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11 July, 2014

धनक की आस बरसाओ ...!!

धनक की आस बरसाओ ,
मेघा बरसो सरसो
धिनक धिन 
बूंदों का ताल सुनाओ ,
धन धन भाग हमरे हो जाएँ 
धरा पर धान का धन बिखराओ 
आ जाओ जीवन हर्षाओ ....!!
मेरी धरा धारण करे धानी धनक ...!!

बेर भई अब ,
मेघा बरसो सरसो
धनक की आस बरसाओ ...!!

16 comments:

  1. वाह्ह्ह्हह्ह्ह्हह
    आपकी मुराद पूरी हो

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  2. इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 13/07/2014 को "तुम्हारी याद" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1673 पर.

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    Replies
    1. हृदय से आभार आपका राजीव कुमार जी ...!!

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  3. वाह .... बेर भई
    मेघा बरसो
    सच ....

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  4. बहुत सुंदर संगीत मय प्रार्थना..

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  5. सुंदर आह्वान

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  6. मेघों को संगीतमय आमंत्रण ...
    अब तो बरसो प्यार बुझाओ ..
    मेघा आओ ... मेघा आओ ...

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  7. dharaa par dhanya-dhan bikhraao......der bhayi megha ab to barso sarso
    bahut sunder swaagat-geet hai varsha ka avahan kartaa saa ...

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  8. सुंदर रचना...........

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  9. इतना प्यारा ,इतना मधुर आमंत्रण - आना पड़ेगा मेघों को ,आयेंगे अवश्य !

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  10. बड़े खयाल की बंदिश जैसी भावपूर्ण रचना।

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  11. उम्मीद है बरखा रानी हर सुर और लय साथ लेकर आई होगी इस मानसून में. सुन्दर कृति.

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