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18 August, 2014

हे कृष्ण कृष्णा.....!!





हे कृष्ण कृष्णा,
अब दूर करो मेरी तृष्णा,
विभूषित प्रमुदित मन करो,
मन वीणा को स्वरों  का
अलंकार दो,
संवेदना का जीवन में
व्यवहार दो ,
इक बूंद गिरे
और,
मुझ चातक का,
सोया जीवन
 झंकार दो ....!!



8 comments:

  1. जय श्रीकृणा!
    बहुत सुन्दर
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें!

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  2. जय श्रीकृणा!
    बहुत सुन्दर
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें!

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  3. सुंदर रचना...क़ष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं।।।

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  4. अति सुंदर प्रार्थना..कृष्ण जन्माष्टमी पर शुभकामनायें..अनुपमा जी !

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  5. जय श्री कृष्‍णा .... शुभकामनायें आपको भी

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  6. सुंदर रचना..सुंदर भाव

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  7. कृष्ण ही पुरुष रूप में विष्णु के रूपों की त्रिवेणी हैं कारणोदकशायी -गर्भोदकशायी -क्षीरोदकशायी (भागवतपुराण )

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  8. कविता प्राथना का सबसे सुन्दर रूप है
    सुन्दर रचना पर बधाई

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