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05 July, 2012

बरस भी जाओ ...!!

तुम बिसर गये...
मैं राह तकूँ ...

तुम क्यों रूठे ...
मैं न जानूँ ...

तुम हृदय हीन ...
मैं न मानूँ ...

 कैसी है ये लगन ...
तृषित मन ...
तिड़क तिड़क ..
खुष्क नयन ...
बाट तके ....
अब नेह बरसाओ ....
ओ सजन .. ...बरस भी जाओ ...!!

31 comments:

  1. तुम हृदय हीन ...
    मैं न मानूँ ...

    जहाँ आस्था हो वहां ऐसे विचार भी कहाँ आते हैं....सुंदर

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  2. बिलकुल बरसेंगे जी,बदरा भी और बालम भी !

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  3. अब तो बरसेंगे ही...............

    इतने स्नेह से जो बुलाया है....
    :-)

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  4. ऐसी कवितायेँ ही मन में उतरती हैं ॥
    ....शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने ...प्रशंसनीय रचना।

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  5. सजन तो बरस ही जायेंगे बिन बदरा के भी..इतनी प्यारी मनुहार पर...भींग उठेगा तन-मन..

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  6. खुश्क नयन ...
    बाट तके ....
    अब नेह बरसाओ ....
    ओ सजन .. ...बरस भी जाओ ...!!

    :):) नेह की भी बारिश हो खूब धूमधड़ाके से ...शुभकामनायें

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  7. आपका मेघ मल्हार और मनुहार , इन्द्रदेव के पास पंहुचा , कारे कजरारे मेघा घिर आये है , उम्मीद है भिगो कर ही जायेंगे , आपके सुर संगीत बद्ध रचना की तरह . आप की कवितायेँ इतनी सोलफुल होती है की पाठक अपने आप को भौतिकता से कुछ क्षणों के लिए अपने को दूर पाता है

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  8. उत्कृष्ट प्रस्तुति |
    शुभकामनायें ||

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  9. अद्भुत शब्द निनाद, वाह, कई बार पढ़ा..

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  10. नेह और मेघ दोनों जरुर बरसेंगे... बहुत सुन्दर प्रस्तुति... शुभकामनायें

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  11. बेहद अच्छे जीवंत से भाव

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  12. तुम हृदय हीन ...
    मैं न मानूँ ...बहुत सुन्दर भाव..बस बरसने को तैयार सुन ली पुकार..

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  13. भावमय करते शब्‍द ... उत्‍कृष्‍ट लेखन ...आभार

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  14. अब तो मेघ सजन को बरसना ही होगा...इतनी लगन कौन दिखाता है...

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  15. हाय...अब तो बरसना ही पड़ेगा :)

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  16. खुष्क नयन ...
    बाट तके ....
    अब नेह बरसाओ ....
    ओ सजन .. ...बरस भी जाओ ...!!

    बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,,,,,उत्‍कृष्‍ट लेखन,,,,

    MY RECENT POST...:चाय....

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  17. बहुत सुन्दर भावमय करती रचना...
    सुन्दर :-)

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  18. ध्वन्यात्मक शब्द और सुन्दर अभिव्यक्ति

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  19. बादल अगर बैरी हुआ है, तो मनाने का अंदाज भी निराला है।

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  20. बरस बरस मेघा अब तन और मन सूखा जाये ।

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  21. बहुत प्यारा मनुहार मेघों से बहुत प्यारी रचना मेघों का मन जरूर पिघलेगा

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  22. अब आप इतने प्यार से और इतने सुंदर शब्दो से बुलाएँ और वो ना आयें ऐसा तो हो ही नहीं सकता अनुपमा जी अब तो आकर बरसना ही होगा दोनों को ;-)

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  23. तुम हृदय हीन
    मैं न मानू ....
    जहाँ आस्था का सैलाब हो
    वहाँ सब समर्पित हो जाते हैं ।
    बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना ।

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  24. सजन कैसी है ये लगन ...
    तृषित मन ...
    तिड़क तिड़क ..

    तिड़क तिड़क तिड़क , तिड़क तिड़क तिड़क
    अदभुत,अनूठी ,अनुपम प्रस्तुति.
    कमाल के शब्द और भाव हैं,आपके.

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  25. आभार आप सभी का .....!!
    सुन ली आखिर मनुहार ...बरस ही गए प्रभु ....!!!

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  26. बहुत खूब... सुंदर आवाहन...
    मनुहार सफल होने पर बधाइयाँ भी...
    सादर।

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