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05 February, 2014

मदमाया है अब बसंत ........!!


मन ने उमंग भरी ,तूलिका ने भरे रंग,
कोयलिया कूक रही ,बाजे है मन मृदंग ||

फूलों की चिटकन है ,रंगों की छिटकन है,
भँवरे की गुंजन है, छाया जो रंजन है !!

धूप में निखार आया रंग की बहार छाई ,
अमुआ की मंजरिया  देखो कैसी बौराई !!


पीत वसना धरती है ,धरती जो पीत वसन ,
धरती से अम्बर तक आया है अब बसंत !!

कंचन सी धूप खिली छाया है अब बसंत !!
सतरंगी चूनर, लहराया है अब बसंत
छाया है अब बसंत ....!!

राग है बहार संग मनवा है यूं मगन !
छेड़ो अब तान कोई ,लागी कैसी लगन,

प्रकृती में बिखरा चहुं ओर उन्माद है ,
हरस रही सरसों है प्रीति का आह्लाद है,

रंग है बहार है रूप का श्रृंगार है ,
खिलती हुई कलियों पर आया जो निखार है ...!!


सतरंगी ...पुष्पों  पर छाया है अब बसंत
मदमाती सुरभि लहराया  है अब बसंत ......!!

रोम रोम  पुलकित  ,मदमाया है अब बसंत ........!!

21 comments:

  1. बहुत सुंदर चित्रों और अनुपम शब्दों से सजा बसंत आया... सुंदर चित्रण ....!!

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  2. वाह !!
    बहुत ही सुंदर और प्यारी रचना ...!!

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  3. बहुत सुंदर शब्दों से सजा बसंत ........

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  4. फूलों की चिटकन है ,रंगों की छिटकन है,
    भँवरे की गुंजन है, छाया जो रंजन है !!

    वाह..वसंत का सुंदर शब्द चित्र...अनुपमा जी वसंतोत्सव की बहुत बहुत बधाई !

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  5. I love spring when nature hold so many fresh promises. Beautiful poem.

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  6. आह हा क्या खूब बसंत आया है यहाँ :)

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  7. वसंत की तरह शोख और चंचल गीत!!

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  8. रोम रोम पुलकित हो गया .....!!

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  9. बहुत सुंदर। वनन में बागन में बगरयो बसंत है।

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  10. वसंत की शुभ शुभकामनायें।

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  11. गीत पढ कर मन बसंतमय हो गया। मेरी नई कविता समय की भी उम्र होती है, पर आपका स्वागत है।

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  12. यहाँ तो अभी भी ठंड है लेकिन आपकी कविता ने मन में वसंत ज़रूर ला दिया. सुन्दर सृजन.

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  13. ऋतुराज के आगमन के सारे प्रतीक सोलहों श्रृंगार के साथ विराजमान है. अद्भुत पंक्तियाँ

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  14. बहुत सुंदर .... मेरी कविता समय की भी उम्र होती है पर आपका स्वागत है।

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  15. सार्थक संकल्प विमर्श परामर्श सुन्दर रचना। आभार हमें हलचल में लाने के लिए।

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  16. अंतस को वसंतमय करती बहुत मनभावन प्रस्तुति...

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  17. बाराहा बाँचने लायक गुनगुनी रचना।

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