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15 September, 2012

रक्तिम गुड़हल .....!!

हमारी संस्कृति का प्रतीक ....शक्ति की पूजा में जिसका बहुत प्रयोग होता है ...!!
उस रक्तिम गुड़हल पर मेरी रचना ...
जीवन पथ  ...
मग सर्प डगर पर ...
ऋतु  का पुनरावर्तन ...
पुनि भोर की आहट हुई ...
श्लथ पथ पर  जागी किसलय अनुभूति ..

नव पर्ण पल्लवित हुए ...
सुपर्ण आये ..
पुष्पित आभ लाये ..
सुविकसित हरीतिमा सुलभा छाई ..

हरित भरित धरा हुई ...
बीता रीता क्षण ...
पुनि पुनि ध्याऊँ ..
गाऊँ स्वस्ति  स्मरण ...
शुभ शकुन  वरन ...
भयो तमस  स्कंदन ..
मन सरिता में स्पंदन ...
अरुणिमा लालिमा लाई ...
माँ स्मृति मन मुस्काई ...
देख देख हुलासाऊँ रक्तिम गुड़हल ...!!

माँ शक्ति द्वार तुझे चढ़ाऊँ ...
मन  मगन  स्वस्ति  गाऊँ ...
माँ ने झट ..पट खोले ...
हिय मूक पुनि बोले ...
कुंजित गुंजित फुलबगिया में ...
आयो ..भर डाल -डाल लद  छायो .....
सुषमाशाली रक्तिम गुड़हल ....

40 comments:

  1. गुडहल के पुष्प देखकर इतनी सुँदर भाव वाली कविता पढ़कर सुबह सुबह ह्रदय प्रफुल्लित हुआ. शब्दों ने कविता में चार चाँद लगा दिया . धनात्मक उर्जा का संचरण उत्साह भर रहा है . अति सुँदर .

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  2. रक्त, शक्ति, दुर्गा और गुड़हल, बड़ा ही अनुपम संयोजन प्रस्तुत किया है।

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  3. बहुत सुन्दर.....
    सुन्दर फूल पर सुन्दर रचना......
    सादर
    अनु

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  4. मन प्रसन्न हो जाता है जैसे इन फूलों से , आपकी कविता भी उतना ही उत्फुल्ल कर रही है !

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  5. gudahal ke phool ki tarah sundar aur aakarshak rachana

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  6. सही कहा आपने अनुपमा जी.. रक्तिम गुड़हल यानी लाल गुड़हल शक्ति का प्रतीक है..बहुत सुन्दर..

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  7. माँ शक्ति द्वार तुझे चढ़ाऊँ ...
    मन मगन स्वस्ति गाऊँ ...
    माँ ने झट ..पट खोले ...
    हिय मूक पुनि बोले ...
    कुंजित गुंजित फुलबगिया में ...
    आयो ..भर डाल -डाल लद छायो .....
    सुषमाशाली रक्तिम गुड़हल ....यह गुडहल का भाग्य और उससे जुड़ा हमारा सौभाग्य

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  8. sundar phulon ke sath sundar rachna ..............meri bagiya me gudhul ke 50 alag alag rang avam prajati ke paudhe hai

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  9. अब काली पुजा के दिन आ रहे हैं ..... शक्ति की पुजा पर समर्पित गुड़हल पर लिखी रचना बहुत सुंदर है ....

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  10. माँ शक्ति द्वार तुझे चढ़ाऊँ ...
    मन मगन स्वस्ति गाऊँ ...
    माँ ने झट ..पट खोले ...
    हिय मूक पुनि बोले ...
    कुंजित गुंजित फुलबगिया में ...
    आयो ..भर डाल -डाल लद छायो .....
    सुषमाशाली रक्तिम गुड़हल ...
    अनुपम भाव ... अनुपम अभिव्‍यक्ति

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  11. सुन्दर...बहुत सुन्दर

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  12. हिन्दी पखवाड़े की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
    --
    बहुत सुन्दर प्रविष्टी!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (16-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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    Replies
    1. बहुत आभार शास्त्री जी !स्नेह एवं आशीर्वाद बनाये रखें .....!!

