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14 September, 2013

मातृभाषा का सम्मान करें …………

नील निलय ,
नीलाम्बर निशांत  ,
निशि की  नीरवता सुशांत ,

अरुषि   की लालिमा में परिवर्तित हुई ,
भोर भई ,

प्रकाश का प्रस्फुटन हुआ ,
प्रभा  पंख पसार रही ,
दृष्टिगोचर होते सप्त रंग ,
विस्तृत नभ पर विस्तार हुआ ,
श्रवण श्रुति मुखर  हुई,

मन परिधि पर छिटक रहा ,
सप्त रंगों का इन्द्रधनुष ,
कूची में भर लिए रंग ,
मिट गया ह्रदय कलुष ,
आओ चलो चलें……… छेड़ें रागिनी कोई ,
गायें मंगलगान ,
कुछ रंग भरें ,
कोई  गीत रचें,कुछ गीत लिखें ,
नहीं बैर कहीं ,बस प्रीत लिखें ,
हिन्द देश के निवासी हम  …………….
हिंदी का गुणगान करें   …………………
लिखें ,रचें,कुछ ऐसा………………
आओ मातृभाषा का  सम्मान करें…………



34 comments:

  1. हिन्द देश के निवासी हम …………….
    हिंदी का गुणगान करें …………………
    लिखें ,रचें,कुछ ऐसा………………
    आओ मातृभाषा का सम्मान करें…………

    बहुत सुंदर संदेश...हिंदी दिवस की शुभकामनायें अनुपमा जी !

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  2. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (15-09-2013) के चर्चामंच - 1369 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  3. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (15-09-2013) के चर्चामंच - 1369 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  4. कुछ रंग भरें ,
    कोई गीत रचें,कुछ गीत लिखें ,
    नहीं बैर कहीं ,बस प्रीत लिखें .....अपनी मात्रभाषा का इससे प्यारा सम्मान और क्या हो सकता है

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  5. सुन्दर कविता और उतना ही सुन्दर आह्वान.

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  6. है जिसने हमको जन्म दिया,हम आज उसे क्या कहते है ,
    क्या यही हमारा राष्र्ट वाद ,जिसका पथ दर्शन करते है
    हे राष्ट्र स्वामिनी निराश्रिता,परिभाषा इसकी मत बदलो
    हिन्दी है भारत माँ की भाषा,हिंदी को हिंदी रहने दो .....

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

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  7. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - हिंदी को प्रणाम पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

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  8. भावों का सार लिए ,अर्थ का संसार लिए-

    लो फिर आया हिंदी प्रेम दिवस ,

    कर लो हिंदी से प्यार।

    मत बनो मनुज लाचार।

    बहुत सुन्दर रचना है आपकी रचना का भाव संसार भी प्रेम संसिक्त है।

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  9. हिंदी प्रेम दिवस कहो इसे -

    देखो विडंबना देखो गौर से भाई -

    पड़े मनाना दिवस भी हिंदी -

    चलो आज कुल्ला दिवस भी मनाएं ,

    आज सभी भारत भारती कुल्ला करें ,

    हाथ धोएं ,स्नान करें ,

    खाना खाएं ,

    मौज मनाएं


    करें प्यार अंग्रेजी को पर दिल से

    हिंदी भी अपनाएँ ,

    बाल गोपालन को सिखलाएँ ,

    चलो हिंदी प्रेम दिवस मनाएं।

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  10. ॐ शान्ति।

    निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल ,

    बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय को शूल।

    इतने शहरी हो गए लोगों के ज़ज्बात ,

    हिंदी भी करने लगी अंग्रेजी में बात।

    एक गजल कुछ ऐसी हो बिलकुल तेरे (हिंदी )जैसी हो ,

    मेरा चाहे कुछ भी हो तेरी कभी न हेटी हो।

    हिंदी की न हेटी हो।

    तेरी ,मेरी कभी न हो हिंदी तेरिमेरी हो।

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  11. पहर वसन अंगरेजिया ,हिंदी करे विलाप ,

    अब अंग्रेजी सिमरनी जपिए प्रभुजी आप।

    पहर वसन अंगरेजिया उछले हिंदी गात ,

    नांच बलिए नांच ,देदे सबकू मात।

    अब अंग्रेजी हो गया हिंदी का सब गात ,

    अपनी हद कू भूलता देखो मानुस जात।

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  12. सुन्दर कविता..... सुन्दर आह्वान........

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  13. बहुत सुन्दर भाषा और भाव

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  14. अपनी हिन्दी सबसे प्यारी,
    कोटि कोटि की राजदुलारी।

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  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
    :-)

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  16. बहुत सुन्दर भाषा
    सुन्दर प्रस्तुति

    जंगल की डेमोक्रेसी

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  17. मात्री भाषा का मान, सामान, गान तो होना ही चाहिए ... ये जन जन की भाषा है इसका उचित स्थान तो होना ही चाहिए ....

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  18. मातृभाषा को समर्पित सुंदर रचना |

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  19. नहीं बैर कहीं ,बस प्रीत लिखें ,
    हिन्द देश के निवासी हम …………….
    हिंदी का गुणगान करें …………………

    बहुत सुन्दर भाव |

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  20. uttam rachnaa ... sundar sabd vinyaas ..sahi kaha aapne matr ka i bhasha .. desh or mata ka jaaha samman hoga vahi tarakki hogi .. sadar naman :)

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  21. Beautiful poem. Loved this line, 'अरुषि की लालिमा में परिवर्तित हुई ,भोर भई'

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  22. सम्मान करें और आत्मसम्मान से जियें.. अति सुन्दर कहा है..

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  23. सुंदर शब्दों में मातृभाषा का गान,ध्यान,सम्मान।

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  24. hindi divas ki badhai di, humesha ki tarah bhav pravan rachna .

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  25. मातृ भाषा का सम्मान और इसमें ही कुछ गान रचें .....खूबसूरत भाव ।

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  26. बहुत सुंदर रचना अनुपमा ,हिंदी का मान बढे सम्मान बढे......

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  27. बहुत सुंदर रचना अनुपमा ,हिंदी का मान बढे ....सम्मान बढे...

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  28. आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 19/09/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

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