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13 May, 2022

मन फिर मुस्काता है !!

जब

कभी किसी

उदास शाम की आगोश में

लिपटी मेरी तन्हाई ,

न कहती है ,

न कहने देती है ,

अपनी उदासी का सबब ,

गहराती सुरमई  साँझ

कजरारे नैनो के मानिंद

तब

पलकें उठाती है

और सोये हुए  खाब मेरे

फिर जी उठते हैं ... !!

हवा का इक झोंखा

सहलाकर माथे को

दूर कर देता है

माथे की शिकन

नायाब सा वो खाब

फिर इक बार

जगमगाता है , 

मन फिर मुस्काता है !!

मन फिर मुस्काता है !!

अनुपमा त्रिपाठी

"सुकृति "

12 comments:

  1. हर शाम एक नयी सुबह का संदेश जो लेकर आती है, सुंदर आशा और विश्वास के स्वरों से बुनी रचना !

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  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(१४-०५-२०२२ ) को
    'रिश्ते कपड़े नहीं '(चर्चा अंक-४४३०)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    ReplyDelete
  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(१४-०५-२०२२ ) को
    'रिश्ते कपड़े नहीं '(चर्चा अंक-४४३०)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनीता जी मेरी कृति को चर्चा अंक -4430 में लेने हेतु|

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  4. आखों के स्वप्न ही जीवन का सबसे खूबसूरत संबल हैं | मनभावन रचना अनुपमा जी | हार्दिक शुभकामनाएं|

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  5. 'और सोये हुए ख़्वाब मेरे

    फिर जी उठते हैं ... ' -वाह, क्या खूब कहा है!

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  6. बहुत सुंदर सराहनीय रचना ।

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  7. ये सुरमई सांझ बदल देती है मौसम और दूर करती है हर उदासी ...

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  8. बस यूं ही मन मुस्काता रहे और आंखों में ख्वाब सजते रहें । जन्मदिन की शुभकामनाएँ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद di❤❤🙂

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  9. हाँ! सच में, कुछ ऐसा ही होता है। हार्दिक शुभकामनाएँ।

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