नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

15 August, 2011

रे मन मोरे ...!!

रे मन मोरे .....!!
अवगुण त्याग 
रे त्याग ...!!
अवगुण त्याग
रे त्याग .......!!

गुन गुन..
गुनी संग-संग ...
गुन ले गुन ही -
गुनी-ज्ञानी संग ....
भर ले जीवन में ...
अति उमंग ..!!

सुन-सुन..
भोर की बेला सुहानी- 
राग तोड़ी 
कहे कहानी ..!!
गावत तोड़ी 
राग..संग -
सुर  तरंग ....
मन  मृदंग ....!!

रे मन ...
दानी बन ...
प्रेम कर ..
बस प्रेम ही दे ...
मत कृपण बन ...
उठ जाग समय अब..
महादानी बन ...!!
ज्ञानी बन..
महाज्ञानी बन...!!
बाँट ले रे ज्ञान अपना..
क्षण में बीतेगा ये सपना ..!!

नहीं छीन झपट..
अब मत कपट कर.
छोड़ दे ..अभिमान अपना ....!!

रे  मन ..
Painting by Pragya Singh.
मत अभिमानी बन ...!!
खिले कुसुम से 
सीख ले रे..
तनिक खिलना ....
बीच  काँटों से ..
घिरे भी मुस्कुराना... 
जीवन अनुराग-रंग भरना ...!!

फैला कर ..
लहराता आँचल ....
मांग ले प्रभु सों..
वो प्रीती ...!!
ओ हठी मन ..
छांड दे अब ... ..
छांड दे मन ...
द्वेष राग सी..
जो कुरीति .....!!
जब-जब 
त्यागे अवगुण ...
नित -नित 
गुन ले सतगुन ..
भोगे निर्गुण .....!!
तब तब -
मन पाए 
प्रसाद ही प्रसाद ..!!
अद्भुत उन्माद ....!!
उन्मुक्त आल्हाद ...!!
मिल जाये..
जग  से - 
चिर विराग ......!!
पा जाये ..
श्वेत  कमल .
स्वयं से अनुराग ......!!

रे मन  मोरे ...
अवगुण त्याग रे त्याग ......!!
अवगुण त्याग रे त्याग ..........!!!!!
 राग तोड़ी -भोर का ..सुबह के प्रथम प्रहर का...प्रातः चार से सात बजे के बीच गए जाने वाला  राग है |
भोगे निर्गुण-यहाँ निर्गुण का अभिप्राय खुदी  में ही खुदा   ढूँढने से है ...!!

The system of Nirgun Bhakti believes in the worship of an unseen God, who cannot be confined in the realms of a physical form. This form of worship strongly detests the belief that God abides in the heaven above, it rather sees God as an inner guiding force residing inside the body of a devotee.   A prominent preacher of Nirgun Bhakti was Saint Kabir, one of the pioneers of the Bhakti movement. 


आज स्वतंत्रता दिवस पर-
 आपभी को शुभकामनायें |
सभी बुराइयों से आपका मन 
स्वतंत्र हो ऐसी कामना करती हूँ |

45 comments:

  1. बहुत सुंदर गीत ....सार्थक विचार लिए आपकी पूर्ण हो यही दुआ है.....हार्दिक शुभकामनायें ...

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    स्वतन्त्रता की 65वीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर रचना , खूबसूरत प्रस्तुति .
    स्वतन्त्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ

    ReplyDelete
  4. रे मन ...
    दानी बन ...
    प्रेम कर ..
    बस प्रेम ही दे ...
    मत कृपण बन ...
    उठ जाग समय अब..
    महादानी बन ...!!

    मन को समझना बहुत मुश्किल है ..यह कभी उदार बन जाता है तो कभी अति कृपण बस इसकी अपनी मर्जी है ....इस पर किसी का कोई वश नहीं .....बहुत प्रेरक गीत ....!

    ReplyDelete
  5. मन को छु गया... मन से लिखा सुन्दर गीत....

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन!
    स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    HAPPY INDEPENDENCE DAY!

    ReplyDelete
  7. रे मन ...
    दानी बन ...
    प्रेम कर ..
    बस प्रेम ही दे ...
    मत कृपण बन ...
    उठ जाग समय अब..
    महादानी बन ...!!
    ज्ञानी बन..
    महाज्ञानी बन...!!
    बाँट ले रे ज्ञान अपना..
    क्षण में बीतेगा ये सपना ..!!.. waah
    sachchi swatantrata ka raag

    ReplyDelete
  8. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  9. स्वतन्त्रता दिवस की शुभ कामनाएँ।

    कल 16/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  10. सुर तरंग,
    मन मृदंग।

    अहा।

    ReplyDelete
  11. bahut nirmal vicharo se ot-prot. man ko adhyatam ki or le jati sunder prastuti.

    ReplyDelete
  12. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  13. स्वतंत्रता दिवस की शुभकानाएं

    इस अनुपम गीत के लिए बधाई स्वीकारें

    नीरज

    ReplyDelete
  14. सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ भावपूर्ण कविता लिखा है आपने! शानदार प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    ReplyDelete
  15. गीत पढ़कर मन हर्षित हुआ . स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें .

    ReplyDelete
  16. सुंदर प्रेरक प्रस्तुति. आभार. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
    सादर,
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  17. बहुत सुन्दर...स्वतन्त्रता की 65वीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  18. सुन्दर गीत रचा अपने... राग तोडी के सम्बन्ध में बढ़िया जानकारी....
    राष्ट्र पर्व की सादर बधाईयाँ....

