नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

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02 March, 2011

हम -तुम साथ जलें ,

मोम सा ह्रदय लिए ,
कुछ तुम जलो ,
कुछ मैं जलूँ,
अब  बुझ गए
सारे दिए .....

जगमगाती रोशनी
 के बीच --
कुंठा से-
घिर गया है मन - 
तुम साथ जलो मेरे ,
ये  तम-
कुछ तो हो कम .

वेदना बन जाए फिर 
संवेदना ...!!
सम्मिलित हो गान 
भी गाएं कोई -


तुम सदा हो-
सत्य का -
और ज्ञान का-
अद्भुत प्रकाश -
मैं तुम्हारी 
आस की वो लौ हूँ -
निसदिन टिमटिमाती .


मोम सा ह्रदय लिए -
कुछ तुम जलो 
कुछ मैं जलूं -
हाँ -  तुम्हारा साथ पाकर -
जल उठे मन के दिए ...........!!!!

",Thousands of candles can be lit from a single candle, and the life of the candle will not be shortened. Happiness never decreases by being shared. None of the Candle loses its Light while Lighting another Candle. So never stop sharing and helping others. Because its makes your Life more meaningful.""

33 comments:

  1. तुम सदा हो-
    सत्य का और -
    ज्ञान का अद्भुत प्रकाश -
    मैं तुम्हारी आस की वो
    लौ हूँ निसदिन टिमटिमाती .
    samarpan ka anokha ehsaas

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  2. aur prem ke parkash se sari dunia khil uthe
    bahut achchhi kavita likhi hai aapne
    badhai

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  3. प्रेम का प्रकाश बिखरती रचना बहुत अच्छी लगी।

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  4. यह जो उपजा तम,
    निश्चय होगा कम।

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  5. तुम्हारा साथ पाकर जल उठे फिर दिए ...
    सुन्दर !

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  6. सुन्दर रचना!
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  7. मोम सा ह्रदय लिए -
    कुछ तुम जलो
    कुछ मैं जलूं -
    wah....pyar ka kitna sundar roop hai yah.....

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  8. सुंदर कविता अनुपमाजी बधाई |

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  9. पढ़कर मन को शांति मिली | साथ का भाव बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति लिए हुए |

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  10. समर्पण का अनोखा एहसास| धन्यवाद|

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  11. मोम सा ह्रदय लिए -
    कुछ तुम जलो
    कुछ मैं जलूं
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति , बधाई

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  12. अतिशय आलोकपूर्ण मोहक प्रतीक और अनुभूति की अभिव्यक्ति..

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  13. मन की श्रेष्ठ अभिलाषाओं का काव्यात्मक चित्रण बहुत अच्छा लगा।

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  14. बहुत सुन्दर ....खूबसूरत भावों को समेटा है .

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  15. मोम सा ह्रदय लिए ,
    कुछ तुम जलो ,
    कुछ मैं जलूँ,
    अब बुझ गए सारे दिए .
    बहुत सुन्दर. बधाई.

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  16. मोम सा ह्रदय लिए -
    कुछ तुम जलो
    कुछ मैं जलूं -
    हाँ - तुम्हारा साथ पाकर -
    जल उठे मन के दिए

    beautiful expression in a very few lines. GOOD.

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  17. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 08-03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  18. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति ! मन का कोना कोना आलोकित हो गया ! बहुत सुन्दर ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  19. संगीता जी -मेरी इस कृति को चर्चा मंच पर लेने के लिए धन्यवाद |आज महिला दिवस के अवसर पर सभी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं |महिलाओं को अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिए और पुरुषों को उनका सहयोग करने के लिए |
    हम-तुम साथ जलें --इस रचना के माध्यम से मैं यही कहना चाहती हूँ कि नारी एक सम्पूर्णता का एहसास पुरुष को दिलाती है और उसी में सम्पूर्णता पाती है |यही उसका कर्त्तव्य भी है |वो ऐसी धूरी है जिसके चारों तरफ उसका परिवार,समाज,राष्ट्र ,और फिर पूरा विश्व ही घूमता है | प्रेम का प्रकाश फैलाना उसका प्रथम कर्त्तव्य है और इसकी शुरुआत अपने परिवार से ही होती है |
    संगीता जी मैं आपकी ह्रदय से आभारी हूँ आपने आज के दिन मेरी इस कविता को चर्चा मंच के लिए चुना |

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  20. मोम सा ह्रदय लिए ,
    कुछ तुम जलो ,
    कुछ मैं जलूँ,
    अब बुझ गए सारे दिए .

    बेहद खूबसूरत प्रस्तुति।

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  21. मोम सा ह्रदय लिए -
    कुछ तुम जलो
    कुछ मैं जलूं -
    हाँ - तुम्हारा साथ पाकर -
    जल उठे मन के दिए ...

    प्रेम हो समर्पण हो तो ऐसा जरूर होता है .... बहुत नर्म भावों से सजी रचना ...

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  22. मोम सा ह्रदय लिए -
    कुछ तुम जलो
    कुछ मैं जलूं -
    हाँ - तुम्हारा साथ पाकर -
    जल उठे मन के दिए ...........!!!!

    बहुत सुन्दर..

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  23. महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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  24. aisa khoobsurat sath ho jaroor diye jal uthenge ji. sunder rachna.

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  25. "वेदना बन जाए फिर सम्वेदना ===भी गए कोई "
    भाव पूर्ण पोस्ट |बधाई
    आशा

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  26. उम्दा रचना.
    सलाम

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  27. अच्छी आशा ...साथ देने की आस भी काफी कुछ शक्ति बापस ले आती है और संग मिल जाए तो रास्ते बहुत आसान हो जाते हैं !!

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  28. कुछ तुम जलो कुछ मै जलूँ--- हाँ अगर ऐसा हो जाये तो जीवन स्वर्ग बन जाये। सुन्दर एहसास
    अच्छी रचना के लिये बधाई।

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  29. आप सभी ने मेरा ये प्रयास पसंद किया मैं ह्रदय से आभारी हूँ .आपके आशीर्वचन से सदा मन प्रसन्न रहता है |कृपा बनाये रखियेगा |

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  30. Sundar shabdon men ek alag sa bhav jagati rachana..

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