नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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09 November, 2011

सिलसिला...जीवन का .....!!!!!!!



 देख रही हूँ ...
शबनमी सर्द रात..
आती हुई ...
और फिर  ....
और गहराती हुई ...



नींद मुझसे कोसों दूर जाती हुई ....
एक  याद पल-पल..
आती हुई ...
और फिर....
और पास आती हुई ...

नाज़ुक से दिल को बहकाती  हुई ...
दो बूँद आंसू गालों पर...
 ढलकाती  हुई ....
और फिर ...
और उदास कर जाती हुई ...


फिर ...झींगुर  की  आवाज़....
मन भरमाती हुई ....
जैसे ..जागते जीवन का राग..
 सुनाती हुई ...
 और फिर.... सोई हुई आस जगाती हुई ...

आँखों ही आँखों में रात..
फिर जाती हुई ...!!
बीत  जाती हुई ......!!
और फिर....
जागी हुई सी आस...मेरे पास  छोड़ जाती हुई...........................................................................................................................................................

43 comments:

  1. ओह ..यह सिलसिला भी यूँ ही चलता रहता है ... भावुक रचना

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  2. नाज़ुक से दिल को बहकाती हुई ...
    दो बूँद आंसू गालों पर...
    ढलकाती हुई ....
    और फिर ...
    और उदास कर जाती हुई ...

    आपकी भावपूर्ण प्रस्तुति पढकर
    मन भावविभोर हो उठता है.

    आस से ही सिलसिला बना रहता है.

    आपकी बेहतरीन प्रस्तुति के लिए मैं
    क्या उपमा दूं,अनुपमा जी.

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  3. आस...मेरे पास छोड़ जाती हुई.......
    सुंदर!
    आस विश्वास यूँ ही बना रहे जीवन में!

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  4. भावपूर्ण रचना...

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  5. इसी सिलसिले में बीतता जीवन ... गहरी अभिव्यक्ति

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  6. raat ka sannata khuli aankhon ke bheetar kee uthaluthal ko kahta hai... subah ka intzaar hai

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  7. आँखों ही आँखों में रात..
    फिर जाती हुई ...!!
    बीत जाती हुई ......!!
    आस...मेरे पास छोड़ जाती हुई.........बहुत ही भावपूर्ण रचना....

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  8. आज 10 - 11 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


    ...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
    ____________________________________

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  9. सुन्दर चित्रात्मक कविता

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  10. भावपूर्ण रचना।

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  11. रात, नींद और आस का यह सफर न जाने कितने युगों से चल रहा है... हर रात के बाद सवेरा होता है और एक नए जीवन का आरम्भ...भावभीनी कविता !

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  12. bahut sunder blog bhi,rachna bhi,bahut khoob likhti hai aap.hardik shubhkamnaye.
    sader,
    dr.bhoopendra
    rewa mp

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  13. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति , बधाई.

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  14. us aas ko kayam rakhna kitna zaroori hai...
    jise jhingur ki aawaaz surila karti hai aur sooraj ki kirane roshni pradan karti hai...

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  15. यही क्रम है,
    जीवन कम है।

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  16. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा आज दिनांक 11-11-2011 को शुक्रवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  17. जीवन में इस तरह का सिलसिला चलता रहता है और जीवन भी।

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  18. is..aas ko sambhaal kar jeena ji jeevan hai

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  19. मनोभाव का सुन्दर चित्रण

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  20. संवेदनशील रचना.. सुन्दर प्रस्तुति
    सादर...

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  21. नमस्कार अनुपमा जी...बहुत दिनों बाद ब्लागजगत में लौटा हूँ...कुछ दिनों तक व्यस्तता के कारण दूर था....बहुत ही भावात्मक अभिव्यक्ति है आपकी...लाजवाब।

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  22. और कल फिर आयेगी
    इठलाती हुई
    या जरा झुंझलाती हुई
    छोड़ कर जाये कहाँ
    ये रात.

    बहुत नाजुक से भावों को सँवार गई यह अभिव्यक्ति.

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  23. सही कहा आपने

    बहुत सुंदर रचना

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  24. बहुत ही सुन्दर कविता बधाई और शुभकामनायें

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  25. बहुत ही सुन्दर कविता बधाई और शुभकामनायें

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  26. आस है तो श्वास है।
    बहुत अच्छी कविता।

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  27. बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना ! हर एक पंक्तियाँ दिल को छू गई! चित्र बहुत सुन्दर लगा!

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  28. नेता जी की जय हो.
    (माफ़ कीजियेगा सुनीता जी को हाथ
    जोड़े आप यूँ ही तो नजर आ रही हैं)

    मैंने तो अपना वोट आप ही को दिया जी.
    आपकी रंगों से सजी हलचल भी कम तो नही.

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  29. sahej kar rakh leti hu main har beeti yaad
    jaane fir kabhi aise pal aaye na aaye

    bahut sunder, dill ko chhoo jane wala lekhan

    abhaar

    Naaz

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  30. वाह दी ! दर्द भी और उससे निकलने कि उम्मीद भी तत्क्षण ही !
    बहुत खूब यही तो है जीवन कि समग्रता !

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  31. सुभानाल्लाह वो हिज्र की रात का मंज़र........बहुत खूब|

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  32. चन्द्र भूषण गाफिल जी बहुत बहुत आभार ...मेरी कविता चर्चा -मंच पर लेने के लिए ....!!

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  33. सुन्दर भावपूर्ण रचना।...

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  34. आप सभी ने इस जीवन यात्रा को पसंद किया बहुत बहुत धन्यवाद ...!!

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  35. राकेश जी आप को विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहती हूँ|मेरी हलचल पर आपने वोट दिया ..!!आपका वोट बड़ा मूल्यवान है क्योंकि आप बहुत अच्छे से समीक्षा करते हैं ....|आपका कीमती वोट महत्वपूर्ण है ....स्नेह बनाये रखें ....!!

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  36. संगीता जी आपका आभार ....तेताला पर इसे लिया ....!!

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  37. बहुत गहरी और लम्बी रात थी
    सुन्दर वर्णन

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!