दिसंबर २०२२ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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    1. धन्यवाद श्वेता जी👍👍❤

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  2. साँसों की सरगम में ,
    भावों की चहकन में
    गुंथी हुई .....
    मनमोहक
    सादर

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  3. साँसों की सरगम में ,
    भावों की चहकन में
    गुंथी हुई .....
    मनमोहक
    सादर

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  4. आदरणीया मैम, सादर प्रणाम। बहुत सुंदर कविता, माँ प्रकृति की निकटता हमें रचनात्मक और काव्यात्मक होने के लिए प्रेरित करती है। बहुत प्यारी लगी आपकी यह रचना। आपसे अनुरोध है, मेरे भी दो ब्लॉग हैं, कृपया आ कर अपना आशीष दीजिये।

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  5. भावों को गढ़ सुंदर कविता सृजित की है ।

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  6. साँसों की सरगम में ,
    भावों की चहकन में
    गुंथी हुई .....
    शब्दकार के शब्दों में
    जब अनगढ़ से भावों को
    गढ़ती है////
    अनकहे को जो सहजता से कह जाये वही कविता है।भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रिय अनुपमा जी।सस्नेह शुभकामनाएं 🙏

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  8. सुंदर कविता

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  9. सच ! ऐसे सुंदर भावभीने दृश्यायावलोकन पर कविता गुनागुनाएगी ही ! बहुत सुंदर लिखा है ।

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  10. बोलती हुई कविता ... बहुत खूब ...

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  11. बोलती हुई कविता ... लाजवाब ...

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