नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

02 February, 2011

क्या नाता जोडूं जीवन से ...!!!!

जीवन जाग रहा सदियों से -
मेरे सपनो में नींद भरी है -
जीवन भाग रहा है सरपट -
मेरी चाल अभी धीमी है -


बिंदु सी आकृती है मेरी -
विराट भुवन सा कलाकृत जीवन -
चलते चलते रुक जाता मन -
रुक रुक कर चलता है ऐसे -


सघन सोच में डूबी व्याकुल -
नित ही पूछूं अपने मन से -
क्या नाता जोडूं  जीवन से-
क्या नाता जोडूं जीवन से  ....?


स्निग्ध श्वेत झीनी चुनरिया -
जीवन के रंग रंगे बसंती -
स्वरित शांत रहने का मन है -
जीवन की बातें चटकीली-


स्वप्निल सी अनुभूति मेरी -
कटु सत्य जीवन हो जैसे -
मैं सपना तो सच है जीवन -
चलूँ भी तो संग-संग  कैसे....?


सघन सोच में डूबी व्याकुल -
नित ही पूछूँ अपने मन से-
क्या नाता जोडूं  जीवन से-
क्या नाता जोडूं  जीवन से ....!!!!-


-

29 comments:

  1. स्वप्निल सी अनुभूति मेरी -
    कटु सत्य जीवन हो जैसे -
    मैं सपना तो सच है जीवन -
    चलूँ भी तो संग कैसे -


    कविता का प्रत्येक शब्द जीवन से जुड़ा है ...पूरी कविता जीवन दर्शन का बोध करवाती है और हमें वास्तविकता से जोडती है ...आपका आभार अनुप्रिया जी

    ReplyDelete
  2. जीवन के रंग ऊबड़ खाबड़ हैं पर पकड़ के बैठे रहिये।

    ReplyDelete
  3. जीवन से संवाद स्थापित करने का प्रयास करती कविता !

    ReplyDelete
  4. जीवन की विडम्बनाओं से उपजा काव्य सत्य -कथ्य -बहुत अच्छी लगी यह काव्याभिव्यक्ति !

    ReplyDelete
  5. jeevan ke sare rang se parichay karati ek pyari rachna...:)
    abhar!!

    ReplyDelete
  6. स्वप्निल सी अनुभूति मेरी -
    कटु सत्य जीवन हो जैसे -
    मैं सपना तो सच है जीवन -
    चलूँ भी तो संग-संग कैसे....?
    ek khaas gahre khyaalon ka sundar varnan

    ReplyDelete
  7. कर्त्तव्य और महत्वाकंषाओं के बीच झूलता मन -
    जीवन से नाता कैसे जोड़ा जाये -
    क्या किया जाये क्या छोड़ा जाये ....!!
    मेरी रचना पढ़ने और पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

    ReplyDelete
  8. कविता का भाव और लयात्मकता प्रशंसा के काबिल है.
    very good.

    ReplyDelete
  9. जीवन जाग रहा सदियों से -
    मेरे सपनो में नींद भरी है -
    जीवन भाग रहा है सरपट -
    मेरी रफ़्तार अभी धीमी है -

    बहुत मर्मस्पर्शी भाव..गहन जीवन दर्शन का बोध कराती, बहुत सुन्दर प्रवाहमयी प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  10. गहन जीवन दर्शन से ओत प्रोत सरल अभिव्यक्ति.
    बहुत ही बढ़िया .
    शुभ कामनाएं

    ReplyDelete
  11. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार ०५.०२.२०११ को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    ReplyDelete
  12. अनुपमा जी बहुत सुन्दर कविता है ! मन की उहापोह के साथ जीवन से जुड़ने की यह ललक मन को बहुत भाई ! बधाई एवं शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  13. सघन सोच में डूबी व्याकुल -
    नित ही पूछूँ अपने मन से-
    क्या नाता जोडूं जीवन से-
    क्या नाता जोडूं जीवन से ....!!!!-

    जीवन के विविधरंगों से सजी-सँवरी
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

    ReplyDelete
  14. जीवन से तो नाता हरदम ही जुड़ा रहता है दोस्त इधर तोड़ो तो दूसरी तरफ जुड़ जाता है इससे भागना बहुत कठिन है इसलिए ख़ुशी - ख़ुशी गुजार दो इसे ! तो जिंदगी आसन जरुर होती जाएगी !

    भावपूर्ण रचना !

    ReplyDelete
  15. सघन सोच में डूबी व्याकुल -
    नित ही पूछूँ अपने मन से-
    क्या नाता जोडूं जीवन से-.....

    जीवन दर्शन से परिपूर्ण है आपकी कविता किन्तु पलायन की सोच से बच कर रहिए. कविता की शैली बहुत सुंदर है। बधाई।

    ReplyDelete
  16. बहुत ही बढ़िया.

