नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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03 July, 2012

छूम छनन नन छन छन ......

आई  ....सावन ऋतु आई ..भरमाई..

सुघड़  नार  सी बलखाई ..बौराई ...इठलाई ...
फिर ...शरमाई ...!!
फिर घूम घूम ..झूम झूम ...घटा छाई ...!!

काहे बुंदियन  बरसन आई ...??
  खिल-खिल लजाई ...

रस   फुहार लाई ...!!
आई आई ....सावन ऋतु आई ...!!

अर र र  ....हंसत ......चलत ....उड़त...
झूम झूम मदमस्त ...बैरी पवन ...
सजनी का डोले-डोले बांवरा मन .....!!

लहर लहर लहराए चुनरिया  ....
पायल संग उड़े उड़े तन ..............
थिरक थिरक  थिरके चितवन ..!!

झूम झूम झन झन ...
छूम छनन नन छन छन ...!!

मनवा तू भी  झूम ले रे ...
तक धिना धिन ... घूम ले रे ...
मुस्कुराले ...संग गा ले ... कुछ क्षण ...!!

बीत जायेगा पल में ....
ये निष्ठुर ..
क्षण भंगुर जीवन ...

मन वीणा के  तार मिला ले .....
कजरी से सुर ताल मिला ले ...
जीवन में अनुराग सजा ले ...!!
मिला तुझे है मानव जीवन ...
रुच रुच इसको भाग जगा ले ....
झूम झूम झन झन ...
छूम छूम छन छन ..
छूम छनन नन छन छन ...!!
छूम छनन नन छन छन ....!!!!!!!

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सर्वप्रथम ....आज गुरु पूर्णिमा पर श्री गुरुवे नम: ....!!


आज से ही मन झूम रहा है ..... कल सावन का पहला दिन .....हरियाला  सावन आया .......
उमंग ...उल्लास ...उत्साह से भरा .....
मन का रंग हरा-हरा ....
प्रभु से प्रार्थना है ....यही रंग ...यही उल्लास ...उमंग से हरा भरा रहे .......आप सभी का जीवन ........
छूम छनन नन छन छन ...!!

49 comments:

  1. बहुत खूब, यहाँ तो हरी दूब सूखकर सोना हुई जा रही है, कल शायद कुछ बरसे ...

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  2. बरसती बूंदों संग झूमता मन.... आह , सुंदर

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  3. सावन का महिना लगने को है , आपकी रचना ने मन के साथ तन को भी भिगो दिया .....

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  4. हमारी दिल्ली में अभी भी सूखा पड़ा है इसलिए इस कविता के साथ हम तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं.आप भाग्यशाली हैं जो कविता को यथार्थ में भी जी रही हैं !

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  5. बहुत बढ़िया!!

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  6. मन वीणा के तार मिला ले .....
    कजरी से सुर ताल मिला ले ...
    जीवन में अनुराग सजा ले ...!!
    मिला तुझे है मानव जीवन ...
    रुच रुच इसको भाग जगा ले ....!

    मधुर - मधुर अहसासों से भरी रचना ...अंतिम पंक्तियाँ काफी प्रेरक है ....!

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  7. बादल की बूंदों में संगीत होता है, लय, छंद और ताल होते हैं। आपने इन सब को इस काव्यात्मक प्रस्तुति में पकड़ा है। शब्द चयन और शिल्प ऐसा है कि बस उन पर मन मयूर नाच उठता है।

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  8. छन्दमय, टिप टिप बरसती बूँदों जैसा

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  9. आपने तो वर्षा-बूँदों की ताल के साथ अपने छंदों की लय मिला दी - साकार कर दिया नर्तन करते शब्दों में !
    अति सुन्दर !

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  10. सूखा ही गया आषाढ़ , सावन कुछ हरियाये तो बात !
    वैसे मन का सावन तो भर जेठ भी बरसता ही रहा :)
    नृत्य करते शब्दों की सुन्दर रचना !
    गुरुपूर्णिमा की बहुत शुभकामनायें !

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  11. उल्लास और जीवन से परिपूर्ण रचना.

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  12. पंक्तियाँ दग्ध ह्रदय को शीतलता प्रदान कर रही है . छन छन बरसती बूंदों की सरगम , शास्त्रीयता और भावनाओ का अनुपम संगम. अब तो बरस ही जाओ मेघा .

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  13. झूम झूम झन झन ...
    छूम छनन नन छन छन ...!!


    बहुत सुंदर रचना, इसके भाव में मौसम की बहार झलकर रही है

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  14. अनुपम भाव लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति
    कल 04/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' जुलाई का महीना ''

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    Replies
    1. बहुत आभार सदा जी .

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  15. छनन छन्न सावन का आनंद लीजिये यहाँ तो ठन ठन गोपाल बने हुये हैं .... न मेघ दिखते हैं न आशा जन्म लेती है ... और दो चार दिन में कुछ बुँदे पड़ जाएँ तो कह नहीं सकते ....

