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19 May, 2011

प्रेम मगन मन ...!!

इंद्र धनुष के संग .. 
भले ही दिखते 
सातों रंग ..
प्रेम  है  ..
सूरदास की 
कारी कमरिया ..
चढ़े न दूजो रंग .... 

मन रंग रंगा है
जीवन ऐसा ..
एक ही सुर में ..
पंचम सुर में ..
पिहू पिहू बोले ..
कोयल जैसा ....!!

अरी कोयल ..
तू भी तो कारी है ..!!!
अच्छा तब ही मतवारी है ...!!
प्रेम के रस में डूबी -डूबी ... 
 श्रुति  ..सरस मन भीगी -भीगी ....!! 
                      
मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में ..
एक जनम ही थे वो संग में ..!!
तू है कैसी प्रेम मगन री ...!!
जनम जनम से कैसी प्यासी ...
हर बसंत में दीवानी सी ..
धुन में अपनी पिहू-पिहू गाती ...
सदियों  सदियों .. उम्र गुज़ारी ...!!!!!

My fascination for KOEL  contiuues ....the perseverance ....the dedication ....the bhakti ..koel has for -PANCHAM  SUR ...!!!!!!

  

26 comments:

  1. मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में ..
    एक जनम ही थे वो संग में ..!!
    तू है कैसी प्रेम मगन री ...!!
    जनम जनम से कैसी प्यासी ...

    बहुत सुंदर..

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  2. बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

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  3. कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

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  4. मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में ..
    एक जनम ही थे वो संग में ..!!
    तू है कैसी प्रेम मगन री ...!!
    जनम जनम से कैसी प्यासी ...
    हर बसंत में दीवानी सी ..
    धुन में अपनी पिहू-पिहू गाती ...
    सदियों सदियों .. उम्र गुज़ारी ...!!!!!
    bahut hi badhiyaa

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  5. प्रेम का रंग जिसे एक बार लग जाये दूजा नहीं चढ़ता, बहुत सुंदर चित्र से सजी प्यारी कविता !

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  6. मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में ..
    एक जनम ही थे वो संग में ..!!
    तू है कैसी प्रेम मगन री ...!!
    जनम जनम से कैसी प्यासी ..

    बहुत बढ़िया बभिव्यक्ति.

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  7. अरी कोयल ..
    तू भी तो कारी है ..!!!
    अच्छा तब ही मतवारी है ...!!
    प्रेम के रस में डूबी -डूबी ...
    श्रुति ..सरस मन भीगी -भीगी ....!!

    पूरी कविता के साथ ही इन पंक्तियों ने मन मोह लिया.

    सादर

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  8. मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में ..
    एक जनम ही थे वो संग में ..!!
    तू है कैसी प्रेम मगन री ...!!
    जनम जनम से कैसी प्यासी ...
    हर बसंत में दीवानी सी ..
    धुन में अपनी पिहू-पिहू गाती ...
    सदियों सदियों .. उम्र गुज़ारी ...!!!!!

    वाह वाह ………क्या अवलोकन है।

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  9. मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में ..एक जनम ही थे वो संग में ..!!तू है कैसी प्रेम मगन री ...!!
    जनम जनम से कैसी प्यासी ...
    हर बसंत में दीवानी सी ..धुन में अपनी पिहू-पिहू गाती ...सदियों सदियों .. उम्र गुज़ारी ...!!hamesha ki tarah bahut hi pyaari premrang main dubi rachanaa.shabdon ka chyan bemisaal.badhaai aapko.

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  10. अरी कोयल ..
    तू भी तो कारी है ..!!!
    अच्छा तब ही मतवारी है ...!!
    प्रेम के रस में डूबी -डूबी ...
    श्रुति ..सरस मन भीगी -भीगी ....!!

    ...भक्ति और प्रेम के रस में डूबी बेहतरीन रचना..अपने साथ किसी और ही लोक में ले जाती है..बहुत सुन्दर

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  11. बहुत बढ़िया बभिव्यक्ति.
    मन मोह लिया

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  12. एक नई शैली में सुंद्र रचना जो मन को छू गई।

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  13. मीरा के सुर में कृष्ण गान और कोयल की पिहू पिहू में प्रियतम पुकार, सब कुछ अह्वलादित कर गया .

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  14. इन्द्रधनुष मैं व्याप्त हैं सातो रंग, प्रेम का न रंग कोई !!!
    सिर्फ अहसाह है जो रूह से महसूस किया जा सकता है !!!!
    तभी तो मीरा श्याम-रंग मैं डूब गयी !!
    कोयलिया पीहू-पीहू के राग मैं सदियों से डूबी है !!!!
    मीरा और कोयलिया दोनो ही कितने निश्चल प्रेम का प्रतीक हैं,
    मन को लुभावने वाली अत्यंत सुंदर-मधुर काव्य-रचना, बहुत-बहुत बधाई!!!!!!!!!!

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  15. प्रेम, मीरा, कान्हा, कोयल और कविता। सुन्दर संमिश्रण।

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  16. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (21.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  17. मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में ..
    एक जनम ही थे वो संग में ..!!
    तू है कैसी प्रेम मगन री ...!!
    जनम जनम से कैसी प्यासी ...
    हर बसंत में दीवानी सी ..
    धुन में अपनी पिहू-पिहू गाती ...
    सदियों सदियों .. उम्र गुज़ारी ...!!!!!

    बहुत सुंदर..... मनमोहक पंक्तियाँ लिखी हैं आपने

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  18. गहन अनुभूतियों की सुन्दर अभिव्यक्ति ...
    हार्दिक बधाई...

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  19. मुझे एक गाने का ये मुखड़ा याद आ गया
    कोयल बोली दुनिया डोली
    समझो दिल की बोली
    बहुत सुंदर कविता ...

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  20. वाह...बेहतरीन!

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  21. मीरा डूबी थीं श्याम के रंग में
    एक जनम ही थे वो संग में !
    तू है कैसी प्रेम मगन री !!
    जनम जनम से कैसी प्यासी ।

    प्रेम के भक्ति रंग का सुंदर चित्रण।
    प्रभावशाली कविता के लिए आभार।

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  22. आप सभी का धन्यवाद ...!!
    ऐसा ही स्नेह बना रहेगा ..मुझे उम्मीद है ...!!

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  23. मैं तो सांवरे के रंग रांची !
    प्रेम रस और भक्ति रस से सराबोर बेहद खूबसूरत एवं भावपूर्ण रचना ! मेरी बधाई स्वीकार करें !

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!