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04 June, 2011

स्वरोज सुर मंदिर (२)






मैं सरोज तुम अम्बुज मेरे ...
सरू से दूर कमल मुरझाये ...
ईमन यमन राग बिसराए ..
यमन राग मेरी  तुमसे है ........
निश्चय ही ........!!!!
मध्यम तीवर सुर लगाऊँ .........
जब लीन मगन मन सुर  साधूँ ....
तुममे खो जाऊं ...
आरोहन -अवरोहन सम्पूरण ......!!
अब रात्री का प्रथम प्रहर..
हरी भजन में ध्यान लगाऊँ .....!!




इसी आराधना से आज स्वरोज सुर मंदिर की  दूसरी कड़ी लिख रही हूँ |राग यमन का परिचय आपको दिया था |राग यमन सुनते जाइये |आज कुछ मूलभूत बातें आपको बताती हूँ |

सबसे पहले स्वर क्या है ?

नियमित आन्दोलन -संख्या  वाली ध्वनी स्वर कहलाती  है|यही ध्वनी संगीत के काम आती है ,जो कानो को मधुर लगती है तथा चित्त को प्रसन्न करती है |इस ध्वनी  को संगीत की भाषा में नाद कहते हैं |इस आधार पर संगीतोपयोगी नाद 'स्वर'कहलाता है अब आप समझ  गए होंगे कि संगीत के स्वर और कोलाहल में फर्क है |और यहाँ संगीत विज्ञान से जुड़ गया है |

अब हम आरोह- अवरोह पर आते हैं |जब हम स्वरों को गाते हैं तो स्वरों के चढ़ते हुए क्रम को आरोह कहते हैं  | जैसे :
आरोह :सा ,रे, ग,म,,प ,ध,नि ,सं||
उसी तरह उतरते हुए क्रम को अवरोह कहते हैं |जैसे :
अवरोह :सां,नि ,ध ,प,म ,ग ,रे ,सा ||


अलंकार: स्वर स्थान समझने के लिए ..या यूँ कहूं की ये जानने के लिए की सा से रे ,रे से ग ,ग से म क्रमशः स्वरों की दूरी परस्पर कितनी है हमें अलंकारों का अभ्यास करना पड़ता है |जैसे :
आरोह :सारेग ,रेगम ,गमप,मपध ,पधनी ,धनिसां ||
अवरोह :सांनिध ,निधप,धपम ,पमग ,मगरे ,गरेसा ||
स्वरों से समूह को ले कर आरोह और अवरोह करते हैं विभिन्न अलंकार |
ये कई प्रकार से किये जा सकते हैं |




संगीत का प्रभाव :


संगीत से केवल आनंदानुभूति ही नहीं होती |ध्वनियाँ मानसिक स्थितियों की भी सूचक होती हैं |साथ ही ये हमारे मनोभावों को भी प्रभावित करतीं हैं |संगीत हमारी आत्मा में भक्तिमय अनुभूतियाँ भर देता है |भक्ति भी एक प्रकार का आवेग है जो हमारी आत्मा को प्रभावित करता है |
                  संगीत में एक गति है |और हमारी क्रियाएं भी गत्यात्मक हातीं हैं |दोनों में सदृश्य होने के कारण ही मात्र ध्वनिमय राग -रागिनियाँ हमारी आत्मा को प्रभावित कर लेती हैं |जो संगीत हम आत्मसात कर लेते हैं वो ईश्वरीय बन कर सदा सदा ...हमारे पास ..हमारे साथ ही रहता है|प्राकृतिक  गति हमें आनंद देती है |बच्चे जन्म से ही इससे प्रभावित हो जाते हैं |राग और लय में  प्रभावित  करने की शक्ति उनकी नियमितता के कारण ही आती है ,क्योंकि असंतुलन में संतुलन ,अव्यवस्था में व्यवस्था और असामंजस्य में सामंजस्य लेन की अपेक्षा नियमितता या संयम से हम अधिक प्रभावित होते हैं|स्वर और लय का संयम तथा सामंजस्य ही हमें प्रभावित करता है |
संगीत हमें आनंद ही नहीं देता बल्कि एक जीवन शैली भी देता है ..!!


