नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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20 April, 2013

उज्जवल प्रकाश की ओर......

एक घना आम का वृक्ष है ,उसी की शीतल छाया में जैसे झूला झूल  रही हूँ ....तेज ...और तेज पींगें लेती हुई ...!!ऊपर नीला आसमान ....और मेरी पींग और तेज ...!!
विचार कुछ हलके से ...उड़ गए मुझसे आगे ...मैं विचारों के पीछे पीछे उड़ रही हूँ ....सुखद सी अनुभूति होती है ....!!कुछ तो है ...ध्येय जिसके पीछे भाग रही हूँ ...!!
ईश्वर का ध्यान सबसे पहले आता है ...!!
आभार प्रभु ...हमें मिला है ऐसा जीवन ,हम जो चाहें कर तो सकते हैं ...

नारी हूँ मैं किन्तु अबला नहीं ....!!

यही दृढ़  सोच मन कि उड़ान को और सुन्दर बना देती है ...!!

''नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास रजत नग पगतल में ,
पीयूष स्त्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में ...!"

जयशंकर प्रसाद जी की  ''कामायनी'' की ये पंक्तियाँ  कितनी सुन्दर हैं |नारी का मूल्यांकन इससे खूबसूरत शायद ही हो सकता हो ..!!
किन्तु इससे अलग भी विकास की नींव में महिला की अहम भूमिका रही है |और हर उपलब्धि के पीछे महिला का योगदान ज़रूर रहा है ..!अतीत और वर्तमान की तस्वीर देखें तो बदलाव की एक बयार साफ़ नज़र आती है |


painting by Shubnam Gill.
किन्तु बदलाव का यह सफर लंबे संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा है |तथा ये सफर आज भी जारी है |कन्या भ्रूण हत्या ,बलात्कार,दहेज और न जाने कितनी ही और कुंठाएं ...!!
''यह आज समझ तो पाई हूँ ,मैं दुर्बलता मैं नारी हूँ 
 अवयव की सुन्दर कोमलता लेकर मैं सबसे हारी हूँ ''

इस प्रकार सोच लेकर विचलित हो बैठ जाना है या .....अस्फुट रेखा की सीमा में आकार अपनी कला को ,अपनी अभिव्यक्ति को देना है ,अपने स्वत्व को स्थापित करना है .....???

मैं तो यही कहूंगी .....

''असतो माँ सद्गमय 
तमसो माँ ज्योतिर्गमय ...''

तम निरंतर छंटता जाता है ...!!उज्जवल प्रकाश है .....!!मैं हूँ ....मेरा अस्तित्व है ...!!मेरी अभिव्यक्ति है ....प्रखर .....मुखर ......

जैसे ...?????
जैसे जीवन है परछाईं रे ....
अहा ,पुरवा(पूर्वा ) सुहानी आई रे ....

झूले की पींग और तेज .....और तेज ....
आईये ...
 फिर यात्रा जारी रखें उज्जवल  प्रकाश की ओर......

35 comments:

  1. शुभकामनाएं

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  2. स्वत्व ही ईश है,उसके लिए यदि संहार ज़रूरी है तो वही सही ....

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  3. नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास रजत नग पगतल में
    पीयूष स्त्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में ...!"
    बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,सुंदर प्रस्तुति ,,,

    RECENT POST : प्यार में दर्द है,

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  4. झूले की पींग और तेज .....और तेज ....
    वाह ... अनुपम भाव लिये उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

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  5. बहुत सुंदर भाव हमें चलते रहना है बस चलते रहना है
    क्योंकि लड़की हूँ मैं

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  6. शब्द-शब्द आशा, उत्साह और आत्मविश्वास से भरे...
    चलो चलें उज्जवल प्रकाश की ओर...शुभकामनायें अनुपमा जी

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  7. ''असतो माँ सद्गमय
    तमसो माँ ज्योतिर्गमय ...''

    प्रकाश ही प्रकाश है चारों ओर...ऐसी अनुभूति कितनी आह्लादकारी है..बधाई !

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  8. झूले की पींग और तेज .....और तेज ....
    आईये ...
    फिर यात्रा जारी रखें उज्जवल प्रकाश की ओर....
    !!

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  9. ''असतो माँ सद्गमय
    तमसो माँ ज्योतिर्गमय ...''

    प्रकाश हर पल बना रहे

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  10. अस्तित्व प्रखर....अभिव्यक्ति मुखर...विरल होता तम निरंतर....
    बहुत सुंदर कल्पना अनुपमा....ये यात्रा तो चलती रहे निरंतर ....
    कोशिशें तो जारी हैं....
    आभार इस सार्थक रचना के लिए....

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  11. आज की ब्लॉग बुलेटिन क्यों न जाए 'ज़ौक़' अब दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. बहुत आभार शिवम भाई ......इस आलेख को ब्लॉग बुलेटिन में स्थान दिया ...!!

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  12. मन जीवन रौशन करे दाता....

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  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    साझा करने के लिए आभार...!

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!आभार.

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  15. भान रहे बस इतना कि नारी तू शक्ति है | ....सुंदर प्रस्तुति |

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  16. अहम् ब्रम्हास्मि भी जीवन को प्रखर उजास देता है .बहुत सुन्दर आह्वान .

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  17. यात्रा चलती रहे...निरंतर....

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  18. एक गहन अंधकार के अतीत से आरम्भ हुयी यह यात्रा है.. मशालें कई ने उठाईं, बस आवश्यकता है कि उस मशाल को बुझाने न दिया जाए!! तम से निकलकर ज्योति में पदार्पण का वह शुभ दिन अवश्य आएगा..

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  19. बहुत अच्छी विवेचना .

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  20. bahut sundar ............hamari yatra jaari rahni chahiye .........

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  21. bilkul!!!
    ''नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास रजत नग पगतल में ,
    पीयूष स्त्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में ...!"
    bahut achhi lagi ye!!!

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  22. हर बुराई से जूझती नारी प्रकाश की हल्की सी किरण की आशा लिए .... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।

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  23. आज चर्चा मंच पर शशि पुरवरजी ने इस आलेख का लिंक दिया है ....|आभार शशि जी ...

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  24. सच ,बिलकुल ऐसे जी जज्बे और विश्वास की जरूरत है आज के इस माहौल में ।

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  25. इसी विश्वास की आवश्यकता है आज...

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  26. एक एक शब्द दिल में उतरता गया ...क्योंकि दिल से महसूस किया था ...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति अनु

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  27. एक एक शब्द दिल में उतरता गया ...क्योंकि दिल से महसूस किया था ...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति अनु

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  28. उज्जवल प्रकाश की ओर यह प्रखर, मुखर यात्रा इसी तरह सतत जारी रहे और आपकी कलात्मक अभिव्यक्ति इसी प्रकार सुंदर आकार लेती रहे ! अनन्त शुभकामनायें स्वीकार करें ! विश्वास जगाती बहुत ही सशक्त प्रस्तुति !

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  29. आभार आप सभी का ....ह्रदय से ...

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!