13 August, 2021

धीरे धीरे चलती रही !!


धीरे धीरे चलती रही ,

वक़्त के साथ सिमटती रही यादें।

किसी अमुआ की फुनगी पर 

 बुलबुल की तरह ,

किसी नीम की टहनी पर 

 चुलबुल की तरह ,

चम्पई  सुरमई गीतों में 

महकती रही यादें

मेरे साथ साथ यूँ ही 

चलती रही यादें !!


कभी बादलों के गाँव में 

चंदा की तरह ,

कभी आसमान की छाँव में 

सूरज की तरह ,

कभी धरती पर चमेली सी 

उड़ती ,ठहरती महकती रही यादें 


मेरे साथ साथ यूँ ही 

मचलती रही यादें !!


अनुपमा त्रिपाठी 

"सुकृति "


13 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज शनिवार (१४-०८-२०२१) को
    "जो करते कल्याण को, उनका होता मान" चर्चा अंक-४१५६ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. मेरी कृति को चर्चा मंच का पटल देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद अनीता जी एवं शास्त्रीजी |

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  2. बहुत सुंदर !
    यादें और प्रकृति से सजे कोमल बिंब रचना को उत्कृष्ट बना गई।
    अभिनव सृजन अनुपमा जी।

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  3. अपना पथ धरती हैं यादें,
    बड़ा विवश करती हैं यादें।

    सुन्दरता से उभारा है यादों का उतरना।

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  4. वाह...
    प्रिय अनुपमा जी सुंंदर भावपूर्ण एहसास
    मेरी चंद पंक्तियाँ-

    सफर तो चलेगा समेट कर मुट्ठी भर यादें
    कुछ तो सौगात मिला
    ऐ जिंदगी चंद अनछुए एहसास के लिए
    दिल से शुक्रिया है तुम्हारा।

    सादर

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  5. बहुत अच्छी कविता।सादर अभिवादन

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  6. ज़िन्दगी यादों का पिटारा ही तो है अनुपमा जी। अच्छी कविता हेतु अभिनंदन आपका।

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  7. बहुत ही सुंदर सृजन! सच में यादें कुछ ऐसी ही होती है!

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  8. कभी कभी सोचता हूँ कि गर यादें तो क्या होता

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  9. बेहतरीन सृजन

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  10. बहुत सुंदर कविता अनुपमा त्रिपाठी "सुकृति " जी 🌹🙏🌹

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  11. प्रकृति की सुंदर उपमा से सज्जित यादें.. यादों का अनोखा अहसास ।

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