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17 May, 2013

चम्पक बन में बैठ सखी संग ... ....

चम्पक बन में बैठ सखी संग ...
वृहग वृन्द  का  कलरव सुनना ....
ढलते दिवस के अवरोह पर ..
राग दरबारी के ....
खरज से ...
कुछ गंभीर प्रकृति के  स्वर लेना ......


फिर तजकर ....कुछ हंसकर ..
संध्या के  आरोह  गुनना .....

ई मन राग की पकड़ से ...
कुछ भावों का आलाप लेना ...
कुछ गाना ...गुनगुनाना ...मन बहलाना ....

कुछ मन की ...कुछ जीवन की ...
कुछ सपनों की बातों की ...
लहराती सी कवरी गूंथना ...
उराव से ....
चुन चुन चंपा के फूलों को ...
  भावों  की उस कवरी को ...
फिर सजाना ...संवारना ......और सजना ...

प्रियतम की अनुरागी बातों को ..
शर्म से कुछ कहना ...सुनना ...और हँसना ...
याद है ....?

और फिर इस तरह ...
वीतरागी से मन को ...
पुनः अनुराग में डुबो ........भिगो ....रंगो ......
 निशीथ  मन ......खिल खिल ....घर चले आना ...
याद है ....?

**
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*दरबारी-शास्त्रीय संगीत की राग का नाम है |इसकी प्रकृति गंभीर है |
*खरज -(lower octave )यानि मन्द्र  सप्तक के स्वर |
*ई मन -यमन राग को मुग़ल काल में ईमन भी कहा जाता था ...
*कवरी-बालो को गूंथ कर बनाई चोटी ....
*उराव-उमंग
*निशीथ -खुशियाँ


33 comments:

  1. निशीथ मन ......खिल खिल ....घर चले आना ...
    आनंद...आनंद ...

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  2. बहुत सुंदर कविता में संगीत घुलमिल गया है और एक अद्भुत लय में पाठक डूब गए हैं।

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  3. स्वर लहरी, बस मन लहरी।

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  4. में बैठ सखी संग
    गयी उस में रंग ...

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  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(18-5-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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    Replies
    1. इस रचना को चर्चा मंच पर लेने हेतु बहुत आभार वंदना जी ....!!

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  6. फिर तजकर ....कुछ हंसकर ..
    संध्या के आरोह गुनना .....

    ई मन राग की पकड़ से ...
    कुछ भावों का आलाप लेना ...
    कुछ गाना ...गुनगुनाना ...मन बहलाना ....
    अनुपम भाव संयोजन एवं प्रस्‍तुति

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  7. मन भावन..खुबसूरत रचना...आभार

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  8. क्या कहने,
    बहुत सुंदर रचना

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  9. आपके शब्दों से संगीत निकलता हैं.

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  10. संगीत और काव्य का मिल्न जैसे नाद और ज्योति का मिल्न हो..सुंदर !

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  11. सुंदर कविता, स्मृतियों के झरोखे खुल गए और याद आगइ वह ढलती सांझ ....
    जब स्मृतियों के चम्पा-कुसुम से आँचल भी भर गया और मन भी ..
    शब्दों में ढली स्मृतियाँ .....चम्पक-वन में ....

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  12. अनुपमा जी आपका लेखन शब्द संयोजन और चित्रों से कथन को भाव देना बहुत ही सुन्दर और अद्भुत दृष्टिगोचर होता है मेरे व्यक्तिगत विचार में एक लेख या कविता गेय होता है तो दूसरा पढ़ने योग्य आपकी रचनाएँ पढ़ने, गेय और देखकर भी [ दृश्य] भी अर्थात त्रिआयामी लगी बधाई ********** दस में दस अंक

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  13. संगीतमय रचना....

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  14. पिय की बातें संगीतमय स्वर-लहरी बन-बन आते रहे. उससे ज्यादा आनंददायक क्या हो. अति सुन्दर.

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  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    साझा करने के लिए आभार!

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  16. बहुत सुन्दर भाव ...
    राग और रंग के साथ मज़ा दूना हो गया ..

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  17. सुन्दर....बहुत सुन्दर...
    लहराती सी कवरी गूंथना ...
    उराव से ....
    चुन चुन चंपा के फूलों को ...
    भावों की उस कवरी को
    वाह!!!

    सादर
    अनु

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  18. संगीत की बारीकियों और रागों को इतिहास के झरोखे से देखती कोमल पदावली पोस्ट .बेहद की खूब सूरत .

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  19. खुशबू से मन सराबोर कर दिया आपकी पंक्तियों ने ।
    सुन्दर वर्णन ।

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  20. और फिर इस तरह ...
    वीतरागी से मन को ...
    पुनः अनुराग में डुबो ........भिगो ....रंगो ......
    निशीथ मन ......खिल खिल ....घर चले आना ...
    याद है ....?

    वाह ... अनुपम शब्दों का संयोजन जैसे संगीत लहरी बह निकली हो ... बहुत सुंदर

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  21. वाह, बहुत सुन्दर!!

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  22. सखियों के साथ बीते इन अनमोल पलों को ऐसी सुन्दर सुर लहिरी में पिरोना .......तुम्हारी ही खासियत है ..वाह ..बहुत सुन्दर ....अनु !!!!

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  23. सखियों के साथ बीते इन अनमोल पलों को ऐसी सुन्दर सुर लहिरी में पिरोना .......तुम्हारी ही खासियत है ..वाह ..बहुत सुन्दर ....अनु !!!!

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  24. चम्पक बन में बैठ सखी संग ...
    वृहग वृन्द का कलरव सुनना ....aha bade hi sukhmay pal .....anu jee ....

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  25. संध्या जी ब्लॉग वार्ता पर मेरी कृति ली ,बहुत बहुत आभार ....!!

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  26. sabdo ke sunder chayan ka sath ek atti sunder kavita!!

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  27. बहुत सुंदर प्रस्तुती। मेरे ब्लॉग http://santam sukhaya.blogspot.com पर आपका स्वागत है. अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराये, धन्यवाद

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