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23 June, 2012

मैं किस बिध तुमको पाऊँ प्रभु..?

मैं किस बिध तुमको  पाऊँ प्रभु..?

अब अखियन  नीर बहाऊँ प्रभु ...
पग धरो श्याम मत बेर करो ...
मन मंदरवा   सुधि-छाप धरो..
अब  अंसुअन पांव पखारूँ प्रभु ...

मैं किस बिध तुमको  पाऊँ प्रभु..?

मन का इकतारा बाज रहा ..
सुर बिरहा  आकुल साज रहा ...

तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ....!
मेरे हिरदय मधु  प्रीत पली ...
तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ...
निज  प्राण पखेरू निकसत हैं ...
मन सुमिरत वंदन गावत है ...
तरसत मन  अब हरि दरसन दो ....
हरो पीर मेरी ...तर जाऊँ प्रभु ...!!

मैं किस बिध तुमको  पाऊँ प्रभु..?

50 comments:

  1. सुन्दर निवेदन!!

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  2. इस रचना की गेयता अद्भुत होगी..एक प्रयास तो प्रस्तुत कीजिये..

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    1. आभार आपकी शुभकामनाओं के लिये प्रवीण जी ....ज़रूर ...अब कोशिश करती हूँ ....रचना को सुर देना अपने आप मे एक अलग विधा है ....इसलिये थोड़ा समय लग रहा है ....मन मे है मेरे भी कि अपने लिखे हुए गीतों को स्वर देकर प्रस्तुत करूँ ...!!

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  3. मीरा सी व्याकुलता और समर्पण ...

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  4. कल 24/06/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. बहुत आभार यशवंत ...!!

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  5. प्रभु मिलन की छटपटाहट..मन की सच्ची व्याकुलता को बहुत खुबसूरत शब्दों में चित्रित किया है.....अनुपमा जी.. सुन्दर प्रस्तुति..

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  6. बहुत सुन्दर प्रार्थना
    :-)

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  7. मत व्याकुल हों....
    ऐसे प्यारी प्रार्थना प्रभु अवश्य सुनेंगे
    सुन्दर रचना अनुपमा जी..........
    सस्नेह.

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  8. निज प्राण पखेरू निकसत हैं ...
    मन सुमिरत वंदन गावत है ...
    तरसत मन अब हरि दरसन दो ....
    हरो पीर मेरी ...तर जाऊँ प्रभु ...!!
    भावमय करते शब्‍द ... उत्‍कृष्‍ट लेखन के लिए आभार

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-062012) को चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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    1. बहुत आभार शास्त्री जी ...!!

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  10. बहुत सुन्दर ..., प्रभुचरणोँ मेँ भावपूर्ण निवेदन ।

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  11. ..मुझसे भी आपने बड़े दिनों बाद प्रार्थना करवा ही दी !

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    1. :)) कर भला सो हो भला ...!!

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  12. bhakti bhaav me ram gaya man padh ke..viyog bhi hai..bhakti bhi...

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  13. सुंदर भक्ति गीत.

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  14. तरसत मन अब हरि दरसन दो ....
    हरो पीर मेरी ...तर जाऊँ प्रभु ...!!

    मन तडपत हरि दर्शन को आज ………बहुत सुन्दर भाव

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    1. बहुत आभार ...वंदना जी ...

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  15. बहुत ही सुन्दर पोस्ट।

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  16. सच्चिदानंद की अनुभूति ,देते गीत , प्रवीण जी के स्वर में मेरा भी एक स्वर शामिल है .

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    1. आभार आशीश जी ...शुभकामनायें ज़ोर पकड़ रही हैं ...प्रभु कृपा हो ही जायेगी ...!!

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  17. मन तड़पत हरि दर्शन को आज...
    व्याकुलता, अधीरता का अद्भुत गीत !!

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  18. विधि हेरत हेरत.. हे ! सखी..बस विधि होई गयी...

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  19. कितना सुन्दर यह गीत रचा
    प्रभु तो भक्तन का मीत सदा
    पढ़कर मन में यह बात उठी
    सुर में यह धुन काहे न बजी

    अनुपम स्वर में सुन पाऊँ प्रभु....!


    आदरणीय अनुपमा जी,
    आदरणीय प्रवीण ने जी सही कहा...
    आप इसे गाकर अवश्य सुनाएँ....
    सादर बधाई स्वीकारें इस सुन्दर सृजन के लिए।

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    1. हृदय से आभार संजय जी ...आ ही गई है मन मे अब गीतों को स्वर देने की बात ...शीघ्र ही इस पर कार्य प्रारम्भ करूगी ....!!

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  20. बहुत मनभावन भक्ति गीत ....

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  21. आप समर्पित रहें बस , प्रभु को आप नहीं अपितु प्रभु आपको पायेंगे |

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  22. प्रभु को पाने की लालसा एक सुन्दर भाव से सजा हुआ ......बहुत सुन्दर रचना

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  23. प्रभु भक्ति के अद्भुत भाव.....

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  24. अब अखियन नीर बहाऊँ प्रभु ...
    पग धरो श्याम मत बेर करो ...
    मन मंदरवा सुधि-छाप धरो..
    अब अंसुअन पांव पखारूँ प्रभु ..

    bahut sundar praarthna.

    .

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  25. मेरे हिरदय मधु प्रीत पली ...
    तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ...
    निज प्राण पखेरू निकसत हैं ...
    मन सुमिरत वंदन गावत है ...
    तरसत मन अब हरि दरसन दो ....
    हरो पीर मेरी ...तर जाऊँ प्रभु ...!!

    मैं किस बिध तुमको पाऊँ प्रभु..
    bhawmay sundar bhakti se sani prarthana .

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  26. सुबह-सुबह इतना अच्छा भजन पढ़कर मन मुदित हो चला। यदि इसका गायन भी आपकी आवाज़ में होता, तो ....

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  27. वाह..दिल से निकलती प्रार्थना..बहुत ही सुन्दर...प्रभु को पाने की विध मिल जाये फिर क्या कहने....

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  28. मेरे हिरदय मधु प्रीत पली ...
    तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ...
    निज प्राण पखेरू निकसत हैं
    .....सार्थकता लिए हुए सटीक अभिव्‍यक्ति ... आभार
    नई पोस्ट .....मैं लिखता हूँ पर आपका स्वगत है

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  29. ankhiya hari darsha ko pyasi.....sundar prarthana.

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  30. सुंदर समर्पण भाव, सुंदर भजन सच्ची प्रार्थना.

    शुभकामनायें.

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  31. सुंदर भजन।
    कंठ दिये नहीं कोयल के...मैं किस विधि इसको पाऊँ प्रभु!

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  32. भक्ति भाव लिए सम्पूर्ण गीत

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  33. समर्पित भाव .......बिल्कुल उस भजन की तरह "दरस बिन दूखण लागे नैन "
    आभार

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  34. Replies
    1. बहुत आभार अजय जी ...आज आपके बुलेटिन में वाकई प्रभु प्रसाद मिल गया ...!!

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  35. हर पंक्ति के साथ बढ़ती व्याकुलता महसूसती रचना ......बहुत सुन्दर अनुपमाजी

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    1. बहुत बहुत आभार सारस जी ...

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  36. तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ...

    aanand aa gaya...!!

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  37. आप सभी गुणी जानो का हृदय से आभार ....

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