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17 June, 2011

पिया मिलन की आस .....!!

छाई  दुपहरी.. चढ़ा सुनहरी..
चम -चम चमके ...
दमके सूरज ....
चहुँ दिस देखूं ...
सूनी सी है ..
निर्जन सी गलियारी लगती ..
ना  तू मेरा ना  मैं तेरा ...
जीवन कैसा ..
शुष्क नयन सा ...!!

आया सावन लाया  बदरा ....
नीर भरे घन छाये बदरा ...!!
कारे कारे आये बदरा ...
मस्त पवन -
मन भाये  बदरा ...!!

तक -तक ताकत आसमान ...
जब शुष्क नयन में-
भरता था मन नीर ...
तब -
नीर भरे नयनो में ..
भरता जीवन
कैसी निर्झर पीर ...!!
अब ..
पीर झरे झर प्रीत पगे ...
थी कैसी जाने प्यास ...
आली  री मोरा ...
तरसे है मन ...!!
कब बरसेंगे -
कारे ये घन ...!! 
जागे-जागे ..
 मन मा मोरे ..
करत -करत अरदास ...
प्रभु दरसन की आस .....
सखीरी ...
पिया मिलन की आस .....!!

27 comments:

  1. सखीरी ...
    पिया मिलन की आस .

    इंतज़ार का भी अलग मज़ा है.

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  2. बहुत सुन्दर चित्रण

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  3. जागे-जागे ..
    मन मा मोरे ..
    करत -करत अरदास ...
    प्रभु दरसन की आस .....
    सखीरी ...
    पिया मिलन की आस .....!!
    bahut hi apnatw liye bhaw

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  4. खनकती हुई रचना !!

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  5. ये बादल भी कितना कष्ट देते हैं .. :):)

    सुन्दर भाव से सजी अच्छी रचना

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  6. ग्रीष्म ऋतू में शुष्क वातावरण
    और शुष्क मन ...
    निर्जीव हो जातीं है आशाएं....
    बदल छाये ही हैं ...
    अभी तो बरसे भी नहीं ...
    फिर भी ...
    प्रतीक्षा है ...
    वर्षा ऋतू के आगमन की ....
    आशा है ..आपको मेरी रचना पसंद आएगी ....!!

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  7. बहुत सुंदर ! कविता एक भावलोक में ले जाती है..

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  8. सुफ़ियाना भाव लिए बेहतरीन आध्यात्मिक अभिव्यक्ति।

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  9. ये इन्तज़ार भी बड़ा ही प्यारा है ......

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  10. करत -करत अरदास ...
    प्रभु दरसन की आस .....
    सखीरी ...
    पिया मिलन की आस .....!!

    सच है.. बहुत सुंदर

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  11. सखीरी ...
    पिया मिलन की आस
    ये इन्तज़ार भी बड़ा ही प्यारा है, बहुत सुंदर......

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  12. वाह!! अति सुन्दर!!!

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  13. आया सावन लाया बदरा ....
    नीर भरे घन छाये बदरा ...!!
    कारे कारे आये बदरा ...
    मस्त पवन -
    मन भये बदरा ...!!
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! शानदार और भावपूर्ण रचना! बधाई!

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  14. जागे-जागे ..
    मन मा मोरे ..
    करत -करत अरदास ...
    प्रभु दरसन की आस .....
    सखीरी ...
    पिया मिलन की आस .....!!बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बहुत सुन्दर चित्रण

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  15. बहुत सुंदर....मन के भावों का मनमोहक चित्रण.........

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  16. शास्त्रीजी ..
    "पिया मिलन की आस .....!!"
    चर्चा मंच पर लेने के लिए आभार आपका ...!!

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  17. पिया मिलन की आस और मन की अधीरता को बड़े सुन्दर शब्द एवं भावाभिव्यक्ति दी है ! शुष्क नयनों का यह इंतज़ार जल्दी समाप्त हो यही प्रार्थना है ! बहुत मनमोहक रचना ! बधाई स्वीकार करें !

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  18. मेरा बिना पानी पिए आज का उपवास है आप भी जाने क्यों मैंने यह व्रत किया है.

    दिल्ली पुलिस का कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें. मैं नहीं मानता कि-तुम मेरे मृतक शरीर को छूने के भी लायक हो.आप भी उपरोक्त पत्र पढ़कर जाने की क्यों नहीं हैं पुलिस के अधिकारी मेरे मृतक शरीर को छूने के लायक?

    मैं आपसे पत्र के माध्यम से वादा करता हूँ की अगर न्याय प्रक्रिया मेरा साथ देती है तब कम से कम 551लाख रूपये का राजस्व का सरकार को फायदा करवा सकता हूँ. मुझे किसी प्रकार का कोई ईनाम भी नहीं चाहिए.ऐसा ही एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है. ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें. मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा.

    मैंने अपनी पत्नी व उसके परिजनों के साथ ही दिल्ली पुलिस और न्याय व्यवस्था के अत्याचारों के विरोध में 20 मई 2011 से अन्न का त्याग किया हुआ है और 20 जून 2011 से केवल जल पीकर 28 जुलाई तक जैन धर्म की तपस्या करूँगा.जिसके कारण मोबाईल और लैंडलाइन फोन भी बंद रहेंगे. 23 जून से मौन व्रत भी शुरू होगा. आप दुआ करें कि-मेरी तपस्या पूरी हो

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  19. सुन्दर चित्रण,भावों को बखूबी पिरोया है प्रेम के धागे में

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  20. अनु दी , इसे तो झूम झूम के गाने का मन हो रहा है..! सच में !

    सखी री पिया मिलन की आस ..! सूफियाना तरह की तड़प लिए हुए है ये - पिया मिलन की आस.

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  21. सशक्त रचना शब्दों की और भावों की।

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  22. इधर वर्षा का आगमन हो चुका है। ऐसे वातावरण में कविता की सम्प्रेषणीयता सुगम हो गई है।
    सुंदर रचना।

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  23. मन मा मोरे ..
    करत -करत अरदास ...
    प्रभु दरसन की आस .....
    सखीरी ...
    ....!!बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! शानदार

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  24. लाजवाब लिखा है आपने.

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  25. इंतज़ार भी कितना प्यारा है.बहुत अच्छे भाव.

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  26. bahut sunder rachna...kindly vist my blog..era13march.blogspot.com

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  27. अनुपमा जी बहुत सुन्दर पंक्तियाँ --आया सावन लाया बदरा -मन मस्त हो गया


    अब ..
    पीर झरे झर प्रीत पगे ...
    थी कैसी जाने प्यास ...
    आली री मोरा ...

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