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21 May, 2013

तू ही अंजानी ...!!


जब ...

भरी दुपहरी ...
दमके सूरज ...
जलता जल ...
जले जिया ...!!
आकुल मन  ...
सूना सा नभ ...
शुष्क हिया ...!!

तब  ...

जीवन ठगिनी ...
माया  जानी .....



कौन दिशा से ..
आई है री ...
पवन दिवानी ....!!
रही  हरि से अंजानी ...!!

मुठ्ठी मे भर लाती ...
थोड़ी ठंडक ...
थोड़ा सा पानी ...!!

अब
समझे कौन  है...........
आस मेरी वो  प्यास मेरी ...
पीर  मेरी ...हृद चीर मेरी ...
व्यथा मेरी ,अकथ कथा मेरी ...

जब
तू ही  अंजानी ...!!

34 comments:

  1. सुन्दर अहसास , सुन्दर अभिव्यक्ति !
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest postअनुभूति : विविधा
    latest post वटवृक्ष

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  2. बहुत सुंदर भाव .... भीषण गर्मी के एहसास के साथ थोड़ी ठंडक सी पहुँचाती रचना

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  3. जब
    तू ही अंजानी ...!!
    भावमय करते शब्‍द ....

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  4. बहुत सुन्दर.......
    प्यारे से भाव.

    सादर
    अनु

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  5. समझे कौन है...........
    आस मेरी वो प्यास मेरी ...
    पीर मेरी ...हृद चीर मेरी ...
    व्यथा मेरी ,अकथ कथा मेरी ...khud ko hi samjhna hoga .......excellent .....

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (08-04-2013) के "http://charchamanch.blogspot.in/2013/04/1224.html"> पर भी होगी! आपके अनमोल विचार दीजिये , मंच पर आपकी प्रतीक्षा है .
    सूचनार्थ...सादर!

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    Replies
    1. आभार शशि जी ...ह्रदय से ....

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (22-05-2013) के कितनी कटुता लिखे .......हर तरफ बबाल ही बबाल --- बुधवारीय चर्चा -1252 पर भी होगी!
    सादर...!

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  8. अब
    समझे कौन
    जब
    तू ही अंजानी ...!!
    बहुत सुन्दर भाव...

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  9. बहुत ही गहन अर्थ लिये हुये, मौसम की तपिश ने रचना को महसूस भी करवा दिया, बहुत शुभकामनाएं.

    रामारम.

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  10. आपकी शब्द रचना स्पष्ट शब्द थाप छोड़ती है।

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  11. शुभप्रभात
    खूबसूरत अभिव्यक्ति
    हार्दिक शुभकामनायें

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  12. अहा! अति सुन्दर..उस अंजानी ने ही तो हमें कम्पित होना सिखाया है और चलते रहना भी .

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  13. दीदी, ये आपकी विछरों की गहन दृष्टि ही तो है जो इतनी सुंदरता और सहजता से एक "अंजानी" से भी प्रेम का रिश्ता कायम कर लेता है...बहुत खूब

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  14. अच्छी रचना ..सादर बधाई के साथ

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  15. बहुत सुंदर रचना...बधाई

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  16. Bahut Badhiya.....bilkul dhara prawah.....is chilchilati dhoop me malayanal ki si sheetal prawah wali kavita Anupama ji.....

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  17. bahut sukhad laga abhi is kavita ko padhna...too beautiful!!

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  18. आस मेरी वो प्यास मेरी ...
    पीर मेरी ...हृद चीर मेरी ...
    व्यथा मेरी ,अकथ कथा मेरी ...

    itte chhote aur khusbsurat se shabd kahan se laate ho aap :)
    sach me dhandi byar la gayee ye rachna...

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  19. प्यारे से भाव,प्यारे से शब्द......

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  20. pyar bari sikayat liya atti pyari kavita...

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  21. pyar bhari sakayat liya atti pyari kavita.............

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  22. अब
    समझे कौन है...........
    आस मेरी वो प्यास मेरी ...
    पीर मेरी ...हृद चीर मेरी ...
    व्यथा मेरी ,अकथ कथा मेरी ...

    जब
    तू ही अंजानी ...!!
    Kitna sahee kaha aapne....!

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  23. खूबसूरत पहेली ....:))

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  24. बहुत खूबसूरत रचना...बधाई

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  25. आपकी यह रचना कल रविवार (26 -05-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  26. अब समझे कौन जब ... खुद की ही आवाज़ सुन पाना कठिन है .. अंतस ने समझ ली बातें तो मानो सारा मन हल्का हो गया!
    मनोभावों का सुन्दर चित्रांकन।
    सादर
    मधुरेश

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