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02 July, 2021

सघन तिमिर में






 रहता नहीं जब

कोई भी समीप -

सघन तिमिर में, 

हृदय  में 

घनीभूत आश्वस्ति सा 

टिमटिमाता रहता  है

वही दीप ,

सघन तिमिर में !!


पूस की रैन

जाग जाग कर बीतती है,

जब टीस हृदय की

आस लिए नैन बसती है,

ओस पात पात जमती है ,


नैराश्य से लड़ता है मन ,

आशा का रहता है संचार

जब सघन तिमिर में,

तारों सी निसर्ग पर ,

तब भी रहती है,

उद्दीप्त  मुस्कान,

सघन तिमिर में  !!


संवेदनाएं तरंगित कर देती हैं

अनुकूल भाव हृदय  के ,

पंखों में उड़ान भर ,

पाखी करते हैं 

नव प्रात का स्वागत ...!!!

शनैः शनैः

तिरोहित होता जाता है तमस

भी तब सघन तिमिर में 


अनुपमा त्रिपाठी

"सुकृति "

10 comments:

  1. वही एक दिप है
    जो हमें बिखरने नहीं देता
    हमें गिरने नहीं देता।
    बहुत सुंदर रचना।

    नई पोस्ट 👉🏼 पुलिस के सिपाही से by पाश
    ब्लॉग अच्छा लगे तो फॉलो जरुर करना ताकि आपको नई पोस्ट की जानकारी मिलती रहे.

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  2. वाह, निराशा में आशा का संचार करती सुंदर रचना। बहुत बधाई अनुपमा जी।

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  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०३-0७-२०२१) को
    'सघन तिमिर में' (चर्चा अंक- ४११४)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. अनीता जी सादर धन्यवाद आपका मेरी रचना को चर्चा अंक में सम्मिलित करने हेतु !!

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  4. सघन तिमिर में जब टीम ही तिरोहित हो गया तो फिर उजाला तो होना ही है ।
    सुंदर भावप्रवण रचना

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  5. सुन्दर रचना

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  6. सघन तिमिर में उतरा अस्तित्व एक नया सा होकर निकलता है। सुन्दर पंक्तियाँ।

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  7. आशा के उच्चतम भावों को जगाती सुंदर रचना।

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  8. बहुत सुंदर गहरा भाव समेटे हुए खूबसूरत रचना

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  9. पंखों में उड़ान भर ,
    पाखी करते हैं
    नव प्रात का स्वागत ...!!!
    शनैः शनैः
    तिरोहित होता जाता है तमस
    भी तब सघन तिमिर में
    अत्यंत सुन्दर भावपूर्ण सृजन ।

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