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01 May, 2012

रेंगती सी मानवता ...!

 सदा तेज ताप का प्रताप ...
आग  बरसाती ग्रीष्म ....
   टप-टप टपकता पसीना ....
इसके अलावा जानती ही नहीं क्या है जीना ...!!

इस जहाँ में कब आई ...पता नहीं ...
क्या है ध्येय वो नहीं जानती ,
कहाँ जाना है ...पता नहीं ...
पति का नाम ...?
हंसकर ...शरमाकर ...कहती है ...
ले नहीं सकती ...
न अक्षर ज्ञान .....
न  कुछ भान  ...
क्या कोई मान ...?
फिर भी इंसान की ही  संतान ....
कईयां(गोदी ) पर टाँगे ..
अपनी अनमोल पूंजी  ...
कृष्ण हों, बुद्ध हों ...गाँधी हों ...
मेरे लिए किसी ने क्या किया ...?
मैं हूँ भारत कि माटी  पर....
चीथड़े लपेटे ....
 रेंगती सी मानवता ...!

आज एक मई है .....मजदूर दिवस ......पिछले दिनों एक महिला मजदूर से बस दो शब्द बात  की .....मन व्यथित हो गया .......!!!बस एक बात समझ में आई .........ईश्वर का दिया हुआ बहुत कुछ है हमारे पास ....बस हम कृतज्ञ हों और कुछ सकारात्मक कर सकें ऐसे लोगों के लिए .....तभी जीवन सार्थक होगा .....!!

35 comments:

  1. मैं हूँ भारत की माटी पर....
    चीथड़े लपेटे ....
    रेंगती सी मानवता ...!

    बहुत मर्म स्पर्शी रचना ... मजदूर दिवस पर सार्थक प्रस्तुति

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  2. जब हृदय में भाव जगते हैं
    तो कार्य भी जरूर होता है,
    बशर्ते भावों को सच्चे हृदय से
    पुष्ट किया जाए और उस ओर
    चलने की कोशिश की जाए.

    आपकी सुन्दर प्रस्तुति आपके पावन भावों की परिचायक है.
    भावभीनी प्रस्तुति के लिए आभार.

    लगता है मेरा ब्लॉग अब विस्मृत हो गया है.

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  3. सच और सुन्दर भाव |

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  4. चित्र आपके शब्दों को अनुनादित कर गया।

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  5. बहुत ही संवेदनशील रचना ....बधाई स्वीकार करें

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  6. कितनी सच्चाई बयान कर रही है आपकी रचना .....सशक्त रचना उन्नत भाव

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  7. श्रम की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है लेकिन इसे उचित जगह नहीं मिल पाई. संवेदनशील कविता .

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  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बुधवारीय चर्चा-मंच पर |

    charchamanch.blogspot.com

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    Replies
    1. बहुत आभार रविकर जी .मेरी कृति को चर्चा मंच पर रखने के लिए ....!!

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  9. आज के दिन पर बहुत ही गहरी अभिव्यक्ति ...

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  10. विपन्नता का सत्य स्वरुप मर्माहत करने वाला है!
    सार्थक प्रस्तुति!

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  11. मन को छू लेने वाली रचना..

    सच है यदि इनके लिए सार्थक कुछ न किया, तो जीवन पा क्या किया...

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  12. आपने जो महसूस किया एक मजदूर महिला से बात कर और उसे शब्दों में ढाला बहुत ही सही लगा मुझे , हमारी सकारात्मक सोंच बहुत कुछ कर सकती है |

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  13. बहुत बढ़िया....
    सार्थक और सामयिक रचना के लिए आपका आभार .

    सस्नेह.

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  14. मजदूर दिवस पर बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति.....

    MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

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  15. कुछ सकारात्मक कर सकें ऐसे लोगों के लिए .....तभी जीवन सार्थक होगा .....!!
    बिल्‍कुल सही कहा है आपने ...

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  16. भावों को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त किया है ...!

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  17. मैं हूँ भारत की माटी पर....
    चीथड़े लपेटे ....
    रेंगती सी मानवता ...!
    मर्मस्पर्शी ...

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  18. bikul sahi aur sarthakl soch sabhi ko milkar chalna hoga

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  19. मजदूर दिवस पर एक सार्थक कविता!!

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  20. हम हिंद की हैं नारियां सुलगती चिंगारियां ;सार्थक पोस्ट शानदार शब्द चयन .|

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  21. रेंगती सी मानवता ...!
    बहुत सुन्दर बयाँ इस रेंगती मानवता का

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  22. मर्माहत करती रचना, सचमुच इस दिशा में पहल तो करनी ही चाहिये.

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  23. आज के दिवस पर दर्द में लिपटी मानवता और आपकी अभिव्यक्ति ....बहुत खूब

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  24. मजदूर दिवस पर एक सार्थक! रचना...बहुय सुन्दर..अनुपमा जी..

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  25. सार्थक और सामयिक रचना .....आपका आभार .

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  26. एकदम सटीक कविता है और अंत में दिया आपका सन्देश भी!!

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  27. मई दिवस पर बहुत सुंदर संदेश देती सुंदर रचना !

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  28. बहुत ही भावविभोर करती हृदयस्पर्शी रचना...

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  29. बहुत ही सार्थक विचार.. सच, ईश्वर ने हमें इतना कुछ दिया है, कृतज्ञता चाहिए बस, सब में थोड़ी-थोड़ी...
    सादर
    मधुरेश

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  30. मानवता का दुखता अध्याय ...

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  31. जिंदगी के बहुत ही मार्मिक पहलू को उजागर करती जिम्मेदार विचारोत्प्रेरक रचना....
    सादर....

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