नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

26 February, 2013

क्या यही बसंत है ...?

Knowledge Sheet: Simple or Complex?

Life is utterly simple and yet most complex. You have to simultaneously attend to both facets of life. When life appears most complex, turn to the simplicity. Simplicity brings peace. When you are peaceful, attend to the complexity within you. That will make you more skill full. If you are only with simplicity, it makes you lazy and dull. Being only with complexity makes you angry and frustrated. The intelligent ones balance them and rejoice in both. If you look only to simplicity, growth is not there. Looking only at the complexity, there is no life at all. All that you need is a skill full balance. If you recognize both simplicity and complexity of life, you will be skilfully peaceful! Colors are the complexity of life. White is the simplicity. When your heart is pure, your life becomes so colorful.

Vikram: Guruji, you are all white and yet so colorful.

Pramila: Like our knowledge, which is so profound and yet so simple!




ऊपर श्री श्री रविशंकर जी का प्रवचन है ...!!उसी से प्रेरणा पाती ....उसी पर आधारित ये कविता है ...

क्या यही बसंत है ...??


रक्त गुलाब सी ....
काँटों के बीच भी ...
अनुरक्त तुम्हारे प्रेम में मैं ...

तुममें सब रंग भरे ....
श्वेत से सब रंग समेटे अपने आप में ....
लुटाते सुरभि  इस संसार  में.......
सुरभिमय ...बेला (मोगरे ) से ...
महको भीतर मेरे भी ....

जीवन बसंत बनाते ....
शब्दों में  भाव भर   देते .....
भावों में शब्द भर देते ...
जैसे रूप तुम्हारा ...
हरख हरख ...अलख अब लिखूँ ...

अकथ सुकथ सा अब कुछ कहूँ ...
मेरा पथ सुपथ बनाते ...
प्रभु मेरे .....
क्या यही बसंत है ...?

35 comments:

  1. असीम आनंद भाव भरती रचना ...

    ReplyDelete
  2. बहुत ही गहरी बात और उसका उतना ही प्रभावी चित्रण

    ReplyDelete
  3. अकथ सुकथ सा अब कुछ कहूँ ...
    मेरा पथ सुपथ बनाते ...
    प्रभु मेरे .....
    क्या यही बसंत है ...?लाजबाब सुंदर भावअभिव्यक्ति,,,,

    Recent Post: कुछ तरस खाइये

    ReplyDelete
  4. आभार आदरेया |
    शुभकामनायें -

    ReplyDelete
  5. जीवन बसंत बनाते ....
    शब्दों में भाव भर देते .....
    भावों में शब्द भर देते ...
    जैसे रूप तुम्हारा ...
    हरख हरख ...अलख अब लिखूँ ...

    अकथ सुकथ सा अब कुछ कहूँ ...
    मेरा पथ सुपथ बनाते ...
    प्रभु मेरे .....
    क्या यही बसंत है ...?
    अनुपमा जी बिलकुल आपके नाम की तरह :) अनुपम भाव संयोजन ....:)

    ReplyDelete
  6. अकथ सुकथ सा अब कुछ कहूँ ...
    मेरा पथ सुपथ बनाते ...
    प्रभु मेरे .....
    क्या यही बसंत है ...?
    उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति ... आभार

    ReplyDelete
  7. श्वेत से सब रंग समेटे अपने आप में ....
    लुटाते सुरभि इस संसार में.......
    सुरभिमय ...बेला (मोगरे ) से ...
    महको भीतर मेरे भी ....

    यही भीतर से महकना वसंत है ।

    ReplyDelete
  8. अनुपम और अद्भुत आनद का संगम बहुत सुन्दर .बधाई

    ReplyDelete
  9. उत्कृष्ट प्रस्तुति हर माने में .

    ReplyDelete
  10. सच में यही वसंत है...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  11. गहरे उतरता शाब्दिक चित्रण..... भावों के तो कहने ही क्या ...

    ReplyDelete
  12. Pallavi ne sau baat ki ek baat kahi...:)
    अनुपमा जी बिलकुल आपके नाम की तरह :) अनुपम भाव संयोजन ....:)

    ReplyDelete
  13. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति ...

    आप भी पधारें
    ये रिश्ते ...

    ReplyDelete
  14. दिव्यता की अनुभूति कराती रचना
    अनुपमा ,बहुत ही सार्थक संयोजन
    साभार!!!!!!!!!!!

    ReplyDelete
  15. तुममें सब रंग भरे ....
    श्वेत से सब रंग समेटे अपने आप में ....
    लुटाते सुरभि इस संसार में.......
    सुरभिमय ...बेला (मोगरे ) से ...
    महको भीतर मेरे भी ....बहुत सुन्दर
    new postक्षणिकाएँ

    ReplyDelete
  16. वाह बहुत ही सुन्दर रचना है अनुपमा जी ..

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार रंजू जी ।
      मेरे ब्लॉग पर आपका हृदय से स्वागत है ....!!

      Delete
  17. अकथ सुकथ सा अब कुछ कहूँ ...
    मेरा पथ सुपथ बनाते ...
    प्रभु मेरे .....
    क्या यही बसंत है ...?

    bilkul yahi basant hai

    ReplyDelete
  18. साँस-साँस में चन्दन-सा उतरता हुआ..

    ReplyDelete
  19. प्रभु की झलक हो जहाँ वही बसंत है

    ReplyDelete
  20. श्री श्री रविशंकर जी के सारपूर्ण प्रवचन का आपने सारा तत्व अपनी रचना में उतार दिया है अनुपमा जी ! संसार के सत्य, शिव और सुन्दर के दिग्दर्शन कराती अनुपम रचना ! बहुत सुन्दर !

    ReplyDelete
  21. बसंत तो मन की एक स्तिथि है ...जब मन शांत, तृप्त और खुश हो ...तो वसंत ही वसंत है ...गहरा प्रभाव छोड़ती रचना ..सुन्दर... अनुपम ..!!!

    ReplyDelete
  22. असल बसंत तो वही है जो असल प्रेम को हमेशा बसंत बनाए रक्खे ... जो उस परम परमात्मा में व्याप्त है ...

    ReplyDelete
  23. उम्दा प्रस्तुति ।

    ReplyDelete
  24. A very thought provoking and inspiring poem. We need to have a balance in us.

    ReplyDelete
  25. बढ़िया ,,,, सुन्दर रचना !

    ReplyDelete
  26. बहुत सुंदर रचना
    कम ही ऐसी रचनाएं पढने को मिलती हैं।


    नोट:
    अगर आपको रेल बजट की बारीकियां समझनी है तो देखिए "आधा सच" पर लिंक...
    http://aadhasachonline.blogspot.in/2013/02/blog-post_27.html#comment-form

    बजट पर मीडिया का रोल जानने के लिए आप " TV स्टेशन" पर जा सकते हैं।
    http://tvstationlive.blogspot.in/2013/03/blog-post.html?showComment=1362207783000#c4364687746505473216


    ReplyDelete
  27. प्रेम पर बसंत की अनुकम्पा सदैव रहे. सुंदर भावाभिव्यक्ति.

    ReplyDelete
  28. सभी गुणी पाठकों का हृदय से आभार .....!!

    ReplyDelete
  29. गहन भाव लिए सुंदर रचना ....

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!