नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

28 February, 2015

वो है ज़रूर .....!!

नहीं ,
कोई आवाज़ नहीं है उसकी ,
न ही कोई रंग है ,
नहीं ,
कोई रूप नहीं है उसका ,
पर वो बुलंद है ...!!
मेरी आस में
मेरी सांस में
सोया जागा 
एक तार
विद्यमान है ...
हाँ है ज़रूर ,
मुझमें शांत एकांत 
उतना ही ...
जितना तुममे चंचल प्रबल ...
हाँ
वो है ज़रूर ....!!

8 comments:

  1. मुझमें शांत-एकांत, मेरा शून्य-मेरा शिखर सब तुझमें ही है। मैं मंद-तेज से परे नैसर्गिक, अबोध आलोक तुझमें हूँ।

    ReplyDelete
  2. जितना चंचल प्रबल तुममें, उतना शांत प्रशांत मुझमें
    हाँ वह है ज़रूर।
    बहुत सुंदर।

    ReplyDelete
  3. निराकार इश्वर तो सब में है ... चंचल, शांत या हर रूप में ...
    बहुत ही भावपूर्ण रचना ...

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर दिव्य भावों का सृजन...यह विश्वास ही उस तक ले जाता है...

    ReplyDelete
  6. Bahut sunder aur bhavpurna rachna
    thanks.

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!