नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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25 June, 2011

वसुधैव कुटुम्बकम.......!!

मन सोच सोच अकुलाये...
कई बार समझ न आये ...
क्या मैं भी बन जाऊं -
व्यापक  व्यवस्था का वो हिस्सा ...
बन  जाऊं दलदल ..कीचड़ में ... 
और सुस्ताऊं जीवन भर .... !!

या संकल्प  लूँ मन ही मन में  ..
खिलना कमल को है कीचड़ में .. 
तब तो सहेजना  होगी ...
कंपकपाती वो ज्योत मन की ..
कभी  कभी  बुझने  सी  लगाती  है  जो - 
थामने होंगे संघर्ष   के  बोझ  से दबे .. ..
 अपने ही लड़खड़ाते हुए कदम ...
वो उर्जा ..समेटनी होगी ...
सिक्त करना होगा ..रिक्त ह्रदय ....
अपनाना होगा मनुष्य को -
मनुष्य भेस में ही ...
संचार करना ही होगा मन में ...
दिव्य ऊष्मा का ..
स्वयं और स्वजनों के लिए भी ..
तब ही  हम सब उस शुभ विचार का  -
प्रसार ..प्रचार करते हुए -
इसी धरा पर सब  मिल  कहेंगे ...
वसुधैव कुटुम्बकम.......!!
वसुधैव कुटुम्बकम.......!!

43 comments:

  1. बहुत बढिया...क्या बात है

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  2. बहुत सुन्दर आह्वान्।

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  3. अच्छी लगी यह रचना।

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  4. संचार करना ही होगा मन में ...
    दिव्या ऊष्मा का ..tab hi koi kiran nazar aayegi

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  5. बहुत सुन्दर रचना।

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  6. बहुत बढ़िया रचना!
    सभी छन्द बहुत खूबसूरत हैं!

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  7. परम्पराओं के निर्वाह में ऊर्जा राह पाये।

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  8. थामने होंगे जीवन के बोझ से दबे .. ..
    अपने ही लड़खड़ाते हुए कदम ...
    वो उर्जा ..समेटनी होगी ...
    सिक्त करना होगा ..रिक्त ह्रदय ....

    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ ... एक सार्थक सोच ...

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  9. उत्तम ब्लाग एवम ब्लाग पोस्ट

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  10. sundar , parmeshwar ke baad ab manushya ka sandesh , badhai .

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  11. bahut hi saarthak rachanaa.aaj kal ka vatavaran nirashawaad ko janm detaa hai.per positive soch rakhnewalon ko uskaa daman nahi chodanaa hai.adhboot sandesh deti hui bemisaal rachanaa ke liye bahu bahut badhaai,aapka shabdon ka chyan bahut achcha rahataa hai,badhaai.

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  12. कविता की मूल भावना प्रेरक है।
    अच्छी लगी , यह रचना।

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  13. सुन्दर भावों से सजी भावमयी रचना...

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  14. जाने अनजाने इस व्यवस्था का हिस्सा तो हम बन ही गए हैं ... चाहे जागते हुवे या सोते हुवे ...

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  15. आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके पोस्ट की है हलचल...जानिये आपका कौन सा पुराना या नया पोस्ट कल होगा यहाँ...........
    नयी-पुरानी हलचल

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  16. अद्भुत रचना है आपकी...बधाई स्वीकारें


    नीरज

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  17. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 28 - 06 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच-- 52 ..चर्चा मंच

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  18. बहुत ही सुन्दर रचना hai...

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  19. इन उलझनों से पार पाना ही होगा ! ! शुभकामनायें आपको !

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  20. संचार करना ही होगा मन में ...
    दिव्य ऊष्मा का ..
    स्वयं और स्वजनों के लिए भी ..
    तब ही हम सब उस शुभ विचार का -
    प्रसार ..प्रचार करते हुए -
    इसी धरा पर सब मिल कहेंगे ...
    वासुदेव कुटुम्बकम.......!!

    बहुत सुंदर भाव....बेहतरीन रचना

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  21. मन कई बार फंसता है इस भंवर जाल में की बन जाये व्यवस्था में घुल मिल जाने वाले ही या रहे अलग कीचड में कमल जैसे ही ...
    जवाब भी आपने दे ही दिया की दिव्या ऊष्मा के प्रचार के लिए मनुष्य बन कर ही रहना होगा ....
    शुभेच्छाएं पूरी होती रहें हमेशा !

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  22. ओह , अति गंभीर और संवेदना लिए । मेरे मन की वेदना को अपने कैसे शब्द दे दिया या शायद यही वेदना सब के मन को भेद रही है।

    बहूत सुंदन।

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  23. सुन्दर सार्थक सोच । बधाई।

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  24. बहुत सुन्दर भावों से भावित रचना

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  25. कंपकपाती वो ज्योत मन की ..
    कभी कभी बुझने सी लगाती है जो -
    थामने होंगे जीवन के बोझ से दबे .. ..
    अपने ही लड़खड़ाते हुए कदम ...
    वो उर्जा ..समेटनी होगी ...
    सिक्त करना होगा ..रिक्त ह्रदय

    bahut saarthak rachna..

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  26. वासुदेव कुटुम्बकम.......!!
    वासुदेव कुटुम्बकम.......!!
    पारस्परिक स्नेह का संचार करती भाव प्रणव उत्तम रचना ...

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  27. हिंदू दर्शन तो वासुदेव कुटुम्बकम में विश्वास करता ही है. आपकी ये रचना बेहद प्रभावशाली है. सार्थक भावों से ओतप्रोत इस रचना के लिए आपको बधाई.

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  28. प्रगतिशील विचारों से परिपूर्ण एक बहुत ही सुन्दर कविता "VERY NICE THOUGHT"
    वासुधेव कुटुम्बकम.........

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  29. हार नहीं मानूंगा मै , रार नहीं ठानूंगा मै .

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  30. आप मेरे ब्लॉग पर आयीं और सुन्दर टिपण्णी से मुझे
    अभिभूत कर दिया.
    आपकी प्रस्तुति 'अनुपम' भावों की माला है अनुपमा जी.आपका वसुधैव कुटुम्बकम का भाव शानदार प्रेरणा दे रहा है.
    बहुत बहुत आभार.

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  31. तब ही हम सब उस शुभ विचार का -
    प्रसार ..प्रचार करते हुए -
    इसी धरा पर सब मिल कहेंगे ...
    वासुदेव कुटुम्बकम.......!!

    बहुत सुंदर भाव....बेहतरीन रचना

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  32. करीब १५ दिनों से अस्वस्थता के कारण ब्लॉगजगत से दूर हूँ
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  33. पहलीबार आपके ब्लॉग पर आया हू.. और आपकी कविता से अभिभूत... कविता को नए ढंग से परिभाषित किया है आपने...

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  34. अनुपमा जी, आपकी वसुधैव कुटुम्बकम की सद्भावना एवं उत्तम काव्य रचना के लिए बधाई....

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  35. वसुधैव कुटुम्बकम.......!!

    मेरी भावनाएं ..पढ़कर ...समझ कर ...दो शब्द कहे आपने ....बहुत बहुत आभार आप सभी का ....!!
    यही धारा प्रवाहित रखियेगा ......!!

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  36. आज फ़िर खेली है हमने लिंक्स के साथ छुपमछुपाई चर्चा में आज नई पुरानी हलचल

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  37. What command on Hindi !! Awesome !- Bablu :)

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!