नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

09 April, 2012

रीत रही मोरी प्रीत ....!!

सुर के पीछे पीछे चलना ....
सुर साधना ....
बने अगर मन की यही आराधना ...
बहुत कठिन है ये अर्चना ... ....!!

सांस तो चलती है न ....?आस आज भी जागी- जागी  सी है .... है ,पर कहीं कुछ भाव में फर्क है ....
कभी अपना गाना सुनना मन को भाता है ....
कभी अपने ही गाने में जब ढेरों कमियां दिखतीं हैं ....बहुत रियाज़ करने पर भी वो सुर नहीं आता .....जो आना चाहिए .. ...तब  व्याकुल  मन ....
कहीं ...चैन नहीं पाता .....
बस अकुलाता .....और ...तब लगता है ....



                                                 रीत   रही मोरी प्रीत ...


श्याम ने न आवन  की ठानी ...
मन  ने न बिसरावन  ठानी ....
आस से रास करत अब मनवा...
 रीत निभाए प्रीत  ...
निस दिन राह तकत अब मनवा ....
रीत  रही  मोरी प्रीत ....

श्याम के मीठे बैन ..सखीरी ...
मोरे  काजल से  नैन ...सखीरी..
मनवा न इक पल चैन ...सखीरी ...
जिया की पीड़ा सह ना पायें.....
छल-छल अँखियाँ  नीर बहायें.....
श्याम  के छल को भूल न पायें......
राह तकत पथराएँ......

 छलिया मन का मीत...

रीत रही  मोरी प्रीत .....!!

35 comments:

  1. Aisa lag raha hai ki in geeton ko bas swar dene ki zarurat hai... ekdum thumari shaili mein..
    Sundar rachana...
    Saadar
    Madhuresh

    ReplyDelete
  2. इच्छाशक्ति और सच्ची प्रीत से कुछ भी असंभव नहीं................

    सुंदर भाव......

    ReplyDelete
  3. श्याम के मीठे बैन ..
    बने काजल से कजरारे नैन ...
    मनवा न इक पल चैन ...
    जिय की पीर सह नहीं पायें.....
    छल-छल अँखियन नीर बहायें.....
    श्याम के छल को भूल न पायें......
    राह तकत पथराएँ......

    बेहतरीन भाव पुर्ण प्रस्तुति,सुन्दर रचना...

    RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....
    RECENT POST...फुहार....: रूप तुम्हारा...

    ReplyDelete
  4. श्याम के मीठे बैन ..
    बने काजल से कजरारे नैन ...
    मनवा न इक पल चैन ...
    जिय की पीर सह नहीं पायें.....
    छल-छल अँखियन नीर बहायें.....
    श्याम के छल को भूल न पायें......
    राह तकत पथराएँ......mann khush ho gaya

    ReplyDelete
  5. जिय की पीर सह नहीं पायें.....
    छल-छल अँखियन नीर बहायें.....
    ये लगन सब कुछ साध सकती है!
    शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  6. सखीरी छलिया मन का मीत...

    अनुपम...बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..बहुत बधाई.

    ReplyDelete
  7. शास्त्रों में कहा गया है कि मात्र श्याम ही पुरुष हैं और शेष सब स्त्रियाँ.. यह कविता श्याम को समर्पित एक स्त्री की पुकार है...
    कभी पॉडकास्ट के विषय में सोचा है आपने..? आपके इस कला कौशल को भी प्रकाश में आना चाहिए!! इससे आपकी कविता/गीत का आनद द्विगुणित हो जाएगा!!
    इसे बस एक सुझाव समझें!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. सुझाव के लिए बहुत आभार सलिल जी ......कभी कोशिश ज़रूर करूंगी ...!इन गीतों को स्वर देना अपने आप में एक अलग कार्य है और समय भी ज्यादा चाहिए |पर आपका सुझाव अवश्य ध्यान में रखूंगी !पुनः आभार ..!!

      Delete
  8. श्याम ने न आवन की ठानी ...
    मन ने न बिसरावन की ठानी ....
    आस से रास करत अब मनवा...
    रीत निभाए प्रीत ...

    इन पंक्तियों के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई ...

    ReplyDelete
  9. मनोभावों को बेहद खूबसूरती से पिरोया है आपने.......
    हार्दिक बधाई।

    ReplyDelete
  10. सुरभित काव्य लहरी . जो रीत गई वो बीत गई , अब लेती है हिलोरें प्रीत नई .

