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06 September, 2015

मृदुल राग की बानगी .....!!

मृदुल राग की बानगी ,
नभ घन भर लाई  ,
कुंतल सी उड़ती कारी
उजियारी मन पर छाई ...!!


जा री बदरी  बांवरी
निरख न मेरो भेस ,
मुतियन बुंदियन  बाट तकूँ मैं,
कब  सुलझाऊँ केस ……?

आस घनेरी छाई नभ पर ,
बरसे मन  हुलसाती  ,
पतियाँ  भीगी ,
लाई मुझ तक
कुहुक  कोयलिया गाती    …!!

निमुवा  फूले मनवा  झूले ,
मियां मल्हार की  बहार ,
सावन की ऋतु नेह बरसता ,
हरियाई  मनुहार    …!!

11 comments:

  1. सावन का सुंदर चित्रण...वर्षा की रिमझिम फुहार भी मन भावन है..अनुपमा जी

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    1. ह्रदय से आभार अनीता जी !!

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  2. आहा ! मृदुल राग की अनुपम बानगी .

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  3. सुंदर बर्षा गीत । मेरी ब्लॉग पर आप का स्वागत है ।

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  5. "कब सुलझाऊ कैश "शब्दों का मार्मिक प्रयोग ।प्रकृति राग बहा हैं सस्वर।बधाई ।
    छगन लाल गर्ग।

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  6. प्रकृति का अनुपम चित्रण। मन को प्रसन्न कर गया। बधाई। सस्नेह

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  7. सावनी ऋतु का क्या खूब वर्णन किया है।

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  8. सावनी मृदुल फुहार ...

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