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  13. भक्तिभाव में डूबी सुंदर पंक्तियाँ...गुड़हल का चित्र भी सुंदर है

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  14. अनुपमा जी आपने रायगढ़ के मुकुटधर पाण्डेय जी की याद दिला दी .
    किंसुक कुसुम देख शाखा पर तुझे फुला आज मेरा मन फुला न समाता है
    इसी तरह की लाइन लिखी है . बहुत बहुत बधाई . आपको पढ़ना सदा अच्छा लगता है .

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  15. Bahut sundar. Reminded me of school days when we used to read hindi literature. Wonderfully written.

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  16. बहुत सुन्दर एवं अलंकृत अर्चना!
    सादर

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  17. रक्तिम गुड़हल के बारे में अच्छा जानकारी मिली। इसके बारे में नही जानता था. कविता के हर शब्द समीचीन प्रतीत हुए । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।

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  18. जितना सुन्दर पुष्प , उतना ही सुन्दर वर्णन |

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  19. जीवन पथ ...
    मग सर्प डगर पर ...
    ऋतू का पुनरावर्तन ..(ऋतु के पुनरा -वर्तन ) ....ये मग क्या है ?ये मारग(मार्ग )तो नहीं ?कृपया बतलाएं ,हमें नहीं है मालूम सिर्फ कयास लगाया है .

    गुडहल अच्छी रचना है (शब्द चयन )नया रूपवाद लिए हैं .बधाई .

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  20. कुछ मात्र गलती कई बार पढ़ने पर भी रह ही जाती है ...ऋतु ठीक कर दिया है ...आभार ...!!
    मग का अर्थ मार्ग से ही है ...ब्रज भाषा में अक्सर कहा जाता है ...श्याम मग रोक रहे ....संगीत में भी इस शब्द का बहुतायत से प्रयोग होता है ...अभी कुछ दिन पहले ही किसी हिंदी कविता में भी पढ़ा था ....!!तब याद रह गया
    बहुत आभार...!!
    स्नेह एवं आशीर्वाद बनाये रहें ...!!

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  21. बहुत सुन्दर
    अनुपम प्रस्तुति....
    लाजवाब...
    :-) :-)

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  22. बहुत खूबसूरत वर्णन तो रचना तो खूबसूरत अपने आप हो गई :)सुन्दर रचना |

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  23. बेहद खूबसूरत...बिल्कुल गुड़हल के फूल की तरह पावन मनभावन...शब्दों की पंखुड़ियाँ लाजवाब !!

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  24. माँ शक्ति की पूजा के लिए सबसे उत्तम रक्तिम गुड़हल को माना जाता है और वैसी ही आपकी रचना है ..

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  25. बहुत प्यारी न्यारी प्रस्तुति मनमोहक बधाई आपको

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  26. बहुत बहुत सुन्दर!!!

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  27. सुन्दर और भावयुक्त अर्पण्

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  28. बहुत सुन्दर..सूक्ष्म अंकन ..

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  29. बुत सुन्दर रचना और उसका विस्तार ...
    गुडहल का फूल ... शक्ति की उपासना ... सामजस्य स्थापित किया है ... बहुत लाजवाब रचना ...

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  30. गुड़हल के बारे में अच्छी जानकारी मिली। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

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  31. Ashish aur Praveen jee ne bahut sahi kaha..
    itne pyare shabd sanyojan ki kya kahun...:)

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  32. प्यारी सी रचना ....

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  33. गुलहड़ सी सुन्दर रचना..

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  34. itne sunder pushp ke liye utne hi sunder bhaav -ek khoobsoorat rachnaa ke liye badhi -un hi likhati rahiye

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  35. बहुत सुन्दर रचना.

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  36. आभार आपसभी का ह्रदय से ..!माँ पर अर्पित ये पुष्प आप सभी का स्नेह पा गया |

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