    सादर

    ReplyDelete
  17. नाता तो जुड़ा ही होता है ...और इसे जीना ही जीवन है ..सुन्दर भावाभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  18. स्वप्निल सी अनुभूति मेरी
    कटु सत्य जीवन हो जैसे
    मैं सपना तो सच है जीवन
    चलूँ भी तो संग-संग कैसे।

    यही तो जीवन के रंग हैं, कभी सपना ,कभी हकीकत।
    बहुत सुंदर काव्य अभ्व्यिक्ति।

    ReplyDelete
  19. स्वप्निल सी अनुभूति मेरी -
    कटु सत्य जीवन हो जैसे -
    मैं सपना तो सच है जीवन -
    चलूँ भी तो संग-संग कैसे...

    अपने आप से कुछ यथार्थ भरे प्रश्न करती रचना ... धाराप्रवाह लय में बहती हुई अभिव्यक्ति ...

    ReplyDelete
  20. स्वप्निल सी अनुभूति मेरी -
    कटु सत्य जीवन हो जैसे -
    मैं सपना तो सच है जीवन -
    चलूँ भी तो संग कैसे -
    अतिसुन्दर भावाव्यक्ति , बधाई की पात्र है

    ReplyDelete
  21. जीवन जाग रहा सदियों से -
    मेरे सपनो में नींद भरी है -
    जीवन भाग रहा है सरपट -
    मेरी रफ़्तार अभी धीमी है -

    जीवन के दर्शन पर आधारित सुंदर कविता जिसमे भाव और ताल का सुंदर तालमेल है. बधाई.

    ReplyDelete
  22. हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' -दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
    प्रिय हिंदी ब्लॉगर बंधुओं ,
    आप को सूचित करते हुवे हर्ष हो रहा है क़ि आगामी शैक्षणिक वर्ष २०११-२०१२ के जनवरी माह में २०-२१ जनवरी (शुक्रवार -शनिवार ) को ''हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' इस विषय पर दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इस संगोष्ठी को संपोषित किया जा सके इस सन्दर्भ में औपचारिकतायें पूरी की जा रही हैं. के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी ली गयी है. महाविद्यालय के प्रबन्धन समिति ने संभावित संगोष्ठी के पूरे खर्च को उठाने की जिम्मेदारी ली है. यदि किसी कारणवश कतिपय संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई तो भी यह आयोजन महाविद्यालय अपने खर्च पर करेगा.

    संगोष्ठी की तारीख भी निश्चित हो गई है (२०-२१ जनवरी २०१२ ) संगोष्ठी में अभी पूरे साल भर का समय है ,लेकिन आप लोगों को अभी से सूचित करने के पीछे मेरा उद्देश्य यह है क़ि मैं संगोष्ठी के लिए आप लोगों से कुछ आलेख मंगा सकूं.
    दरअसल संगोष्ठी के दिन उदघाटन समारोह में हिंदी ब्लागगिंग पर एक पुस्तक के लोकार्पण क़ी योजना भी है. आप लोगों द्वारा भेजे गए आलेखों को ही पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जायेगा . आप सभी से अनुरोध है क़ि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा करें .
    आप सभी के सहयोग क़ी आवश्यकता है . अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें


    डॉ. मनीष कुमार मिश्रा
    के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय
    गांधारी विलेज , पडघा रोड
    कल्याण -पश्चिम
    pin.421301
    महाराष्ट्र
    mo-09324790726
    manishmuntazir@gmail.com
    http://www.onlinehindijournal.blogspot.com/ http://kmagrawalcollege.org/

    ReplyDelete
  23. jeewan ki vividhtao me hi to jiwan hai jise aapne khoobsurti se likha hai. badhayi.

    ReplyDelete
  24. स्निग्ध श्वेत झीनी चुनरिया -
    जीवन के रंग रंगे बसंती -
    स्वरित शांत रहने का मन है -
    जीवन की बातें चटकीली-.......

    बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई।

    ReplyDelete
  25. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
    चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
    या URL और ब्लाग का नाम कमेट में पोस्ट करें ।
    http://blogworld-rajeev.blogspot.com
    SEARCHOFTRUTH-RAJEEV.blogspot.com

    ReplyDelete
  26. क्या नाता जोडूं जीवन से-
    बहुत सुंदर रचना ............बसंत पंचमी की शुभकामनाये

    ReplyDelete
  27. बेहद सारगर्भित और खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!
    सादर,
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  28. मेरी कविता पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .जीवन की विविधताओं के बीच ही हम एक एक पल जीते चले जाते हैं.
    इसी तरह ये खूबसूरत सफ़र चलता रहता है .

    ReplyDelete
  29. जीवन जाग रहा सदियों से -
    मेरे सपनो में नींद भरी है -
    जीवन भाग रहा है सरपट -
    मेरी रफ़्तार अभी धीमी है -
    --
    आखिरी लाइन को अगर

    "मेरी चाल अभी धीमी है"

    कर देंगी
    तो प्रवाह अच्छा हो जाएगा!

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!