नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

18 January, 2014

सौन्दर्य बोध


कोलाहल में शून्यता
स्वार्थ से परमार्थ का बोध
अपने से अपनों तक
और अपनों से अपने तक
सत्य स्वत्व है
निज घट यात्रा
एक अनुभूति
सबकी  अपनी
टुकड़ों टुकड़ों में बिखरी
माला सी गुंथी स्वयं मे ,
ईश्वर रूप
मूर्त में अमूर्त सी
प्रत्येक मनुष्य के ह्रदय में
ईश्वर तक की पहुँच है
स्थिरता है   ……
भटकन नहीं है
एक खोज सबकी अपनी अपनी .....
अनकही अनसुनी सी
एक  अनुभूति ईश्वरीय
सत्य का बोध ही
 सौन्दर्य बोध
सत्यम शिवम् सुंदरम है

31 comments:

  1. क्या बात है आदरणीया-
    शुभकामनायें-

    ReplyDelete
  2. बहुत गहन और सुन्दर |

    ReplyDelete
  3. सत्य का बोध ही सौंदर्य बोध है..
    गहन भाव लिए सुन्दर रचना...
    :-)

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    पोस्ट को साझा करने के लिए आभार।

    ReplyDelete
  5. काफी उम्दा प्रस्तुति.....
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (19-01-2014) को "तलाश एक कोने की...रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1497" पर भी रहेगी...!!!
    - मिश्रा राहुल

    ReplyDelete
    Replies
    1. हृदय से आभार आपका राहुल मिश्रा जी .

      Delete
  6. बहुत गहन और सुन्दर प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  7. बेहद गहन व सार्थक प्रस्तुति।।।

    ReplyDelete
  8. वहाँ समय को रुक जाना है,
    नहीं मात्र जड़वत स्थिरता।

    ReplyDelete
  9. सत्यम शिवम् सुंदरम......

    ReplyDelete
  10. सत्य बोध तो हमेशा कल्याणकारी होता है, बोधिसत्व जो बनाता है. हमेशा की तरह विचारों को झंकृत करती कविता .

    ReplyDelete
  11. सत्य बोध तो हमेशा कल्याणकारी होता है, बोधिसत्व जो बनाता है. हमेशा की तरह विचारों को झंकृत करती कविता .

    ReplyDelete
  12. खुबसूरत शब्दों का चयन सुन्दर रचना |

    ReplyDelete
  13. एक अध्यात्मिक और दार्शनिक कविता!! आत्मा का अमृत!!

    ReplyDelete
  14. सच, वह खोज अपनी है और अपनी-अपनी भी

    ReplyDelete
  15. ईश्वर रूप
    मूर्त में अमूर्त सी
    प्रत्येक मनुष्य के ह्रदय में

    सच लिखा है. लेकिन कई लोग इस अनुभूति से सदा वंचित रह जाते है या जानने का यत्न नहीं करते.

    ReplyDelete
  16. सत्य धीव सुन्दर ले अलावा और क्या है जो सबका अपना अपना है ... वो सब तो मिथ्या है ...

    ReplyDelete
  17. सत्य ही शिव है...सुंदर है...

    ReplyDelete
  18. सागर की सी गहन गंभीरता लिए ....अपने अपने सत्य के साथ बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति .....

    ReplyDelete
  19. अनुपमा जी, वही सत्य है जो शिव है जो शिव है वही सुंदर है...और वह हमारी आत्मा की आत्मा है...सुंदर भाव !

    ReplyDelete
  20. आप सभी का हृदय से आभार इस गहन रचना पर आपने अपने उत्कृष्ट विचार दिये ....!!बहुत बहुत आभार ....!!

    ReplyDelete
  21. अपने से अपनों तक और अपनों से अपने तक ....बस येही सत्य है ....वाह !

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!