    ReplyDelete
  11. सखीरी छलिया मन का मीत...
    ......री बिन्ना...
    रीत सी रही मोरी प्रीत .....!!.....अनुपमा जी प्रीत की रीत ही ऐसी होती है..अनुपम भाव..बहुत सुन्दर...

    ReplyDelete
  12. राधे राधे
    बहुत सुंदर क्या कहने

    श्याम ने न आवन की ठानी ...
    मन ने न बिसरावन की ठानी ....
    आस से रास करत अब मनवा...
    रीत निभाए प्रीत ...
    निस दिन राह तकत अब मनवा ....

    वाह

    ReplyDelete
  13. श्याम के मीठे बैन ..
    बने काजल से कजरारे नैन ...
    मनवा न इक पल चैन ...
    जिय की पीर सह नहीं पायें.....
    छल-छल अँखियन नीर बहायें.....
    श्याम के छल को भूल न पायें......
    राह तकत पथराएँ......
    .....सच में सुन्दर अभिव्यक्ति....

    ReplyDelete
  14. छल-छल अँखियन नीर बहायें.....
    श्याम के छल को भूल न पायें......................खुबसूरत शब्दों में सुंदर प्रस्तुति, आभार...

    ReplyDelete
  15. कृष्ण तो यूं ही छलकाता है ... प्यार को रीता नहीं होने दें ...

    ReplyDelete
  16. बहुत खूबसूरत लगी पोस्ट....शानदार।

    ReplyDelete
  17. बहुत भावपूर्ण रचना .... इसको तो आप गा कर लगातीं ...

    ReplyDelete
  18. बहुत सुन्दर...

    ReplyDelete
  19. विरह के अनेक रंग हैं ....गीत से संगीत का ....सुर से तान का यह विरह अनूठा ही है ...गहन पीड़ा लिए ..बहुत सुन्दर अनुपमाजी !

    ReplyDelete
  20. खुबसूरत भाव ..... अति सुन्दर रचना..
    बार बार पड़ने को मन करता है... आभार.

    ReplyDelete
  21. mujhe to padh kr hi saare sur sunaayi de rahe hain...
    bahut sundar ma'm..

    ReplyDelete
  22. apki rachnaye romanchit karti hain aur sach me apke suro ko sunNe ka man karta hai....salil ji k sath sath hamari bhi yahi chaah hai.

    ReplyDelete
    Replies
    1. अनामिका जी बहुत आभार आपका .....जब सुधि पाठकों के मन में कोई बात आती है ....प्रभु तक पहुँच जाती है ....!!प्रभु ने चाहा ...ज़रूर पॉडकास्ट करूंगी .....!!

      Delete
  23. गीत प्रीति की रीति रही तो,
    रीत न घट रह पायेगा।

    ReplyDelete
  24. Madhuresh ne sahi kaha... ab is geet ko sangeet de hi daliye:)
    subh din!

    ReplyDelete
  25. सुर के पीछे पीछे चलना ....
    सुर साधना ....
    बने अगर मन की यही आराधना ...
    बहुत कठिन है ये अर्चना ... ....!!
    वाह लाजवाब सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  26. मधुर मधुर प्रीत सा सुंदर मधुर गीत... रीतता हुआ जो लगता है पर कभी नहीं रीतता वह ऐसा ही है...आभार!

    ReplyDelete
  27. अनुपमा जी, आपके इन शब्द योजना को पढ़ते वक़्त मन में यह चलता रहता है कि इसे शास्त्रीय गायन पद्ध़्ति में गाया जाए तो इसका प्रभाव काफ़ी बढ़ जाएगा। एक गुजारिश है आप इस तरह की रचनाओं के साथ अपनी आवाज़ में गाकर भी लगा दिया करें।

    ReplyDelete
  28. मन आनंदित हो गया..इस सुंदर रचना के लिए बधाई...

    ReplyDelete
  29. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  30. मनभावनी -कभी गायन का आडिओ / यूट्यूब भी शेअर करना चाहें! प्रतीक्षा रहेगी !

    ReplyDelete
  31. आप सभी का बहुत बहुत आभार रचना पसंद करने के लिए ...!
    मधुरेश ...अनु, मुकेश ,सलिल जी ...मनोज जी ,.अरविन्द जी ....आप सभी ने मुझे जोश दिला दिया है ....ईश्वर ने चाहा ......ज़रूर स्वर दूँगी ....
    आप सभी का ह्रदय से आभार ....शुभकामनाओं के लिए ....!!!!

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!