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31 May, 2016

इस ठहरे हुए वक़्त में ....!

किसलय का डोलता अंचल ,
नदी पर गहरी स्थिर लहरें चंचल
झींगुर की रुनक झुनक सी नाद ...
करती  हैं कैसा संवाद
पग  धरती विभावरी ,
धरती श्यामल शीतलता  भरी,
आ रही  रजनी परी ...!!
कोलाहल से दूर  का  कलरव ,
मन शांत प्रशांत नीरव
अनृत से प्रस्थान करते ,
नीड़ की ओर उड़ते पखेरू ,
मणिकार की मणि सा ...
स्निग्द्ध धवल मार्ग दर्शाता विधु
शब्द बुनते भाव इस तरह
फिर लरजती  लरजाती सी  उतरती है ,
मन में
जैसे
कोई मणि सी कविता ...!!



10 comments:

  1. अहा ! बहुत सुन्दर शब्द चयन ... कोमल भाव

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 02-06-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2361 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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    1. हार्दिक आभार आपका दिलबाग जी |इस मंच से मेरे शब्द ,मेरे भाव बहुत लोगों तक पहुँचेंगे ,कृतार्थ हूँ आपने मेरी अभिव्यक्ति को सम्मान दिया |

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  3. सुन्दर भावों को प्रस्तुत करती मनमोहक रचना.

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  4. सुंदर भावों से ओतप्रोत रचना , बधाई

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  5. सुन्दर कविता

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  6. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 28 जून 2016 को लिंक की गई है............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    1. हार्दिक आभार आपका आदरणीय !!

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  7. सच में मणि सी ही कविता ।

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  8. सच में अति सुन्दर भावमय कविता। बधाई।

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