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30 May, 2014

राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!




Ignite the lamp of my heart ....my soul .....!!O Lord .....don't let my prayers go unheard ....!!just hold me before I fall ......!!

राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!
कोयल की कूक में कामना,
मोरी प्रीत का सेतु प्रार्थना ,
आरत का सेतु अराधना
साधक का सेतु साधना
श्याम  तुम तक पहुँचूं  कैसे  .... ?
मीरा की पीर झरे झरना ,
मन की हूक रचे रचना
राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!

15 comments:

  1. घने विपिन से तिमिरहरण भी तो बस वही जानता है. सुन्दर कृति.

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  2. मन में बसे श्याम तक तो यूँ पहुँच जाउंगी ,हर सांस आराधना है हर पल पर नजर पूजा है ,सुन्दर रचना

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  3. आरत का सेतु अराधना
    साधक का सेतु साधना
    श्याम तुम तक पहुँचूं कैसे .... ?

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  4. ‘मन की हूक रचे रचना..‘

    अच्छी पंक्तियां !

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  5. बहुत ही उम्दा...

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  6. इस घने बादलों से श्याम स्वयं ही निकाल लेगा ...
    भावपूर्ण पंक्तियाँ ...

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  7. राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!
    श्याम तुम तक पहुँचूं कैसे ....
    मीरा की पीर झरे झरना ,
    मन की हूक रचे रचना
    राह कठिन ,है बिपिन घना ......!

    बहुत दिव्य अनुभव

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  8. भावमय करते शब्‍द .... अनुपम प्रस्‍तुति

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  9. घने विपिन में ठन कर आयेगा प्रकाश
    उसके आशीष से फिर छायेगा सर पे आकाश
    पीर होगी तबी तो छलकेंगे अश्रू
    और देगा वही सारी दुविधा से अवकाश

    आपकी सुंदर रचना से प्रेरित।

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  10. जब श्याम तक पहुँचने का मैं बना ही लिया है तो घने जंगलों से डर कैसा

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  11. राहे आसान होंगी , मंगलकामनाएं आपको !

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