नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

25 April, 2013

चन्द्रिका तुम आओ ...!!


चन्द्रिका  तुम आओ ....!!

प्रेम भरा धरती पर धरो पग ..
अपने स्पर्श मात्र से ..
दिवसाग्नि को तनिक ...
शीतलता दे जाओ ....!!

अब निरंतर  निर्झर झरो ...
मृणाल पात पर मेरे धर जाओ ....
अपनी सम्पूर्ण धरोहर ...
एक  बूँद ओस  सी मनोहर .....!!

महत् आनंद सरसाओ ....
चन्द्रिका तुम आओ ...

 तुम्हारा ..शीतल रजत प्रकाश ...
यूँ हो सार्थक अविरत ...
सीमित से इन क्षणों में ....
असीम भाव बरसाओ ......!!

चन्द्रिका  तुम आओ ...!!




39 comments:

  1. महत् आनंद सरसाओ ....
    चन्द्रिका तुम आओ ............बहुत बढियां ,सुंदर |

    ReplyDelete
  2. आया न....पूर्णिमा लेकर...
    बहुत सुन्दर..

    सस्नेह
    अनु

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर रचना ............चन्द्रिका की शीतलता तो सबको प्रिय है और कवि ह्रदय जो महसूस करता है वो और कोई नहीं अनुपमा जी ..........

    ReplyDelete
  4. शीतल चाँदनी से खूबसूरत गुहार ...

    ReplyDelete
  5. निर्मल पावन भाव..... सुंदर शब्द संयोजन

    ReplyDelete
  6. .
    खुबसुरत अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  7. शीतल, निर्मल पोस्ट .....
    मन को आनंदित करते भाव..

    ReplyDelete
  8. सीमित से इन क्षणों में ....
    असीम भाव बरसाओ ......waah .....bahut badhiya ...

    ReplyDelete
  9. स्वच्छ चांदिनी बिछी हुई है अवनि और अम्बर तल में . सुन्दर आवाहन दी .

    ReplyDelete
  10. चांदनी से सुन्दर आवाहन

    ReplyDelete
  11. सुन्दर आवाहन अनुपमा

    ReplyDelete
  12. मन शीतल हो गया रचना पढ़कर.

    ReplyDelete
  13. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (27 -4-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार वंदना जी ,चर्चा मंच पर मेरी रचना को स्थान देने के लिए ....!!

      Delete
  14. चांदनी को प्रीत भरा आमंत्रण...सुंदर !

    ReplyDelete
  15. बहुत भाव पूर्ण रचना
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post बे-शरम दरिंदें !
    latest post सजा कैसा हो ?

    ReplyDelete
  16. aise aamntaran par kon nahi aayega ..bahut sunder

    ReplyDelete
  17. शब्दों और भावों का निर्झर बहता झरना .... वाह !!!

    ReplyDelete
  18. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने ....बेहतरीन अभिव्‍यक्ति

    ReplyDelete
  19. इतना स्नेह भरा निमंत्रण ...अवश्य स्वीकार होगा ।

    ReplyDelete
  20. स्नेह भरा सुन्दर आवाहन..

    ReplyDelete
  21. कोमल भावाभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  22. सुंदर प्रेमासिक्त आह्वान. बेहतरीन प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  23. कविता में चांदनी की-सी शीतलता अच्छी लगी।

    ReplyDelete
  24. काव्यामृत का पान किया...

    ReplyDelete
  25. waah bahut bahut sundar lagi yah rachna

    ReplyDelete
  26. प्रेम के अनुराग को आमंत्रित करती
    सार्थक रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

    ReplyDelete
  27. अहा! प्यार भरा निवेदन. सुन्दर... बधाई.

    ReplyDelete
  28. आपकी कवितायेँ गीत की सी मधुर सुरमय होती हैं .....

    ReplyDelete
  29. बहुत मनभावन प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  30. बहुत सुन्दर अनु

    ReplyDelete
  31. आभार आप सभी का .....ह्रदय से ....

    ReplyDelete
  32. बहुत खूबसूरत कृति

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!