नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

04 January, 2011

धुन्ध (DHUNDH) 26

रात अँधेरी सूनसान -
कैसी धुन्ध  में लिपटे हैं प्राण-
क्षीण सी होती जाती है दृष्टि 
व्यथा मिटा सके
 बरसे जो  नयन - वृष्टि -


कहाँ छुप गया है
 सभ्यता -संस्कृती का 
वो अनमोल खज़ाना -
जिसका डंका पीटता है -
आज भी सारा ज़माना-


हम क्यों बदलने पर आमादा हो गए ..?
आस्था के कच्चे धागे कहाँ खा गए ..?
पत्थर की पूजा करके -
कैसे मिलेंगे भगवान .? 
श्रद्धा भक्ति और सेवा का -
कौन करेगा अब गुणगान .?


काश बीत जाये ये शीतलहर ......!!
नष्ट हो हमारी सभ्यता पर छाया -
ये धुन्ध का कहर .....!!
शीत से थरथराता  कंपकपाता है मन -
नित्य ही करता है जप -
जीवन विलास  है या तप..?


बरसों से जाग-जाग कर -
की थी आराधना -
साध साध कर की थी साधना -
और किया था अंतर्मन का -
गहन अध्ययन ...!!
जैसे सागर मंथन से
 विषपान कर चुका था मन ...!!
गहराते तम  से -
सहसा हट गए नयन -


कैसे व्योम पर पहुंची मेरी दृष्टि -
शुभप्रभात की अमृत बेला -
देख रही थी सृष्टि .............!!!!
छंट चुकी थी धुन्ध ...!!
साफ़ दिख रही थी उषा की प्रथम किरण...
अकस्मात् ही गुनगुना उठा मेरा  मन -
न बदलेंगे हम -
न बदलने देंगे ज़माने को 
आओ शपथ लें ये  नया वर्ष मनाने को ........!!!!!