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31 December, 2014

चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!

शब्द अपने कितने स्वरूपों में
अवतरित ,
खटखते हैं 
मन चेतन द्वार ,
लिए निष्ठा अपार ,
झीरी से फिर चली आती है
धरा के प्राचीर पर
रक्तिम .....
पलाश वन सी .... 
रश्मि  की कतार
नवल वर्ष  प्रबल  विश्वास
सजग  है मन
रचने नैसर्गिक उल्लास,
हँसते मुसकुराते से
 भीति चित्र ,
प्रभात का स्वर्णिम  उत्कर्ष,
शबनमी वर्णिका का स्पर्श ,
एक विस्तृत आकाश का विस्तार ,
बाहें पसार ...
चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!
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आप सभी को नव वर्ष 2015 की अनेक अनेक मंगलकामनाएं !!सभी के लिए यह वर्ष शुभ हो ऐसी प्रभु से प्रार्थना है !!

13 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. बहुत सुंदर चित्र....व शब्द ....नये वर्ष की शुभकामनायें..

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक चर्चा मंच पर वर्ष २०१५ की प्रथम चर्चा में दिया गया है
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

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    Replies
    1. हृदय से आभार दिलबाग जी ,इस शुभ अवसर पर आपने मेरी कविता को चर्चा मंच हेतु चयन किया !!नव वर्ष की मंगलकामनाएं !!

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति .नव वर्ष की शुभकामनाएं

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  5. मन की मुक्त उड़ान उत्फुल्ल कर गई ,आभार !

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  6. खोल दिए हैं नए साल ने द्वार
    अब तो उड़ना ही होगा पंख पसार

    नव वर्ष की शुभकामनायें.

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  7. उम्मीद जगाती पंक्तियाँ..नये वर्ष की शुभकामनायें..

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  8. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    नव वर्ष-2015 आपके जीवन में
    ढेर सारी खुशियों के लेकर आये
    इसी कामना के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. आओ हम सब अपने जीवन में नैसर्गिक उल्लास समेट लें .
    वाह, बहुत सुन्दर पोस्ट......

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  10. सुंदर भावाभिव्यक्ति.... नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ...

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