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06 June, 2022

व्यथित ह्रदय की वेदना .....!!


व्यथित हृदय की वेदना का
कोई तो पारावार   हो
ला सके जो स्वप्न वापस
कोई तो आसार हो

 मूँद कर पलकें जो  सोई
स्वप्न जैसे सो गए
राहें धूमिल सी हुईं
जो रास्ते थे खो गए

पीर सी छाई घनेरी
रात  भी कैसे कटे ,
तीर सी चुभती हवा का
दम्भ भी कैसे घटे

कर सके जो पथ प्रदर्शित
कोई दीप संचार हो
हृदय  के कोने में जो जलता,
ज्योति का आगार हो

व्यथित हृदय की वेदना का
कोई तो पारावार  हो

ओस पंखुड़ी पर जमी है
स्वप्न क्यूँ सजते नहीं ?
बीत जात सकल रैन
नैन क्यूँ  मुंदते  नहीं ?

विस्मृति तोड़े जो ऐसी ,
किंकणी झंकार हो
मेरी स्मृतियों की धरोहर
पुलक का आधार हो !!

व्यथित हृदय  की वेदना का
कोई तो पारावार  हो

अनुपमा त्रिपाठी
  "सुकृति "


18 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (08-06-2022) को चर्चा मंच      "निम्बौरी अब आयीं है नीम पर"    (चर्चा अंक- 4455)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'    
    --

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    Replies
    1. शास्त्री जी सादर नमस्कार
      मेरी रचना को चर्चा मंच पर लेने हेतु सादर धन्यवाद आपका |

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  3. व्यथा का कोई अंत नहीं तो व्यथित हृदय का परिवार कैसे मिलेगा ।
    खूबसूरत रचना ।।

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  4. हृदयस्पर्शी सृजन

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  5. विस्मृति तोड़े जो ऐसी ,
    किंकणी झंकार हो
    मेरी स्मृतियों की धरोहर
    पुलक का आधार हो !!
    अत्यंत सुंदर ।

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  6. बहुत सुंदर,वाह वाह!

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  7. अद्भुत , अद्भुत, अद्भुत ...वाह कर सके जो पथ प्रदर्शित
    कोई दीप संचार हो
    हृदय के कोने में जो जलता,
    ज्योति का आगार हो

    व्यथित हृदय की वेदना का
    कोई तो पारावार हो...निश्‍चित ही भीतर तक कुरेद देने वाली रचना अनुपमा जी...

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  8. प्रार्थना स्वीकार हो. भाव सलिला पुनीता.

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  9. विस्मृति तोड़े जो ऐसी ,
    किंकणी झंकार हो
    मेरी स्मृतियों की धरोहर
    पुलक का आधार हो !! ..बहुत सुंदर सराहनीय रचना।

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  10. कर सके जो पथ प्रदर्शित
    कोई दीप संचार हो
    हृदय के कोने में जो जलता,
    ज्योति का आगार हो
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर ।

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  11. कर सके जो पथ प्रदर्शित
    कोई दीप संचार हो
    हृदय के कोने में जो जलता,
    ज्योति का आगार हो
    वाह!!!
    लाजवाब सृजन ।

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  12. बहुत सुंदर सृजन अनुपमा जी, हृदय स्पर्शी जैसे अंतर से निकले शब्द।
    मोहक गठन।

    किंकणी की झंकार अवश्य होगी।
    सस्नेह।

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  13. विस्मृति तोड़े जो ऐसी ,
    किंकणी झंकार हो
    मेरी स्मृतियों की धरोहर
    पुलक का आधार हो !!

    अंतर्मन से उपजी सुंदर प्रार्थना!

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  14. मन की वदना को अंतर्मन से दूर किया जाता है ...
    बहुत भावपूर्ण ...

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