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19 June, 2012

हर प्रात ...कहते हुए ...शुभप्रभात ...!!

इस घने विपिन मे ...
स्मित ...स्वर्णिम विहान सी ...
शुभप्रभात सी ...
एक आकृति ...
सप्त  स्वर ...
नवल-रस परिपूर्ण  कुंभ सी ...
भर-भर ..छलकाती ...
उड़ेलती मधु-रस ...
जीवन सरस..
प्रभास सी ..
आपकी आभा हम पर ..
हम वृक्षों पर ...
बरसती रहे ...
किरणों की सरिता
 सुरमई ......अनुरागमई ...प्रवाहमई .....
यूं ही बहती रहे ....बहती रहे ...बहती रहे .....!!
हर प्रात ...
अलंकृत... विभूषित  करती हुई ......
कहते हुए ...
शुभप्रभात ...हे प्रभु ....!!


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विपिन-जंगल
स्मित-मुस्कान
विहान-सुबह

53 comments:

  1. प्रभात की सुन्दरता का वर्णन, इश्वर की कृतियों का गुडगान , दिनकर की किरणों का स्पर्श , स्फूर्तिवान दिन का शुभारम्भ . सुबह अच्छी हो तो दिन फिर दिन बन जाता है . आप की कविता एक अद्भुत अनुभव की कारक होती है . बधाई .

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  2. फिर से चर्चा मंच पर, रविकर का उत्साह |

    साजे सुन्दर लिंक सब, बैठ ताकता राह ||

    --

    बुधवारीय चर्चा मंच

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    Replies
    1. बहुत आभार रविकर जी ....!!

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  3. आपकी आभा हम पर ..
    हम वृक्षों पर ...
    बरसती रहे ...
    किरणों की सरिता
    सुरमई ......अनुरागमई

    बहुत सुंदर .... प्रभु और गुरु दोनों को ही समर्पित पंक्तियाँ बहुत सुंदर हैं .... खूबसूरत भाव

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  4. किरणों की सरिता
    सुरमई ......अनुरागमई ...प्रवाहमई .....
    यूं ही बहती रहे ....बहती रहे ...बहती रहे .....!!


    सुन्दर आकांक्षामय सुन्दर रचना....

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  5. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ..आभार

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  6. बहुत सुन्दर और पवित्र आकांक्षा....

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  7. बहुत सुन्दर. शुभ-प्रभात अनुपमा जी.

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  8. इस घने विपिन मे ...
    स्मित ...स्वर्णिम विहान सी ...
    शुभप्रभात सी ...
    he prabhu.. ham pe bhi kuchh najar daal
    ham par bhi kuchh saptrangi kirno ki bauchhara kar:)
    bahut khubsurat shabd:))

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  9. सुन्दर रचना ....मानों फैला उजास हो...

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  10. यूं ही बहती रहे ....बहती रहे ...बहती रहे bahut accha varnan...

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  11. बहुत खूबसूरत और प्रभावशाली रचना ....

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  12. गज़ब के शब्द भाव ,बहुत सुन्दर.

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  13. शुभ प्रभात हो
    दिन कुशल मंगल
    अगले दिन फिर
    शुभ प्रभात हो...सिलसिला चलता रहे|

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  14. बड़ी सुन्दरता से बांधा है भावों को कविता में...अनुपमा जी

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  15. सुप्रभात, नव विहान शुभ..

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  16. जीवन का महत्व तभी है जब वह किसी महान ध्येय के लिये समर्पित हो। हर प्रभात में जीवन का यह समर्पण ज्ञान और न्याययुक्त हो।

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  17. बहुत ही सरस, मधुर एवं संगीतमयी रचना ! ऐसा मीठा शुभप्रभात सभी के लिए मंगलमय हो यही कामना है !

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  18. sunder suprabhat ki sunder rachna

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  19. शुभ-प्रभात हम सब के लिए शुभ हो .....येही कामना है !
    शुभकामनाएँ!

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  20. शुभप्रभात ...हे प्रभु ....!!

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  21. शुभप्रभात ...हे प्रभु ....!!

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  22. सुबहे बनारस को अलंकृत करती कविता

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  23. शुभप्रभात!!!! :) :) :)
    देखिये ये एक इत्तेफाक है...की आपका ब्लॉग हमेशा मैं सुबह सुबह ही पढता हूँ..और सुबह इतनी सुन्दर और आनंद देंने वाले कविता पढ़ के दिल खुश हो जाता है..
    ये कविता भी एज-युजवल बहुत पसंद आई मुझे! :)

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  24. प्रभात इतना सुन्दर भी हो सकता है....अद्भुत !

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  25. सुसज्जित , अलंकृत रचना ...

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  26. प्रभात का अद्भुत स्वर्णिम रचना........शुभप्रभात ..अनुपमा जी..

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  27. इस सौंदर्य वर्षा से अभिभूत ,मेरा हृदय भी प्रकृति के इस अवदान के प्रति नत-शिर है !

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  28. इस गहन रमणीयता में ,जहाँ अपना भान भी भूल जाये ,केवल अभिभूत रह जाना ही शेष बचता है !

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  29. कविता अच्छी है.

    ...संस्कृतनिष्ठ शब्दों से थोडा परहेज होता तो और अच्छी लगती.

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  30. भोर की कोमल किरणों का सोंदर्य रचना में उतार दिया है ...
    अनुपम रचना आपके नाम की ही तरह ...

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  31. वृक्षों की ओर से बहुत सुंदर प्रार्थना...हृदय से निकली ! आभार !

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  32. हर प्रात ...
    अलंकृत... विभूषित करती हुई ......
    कहते हुए ...
    शुभप्रभात ...हे प्रभु ....!!
    बहुत सुन्दर विनय वाणी

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  33. बहुत सुन्दर रचना!
    इसको साझा करने के लिए आभार!

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  34. प्रभात का सुन्दर वर्णन , संग अद्भुत वंदना और कामना.

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  35. यूं ही बहती रहे ....बहती रहे ...बहती रहे .....!!
    खूबसूरत और प्रभावशाली रचना ...

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  36. आँखे नम हों गई प्रार्थना में डूब कर...हे प्रभु .

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  37. प्रार्थना में डूब कर अनुपम रचना रचा है.....हे प्रभु .

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  38. आप सभी ने इस प्रर्थना पर अपने हृदय उद्गार दिये ...शत-शत आभार ....!!

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  39. प्रभुमय रचना ..

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  40. मन में सुर-साज भरती, जीवन में नवरस घोलती बहुत ही सुन्दर रचना.. प्रातः स्मरणीय
    सादर

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  41. प्रभात की सुन्दर वेला को शब्दों के आभूषण ने शुभ बना ही दिया !

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  42. बहुत सुन्दर रचना.आप का शब्द वैभव देख मैं चकित रह गया.

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  43. बहुत सुन्दर शब्दावली से सराबोर प्यारी रचना प्रभात की स्वर्णिम किरण जैसी

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  44. वाह बहुत खूब ... सही भी है सब से पहले तो 'उसे' ही शुभ प्रभात कहा जाये ... बाकी सब तो बाद मे ही आते है !

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