    ReplyDelete
  19. prerak rachna .स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  20. स्वतंत्रता दिवस की आपको भी शुभकामनाएँ.....

    गुन गुन..
    गुनी संग-संग ...गुन ले गुन ही -
    गुनी-ज्ञानी संग ....
    भर ले जीवन में ...अति उमंग ..!!

    बहुत ही सुंदर कविता है...इन पंक्तियों को पढ़कर हमको बहुत गर्व महसूस हो रहा है की आप हमारी मित्र हैं .....

    खिले कुसुम से
    सीख ले रे..
    तनिक खिलना ....
    बीच काँटों से ..घिरे भी मुस्कुराना... जीवन अनुराग-रंग भरना ...!!

    बहुत ही सुंदर चित्रण किया है इस पेंटिंग का आपने ....यही जिंदगी है ....अति सुंदर !!!

    ReplyDelete
  21. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  22. bahut badiyaa geet yatahra batataa hua saarthak abhibyakti.badhaai aapko.aapko bhi happy independence day.
    mere blog main aajkal aap nahi aa rahi hain .aaiye aur apne comments dijiye.

    ReplyDelete
  23. मन को सार्थक सीख देती सुन्दर रचना ..

    ReplyDelete
  24. सुंदर अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  25. सुन सुन .. भोर कीबेला सुहानी राग तोड़ी
    कहे कहानी ....गावत तोड़ी
    राग संग
    सुर्तरंग...मन मृदंग
    स्वतंत्रता दिवस पैर एक बहुत सुन्दर ओर सार्थक अभिवक्ती............

    ReplyDelete
  26. बहुत सुन्दर प्रस्तुति! हार्दिक शुभकामनायें ...

    ReplyDelete
  27. जब त्यागे अवगुण ...नित -नित गुन ले सतगुन ..भोगे निर्गुण .....!!तब तब -मन पाए प्रसाद ही प्रसाद ..!!अद्भुत उन्माद ....!!उन्मुक्त आल्हाद ...!!मिल जाये..
    जग से - चिर विराग ......!!

    वाह ! सुर और भाव का अनोखा संगम है आपकी इस रचना में... आपको भी बहुत-बहुत बधाई!

    ReplyDelete
  28. बहुत सुंदर गीत ,अच्छा लगा......

    ReplyDelete
  29. सत्य, शील, और सदाचार को अपनाने से ही सबका कल्याण होगा.
    आपको भी स्वतंत्रता दिवस की (विलंबित) शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
  30. bahut khubsurat adhyatmik ,spiritual
    just like meditation...
    words therapy

    ReplyDelete
  31. रे मन ...आपको पढ़कर आपकी तुलना कबीर- मीरा आदि से किये बगैर नहीं रहती. आज के युग में जो दुर्लभ है.

    ReplyDelete
  32. गीत पढ़कर मन हर्षित हुआ..बहुत सुंदर गीत ...

    ReplyDelete
  33. बहुत भावपूर्ण रचना |बधाई
    आशा

    ReplyDelete
  34. मन पाए
    प्रसाद ही प्रसाद ..!!
    अद्भुत उन्माद ....!!
    उन्मुक्त आल्हाद ...!!
    मिल जाये..
    जग से -
    चिर विराग ......!!
    पा जाये ..
    स्वयं से अनुराग ......!!
    श्रेष्ठता लिए रचना शीलता को उपकृत करती हुयी ,आपकी अभिव्यक्ति प्रेरणा की वेगमान वायु सद्र्श प्रतीत हो रही है ..... . प्रशंसनीय सृजन , ....शुभ कामनाएं /

    ReplyDelete
  35. बहुत सुन्दर सरल और गहरी समझ देती रचना.

    ReplyDelete
  36. नमस्कार....
    बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
    मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
    आपका ब्लागर मित्र
    नीलकमल वैष्णव "अनिश"

    इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

    1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

    2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

    3- http://neelkamal5545.blogspot.com

    ReplyDelete
  37. सुन्दर गीत .... रॉक तोड़ी का स्पर्श लिए ...
    अनुपम ... स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं ...

    ReplyDelete
  38. आप के निर्मल निष्कपट भक्तिमय हृदय
    के उद्गार वैराग्य और भक्ति का अदभुत
    संचार कर रहे हैं.मन को शान्ति का अनुपम
    अनुभव हो रहा है
    .
    आपकी मेल का मैं बहुत बहुत
    आभारी हूँ,जिसमे दी गई लिंक से मुझे
    इस सुन्दर पोस्ट पर आने का
    अवसर प्राप्त हुआ.

    इस सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हृदय से
    आभारी हूँ.

    ReplyDelete
  39. भक्ति से ओतप्रोत रचना . देरी हुई पर आपको भी स्वतंत्रता दिवस की बधाई . संगीत और प्रकृति से भरी होती हैं आपकी रचनाएं . जब आयें तरोताजा लगती हैं और मन को स्फूर्त कर देती हैं .

    ReplyDelete
  40. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    ReplyDelete
  41. prem , daan, aur gyan ka adbhut

    samanvya......samaj ko disha aur

    sandesh deti madhur kavita ke lie

    anupamaji bahut2 badhai.

    ReplyDelete
  42. आप सभी का बहुत बहुत आभार ....मेरे भाव समझने के लिए ...!!

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!