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31 January, 2014

जीवन को और चाहिए भी क्या …???

सोलह कलाओं से खिला चंद्रमा ,
ऐश्वर्यपूर्ण लावण्यमई लाजवंती चंद्रिका ,
ऐसा ऐश्वर्य पा ,
लाज से निर्झर सी झरती,
यूं उतरती चली नदिया  में,
मानो लाज से गड़  गई है....!!

पा ज्योत्स्नामृत
वाचाल हो उठी
सुगम्भीर प्रशांता पावनी (नदी)
कल कल निनाद
गुंजायमान ज्यों किंकनी (घुँघरू)

जल प्रपात का विनोद ,
यह क्रीड़ा कौतुक  निहार
मन कौतूहल से आमोद ,
अक्षय ताजगी से प्रमोद .

निर्जनसे इस वन  में,
प्रकृति के चिर नवीन आकर्षण में,
स्वर श्रुतियों में अमृत घोल
बोल रही है मीठे बोल ,
बीत रहे  ये क्षण अनमोल .……
बोलो तो……
जीवन को और चाहिए भी क्या …???


24 comments:

  1. सच कुछ नहीं चाहिए....
    बहुत सुन्दर !!

    सस्नेह
    अनु

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  2. प्रकृति के सौंदर्य के आगे सभी वस्तु तुच्छ लगने लगती हैं...

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  3. जीवन में निर्मल स्वच्छ चाँदनी बिखरे रहे तो ....और कुछ नहीं चाहिए !
    सियासत “आप” की !
    नई पोस्ट मौसम (शीत काल )

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  4. इस निर्जन वन में
    प्रकृति के सौहार्द्रपूर्ण सानिध्य में,
    अनमोल से ये पल.……
    बोलो तो……
    जीवन को और चाहिए भी क्या …???
    अति सुन्दर।

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  5. इस निर्जन वन में
    प्रकृति के सौहार्द्रपूर्ण सानिध्य में,
    अनमोल से ये पल.……
    बोलो तो……
    जीवन को और चाहिए भी क्या …???
    बिल्‍कुल सच कहती पंक्तियां

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  6. प्रकृति के ये स्थिर चित्र शब्दों को प्रवाह दें जाते हैं।

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  7. प्रकृति सुंदरी सत्य बता दे , पाया कहाँ से इतना प्यार . अद्भुत शब्द चित्र खीचा है दी.

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  8. प्रकृति , गीत , संगीत और क्या चाहिए भला !
    बहुत सुन्दर !

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  9. कितना कुछ तो है .... भला और क्या चाहिए .... बहुत सुन्दर .

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  10. आलोकिक प्राकृति का सौंदर्य बोध लिए ... सुन्दर शब्द ...

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  11. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, मंगलवार, दिनांक :- 04/02/2014 को चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1513 पर.

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका ...!!

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  12. इस अनमोल क्षण से ज्यादा और चाहिए भी क्या...

    निर्जनसे इस वन में,
    प्रकृति के चिर नवीन आकर्षण में,
    स्वर श्रुतियों में अमृत घोल
    बोल रही है मीठे बोल ,
    बीत रहे ये क्षण अनमोल .……
    बोलो तो……
    जीवन को और चाहिए भी क्या …???

    बहुत सुन्दर रचना, अनूठे भाव, बधाई.

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  13. सुंदर शब्द सामर्थ्य , बधाई आपको !!

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  14. आपकी कृति बुधवार 5 फरवरी 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    Replies
    1. आभार हृदय से मेरी रचना हो हलचल पर लेने हेतु ...!!

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  15. बहुत सुन्दर !!

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  16. प्रकृति के इस वैभव से मन को जो आनन्द और तृप्ति मिलती है वह केवल अनुभवगम्य है :
    अति सुन्दर !.

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  17. आनंद से भरा प्रकृति .....भावपूर्ण सुन्दर

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  18. प्रकृति का सन्निध्य हो और सौन्दर्य अनुभव करने वाला हृदय..सचमुच जीवन को और क्या चाहिए..?

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  19. विभावरीश और उससे जुड़े समस्त सौंदर्य ने मन प्रफुल्लित कर दिया.

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