    उल्लास से भरपूर रचना .... इसे तो स्वर में ( गा कर ) पोस्ट करना चाहिए था :):)

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    Replies
    1. :)) बहुत बढ़िया लिखा है दी ..!!
      उधर सुन रहे हैं .... बुरा हाल है ....हम भी मना रहे हैं ...अब तो वर्षा होनी ही चाहिये ....!!

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  16. आई ....सावन ऋतू आई ..भरमाई..

    सुघड़ नार सी बलखाई ..बौराई ...इठलाई ...
    फिर ...शरमाई ...!!
    फिर घूम घूम ..झूम झूम ...घटा छाई..वाह: बहुत खुबसूरत छन्दमय रचना.. बधाई अनुपमा जी

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  17. बहुत ज़रूरत थी इस भीनी-भीनी फूआर की ...
    आभार!

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  18. जैसे बरखा की बूँदें छन छन कर रही हों ... झंकृत कर रही हों धरती की कोख पे ...
    मस्त कर देने वाली रचना ...

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  19. लहर लहर लहराए चुनरिया ....
    पायल संग उड़े उड़े तन ..............
    थिरक थिरक थिरके चितवन ..!!

    झूम झूम झन झन ...
    छूम छनन नन छन छन ...!!

    आपकी कविता पढ़ते पढ़ते ही मन मयूर नाचने लगा...सावन की फुहार में भिगोती सुंदर कविता...

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  20. आहा ..झूम झूम के गाता हुआ सा गीत ..मन भी झूम उठा.

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  21. मन वीणा के तार मिला ले .....
    कजरी से सुर ताल मिला ले ...
    जीवन में अनुराग सजा ले ...!!
    मिला तुझे है मानव जीवन ...
    रुच रुच इसको भाग जगा ले ....

    झूम झूम झन झन कर आ गई ये बरसाती बूँद,

    MY RECENT POST...:चाय....

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  22. ..इतनी प्यारी रचना पढ़ कर यूँ समझो सावन आ ही गया

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  23. बहुत सुन्दर रचना , मुझे भी याद आ गयी भोजपुरी की लोकप्रिय गीत .......सावन झर लागे हो धीरे- धीरे ...................

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  24. कल से ही मुंबई में बहुत बारिश हो रही है..
    अब लग रहा है की,सावन आया है..
    बहुत सुन्दर नाचती नचाती रचना...
    :-)

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  25. यह तो संगीत और लय-ताल के बोलों की अनुपम रचना है.

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  26. ध्वन्यात्मक और संगीतात्मक रचना
    बेहतरीन

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  27. Replies
    1. बहुत आभार शिवम ...

      Delete
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    उम्दा प्रस्तुति के लिए आभार


    प्रवरसेन की नगरी
    प्रवरपुर की कथा



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ जीवन के रंग संग कुछ तूफ़ां, बेचैन हवाएं ♥


    ♥शुभकामनाएं♥

    ब्लॉ.ललित शर्मा
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    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार ललित जी ....!!

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  29. सम्पूर्ण गीत....सुन्दर।

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  30. हरियाला सावन ढोल बजाता आया .....नृत्य के बोल संगीत की पूरी खनक झनक छिपाए है यह प्रस्तुति

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  31. हरियाला सावन ढोल बजाता आया .....नृत्य के बोल संगीत की पूरी खनक झनक छिपाए है यह प्रस्तुति

    आई ....सावन ऋतू आई ..भरमाई..

    सुघड़ नार सी बलखाई ..बौराई ...इठलाई ...

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  32. इस खूबसूरत कविता ने रिमझिम फुहारों सा एहसास दिला दिया...
    हम तो अभी यही गा रहे हैं...आ रे कारे बदरा...मिटा धरती की प्यास...पूरी कर सबकी आसः)

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  33. प्यारी प्रशंसनीय रचना - बधाई

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  34. छनन नन छन छन...नाच रहा है मन..सुन्दर गीत..

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  35. आप सभी का हृदय से आभार ....
    जीवन हो और जीवन मे उमंग न हो तो वो जीवन ही क्या ...?
    सावन आये और मन मयुर न नाचे तो वो सावन ही क्या ..?
    आप सभी के जीवन मे ढेर सारी उमंग लाये ...खुशियाँ लाये ये सावन ...!!

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  36. इस गीत से सावन हुआ साकार

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  37. kavita padhte-padhte man-mor nachne laga.....bahar to jhadi lagi hi h man ka saawan bhi hilore lene laga.....sangeetmay,naachti gati rachna...swarbadh karke gaya jaaye to subhaan-allah....badhaiyaan

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  38. मन वीणा के तार मिला ले .....
    कजरी से सुर ताल मिला ले ...
    जीवन में अनुराग सजा ले ...!!
    मिला तुझे है मानव जीवन ...
    रुच रुच इसको भाग जगा ले .

    आपकी 'छूम छनन नन छन छन ...!!'
    ने झमा झम बरसात करवा दी है हमारे यहाँ.
    सच में लाजबाब प्रस्तुति है आपकी.

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  39. You have used my pencil sketch. Glad it is becoming popular.

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  40. You have used my kathak dancer pencil sketch. Thanks for making it popular.

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!