क्रमशः ......


26 comments:

  1. एक बहुत अच्छी और संग्रहणीय पोस्ट है आशा करता हूँ कि शायद मैं भी कुछ सीख सकूंगा.

    सादर

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  2. संगीत के बारे में दिल को छु लेने वाली बाते बतायी है, आपने

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  3. संगीत हमें आनंद ही नहीं देता बल्कि एक जीवन शैली भी देता है ..!!bahut kuch jaanne ko milta hai yahan

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  4. आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  5. wah bhabhiji raag yaman ke baare main itane wistrat main charcha dil ko choo gai.संगीत हमें आनंद ही नहीं देता बल्कि एक जीवन शैली भी देता है ..!!
    bahut hi saarthak baat kahi aapne.badhaai sweekaren.aabhaar

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  6. आपकी संगीत कक्षा में शामिल होकर बहुत अच्छा लग रहा है। क्लास लगाने का अंतराल दीर्घ न हो तो हम शिष्यों को जल्दी-जल्दी सीखने को मिलेगा।

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  7. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने..
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - अज्ञान

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  8. संगीत मेरे लिये स्वर लहरियों में स्वयं को छोड़ देने का माध्यम है।

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  9. यमन राग की मधुर प्रस्तुति सुनते-सुनते आपका संगीतमय लेख पढ़ा, ध्वनियाँ हमारी आत्मा तक पहुंचती हैं और सदा साथ रह जाती हैं... बहुत सुंदर, आभार !

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  10. बहुत हे अच्छा पोस्ट किया आपने !मेरे ब्लॉग पर आए ! आपका दिन शुब हो !
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  11. एक सम्पूर्ण पोस्ट को पढ़वाने के लिए शुक्रिया!
    बहुत उपयोगी पोस्ट है!

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  12. बहुत ही सुंदर रचना है

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  13. हमारे संगीत ज्ञान में बहुत इजाफा कर रही हैं आप...बहुत अच्छा काम कर रही हैं...बधाई
    नीरज

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  14. अच्छा संगीत साथ में विस्तृत जानकारी भी - इस कक्षा में आना अच्छा लगा.

    सादर
    श्यामल सुमन
    +919955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  15. सायंकालीन राग यमन सुन कर मन शांत हो गया।
    अच्छी जानकारी के साथ सुमधुर संगीत भी।
    शुभकामनाएं।

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  16. बहुत ही बढ़िया पोस्ट
    सादर विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  17. अच्छी लगी यह पोस्ट...संगीत और स्वर लहरियाँ ही जीवन हैं.

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  18. मैं संगीत विधा में अंगूठा टेक हूँ मगर सुनना पसंद करता हूँ !
    इस प्रकार की अनूठी रचनाएँ निस्संदेह संगीत प्रेमियों के लिए वरदान साबित होगी !
    शुभकामनायें आपको !

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  19. sangeet ...
    jeevan mei praan daaltaa hai
    sur ke binaa jeevan soona

    is baar kee post se
    bahut bahut kuchh seekhne ko milaa hai ....
    a a b h a a r .

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  20. संगीत के बारे में उम्दा जानकारी दी अनुपमा जी । एक अत्यंत उपयोगी एवं शोधपरक आलेख है।

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  21. आ हा ... अति सुंदर ... राग यमन ....

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  22. यमन राग की मधुर प्रस्तुति मन को छू गई….

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  23. मेरे विचार से लेबल अगर हिंदी आलेख के बजाय संगीत / राग / भारतीय संगीत / राग के नाम इस्तेमाल करें तो गूगल पर खोजने वालों को सहायता मिलेगी .

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  24. संग्रहणीय पोस्ट!
    मधुर प्रस्तुति !

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  25. सुंदर पोस्ट। संगीत के ज्ञान के लिए पुनः आना होगा।

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