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01 January, 2013

भावना को रूप देती प्रकृती ......



जीवन यात्रा अनवरत ...चलता चल ॥...रे मन ....!!
आँख मूँद लेने से निशा नहीं होती ...
न ही पलक खोलने से प्रात  का दिव्य स्पर्श होता है ....
समय के साथ ही हर रात की प्रात होती है ...
शाश्वत सत्य को समेटे ......
अहर्निश अपने निर्धारित मार्ग पर चलती प्रकृति .....


भावना को रूप देती ...
शब्द  को स्वरूप देती ....
आस्था को  मान देती  प्रकृति ....
जेठ  की दुपहरी में  भी ....
घनी   छांव देती प्रकृति ....!!

निर्लिप्त विस्तृत ....नील वितान ....
नीले आसमान की  ....
इस सुरमई साँझ के मौन में ....
बैलों की घंटी सी .....
मन को विश्रांति देती प्रकृति ......

पतझड़ के झड़ने में ......
मन के भटकने  में ......
नीरव से एकांत में.....
कोई आहट सी ...
पत्तों की सरसराहट सी ...
मारवा सी राग गाती प्रकृति....
पतझड़ में भी  मन वीणा को-
संवेदना के तार  देती प्रकृति ...
हर भावना को रूप देती प्रकृति.....


*************************************************************

 प्रकृति की गोद मेँ हर पल नयी उम्मीद है .......जीवन अग्रसर है ....
नूतन वर्ष सहर्ष .....
रंग और खुशबू लिपटाए ......
आप सभी के जीवन से पतझड़ हर ले जाये ....
बसंत ही  बसंत लाये ....
नवल हर्ष ...नवल पुष्प लाये ............
धरा खिली ...अंजुरी भर पंखुरी ..... ...गणनायक के   गुण   गाये .....

आप सभी को नूतन वर्ष की मंगलकामनाएं ........



30 comments:

  1. नव-वर्ष की हादिक शुभकामनाये !

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  2. प्रकृति की गोद मेँ हर पल नयी उम्मीद है
    ................................
    बेहद ही खूबसूरत रचना
    आपको भी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  3. prakriti ko shabdo me utaar diya aapne :)

    सुना था इक्कीस दिसम्बर को धरती होगी खत्म
    पर पाँच दिन पहले ही दिखाया दरिंदों ने रूप क्रूरतम
    छलक गई आँखें, लगा इंतेहा है ये सितम
    फिर सोचा, चलो आया नया साल
    जो बिता, भूलो, रहें खुशहाल
    पर आ रही थी, अंतरात्मा की आवाज
    उस ज़िंदादिल युवती की कसम
    उसके दर्द और आहों की कसम
    हर ऐसे जिल्लत से गुजरने वाली
    नारी के आबरू की कसम
    जीवांदायिनी माँ की कसम, बहन की कसम
    दिल मे बसने वाली प्रेयसी की कसम
    उसे रखना तब तक याद
    जब तक उसके आँसू का मिले न हिसाब
    जब तक हर नारी न हो जाए सक्षम
    जब तक की हम स्त्री-पुरुष मे कोई न हो कम
    हम में न रहे अहम,
    मिल कर ऐसी सुंदर बगिया बनाएँगे हम !!!!
    नए वर्ष मे नए सोच के साथ शुभकामनायें.....
    .
    http://jindagikeerahen.blogspot.in/2012/12/blog-post_31.html#.UOLFUeRJOT8

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  4. प्रकृति की गोद मेँ हर पल नयी उम्मीद है .......जीवन अग्रसर है ....
    नूतन वर्ष सहर्ष .....
    भावविभोर करते शब्‍द ... अनुपम शब्‍दों का संगम

    शुभ दिन के साथ अनंत शुभकामनाएं

    सादर

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  5. प्राकृतिक हरीतिमा सी भावनाएं शुभकामनायें लिए .......... हर कामना फलीभूत हो

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  6. बहुत खूब..
    नववर्ष की हार्दिक बधाई !!!

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  7. बहुत उम्दा.बेहतरीन श्रृजन,,,,
    नए साल 2013 की हार्दिक शुभकामनाएँ|
    ==========================
    recent post - किस्मत हिन्दुस्तान की,

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  8. नव वर्ष 2013 की बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं

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  9. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 05/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  10. अच्छी रचना

    नया वर्ष आपके लिए बहुत बहुत मंगलमय हो

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  11. बहुत ही अच्छी लगी ..नव वर्ष की समस्त शुभकामनाएं ...

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  12. प्रकृति को समर्पित नववर्ष पर एक बेहतरीन रचना!!

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  13. Fresh and beautiful poem.
    Wish you and your family a very happy new year.

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  14. आपकी इतनी सुन्दर, मधुर, सुरीली शुभकामनाएं आज की सुबह को पुलकित व आनंदित कर गयीं अनुपमा जी ! नव वर्ष की आपको भी सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं !

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  15. प्रकृति के विभिन्न उपादानों के समेटे कवित के भाव अच्छे लगे।
    नूतन वर्ष की मंगलकामनाएं।

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  16. सुन्दर रचना. ताज़ा कर गया मन.प्रकृति का निर्मल एहसास दे गया. नव वर्ष की शुभकामनायें.

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  17. बहुत उम्दा श्रृजन,,,,भावना को रूप देती ...
    शब्द को स्वरूप देती ....
    आस्था को मान देती प्रकृति ....
    जेठ की दुपहरी में भी ....
    घनी छांव देती प्रकृति ....!!

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  18. प्रकृति नित नूतन......आपको भी नव वर्ष की हार्दिक बधाई।

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  19. फूलों की सुन्दर पंखुरियों से खिले शब्द... मनभावन रचना... आपको भी नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें

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  20. प्रकृति की गोद मेँ हर पल नयी उम्मीद है .......जीवन अग्रसर है ....
    नूतन वर्ष सहर्ष .....
    रंग और खुशबू लिपटाए ......
    आप सभी के जीवन से पतझड़ हर ले जाये ....
    बसंत ही बसंत लाये ....
    नवल हर्ष ...नवल पुष्प लाये ............
    धरा खिली ...अंजुरी भर पंखुरी ..... ...गणनायक के गुण गाये .....

    आपको भी नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें

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  21. आँख मूँद लेने से निशा नहीं होती..

    धरा खिली ...अंजुरी भर पंखुरी

    बहुत ही सुन्दर! आपको भी शुभकामनाएं!
    सादर
    मधुरेश

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  22. प्रकृति की गोद में निशंक हो सो जाएँ
    जब जी उदास हो उस से बतिया लें...सुंदर भाव ! आपको भी नव वर्ष मुबारक हो..

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  23. प्यारी सी रचना...
    सुन्दर सी भावना....
    पूर्ण हो हर कामना......
    नववर्ष मंगलमय हो अनुपमा जी...
    सस्नेह
    अनु

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  24. प्रकृति का कितना सुन्दर सौम्य वर्णन ...:)

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  25. प्रकृति का कितना सुन्दर सौम्य वर्णन ...:)

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  26. प्रकृति के रूप में जीवन को सराबोर करती सुंदर रचना

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  27. अदभुत--बहुत सुंदर
    बहुत बहुत बधाई

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  28. nav varsh me nav kamal ke tahrah khile raho!!!!!
    bahut bahut badhaie......

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  29. nav varsh me nav kamal ke taherah khile raho!!!sunder kavita aur nav varsh ke bahut bahut badaie,,,,,

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  30. बहुत आभार आप सभी का .....नव वर्ष की शुभकामनाओं के लिए ....

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!