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04 June, 2022

शजर

तेरी फ़िक्र से मुझमे है मेरी सांस का होना '

तुझे तुझसे कहीं  दूर चुरा लाया हूँ मैं 


तेरे चेहरे की हँसी में ही मेरी शाम-ओ -सहर है

सबब -ए -ज़िक्र का पोशीदा असर लाया हूँ मैं


मौसम-ए -गुल की पनाहों में  मैं हूँ ,तेरे ख़त  भी हैं

तेरी यादों से रची शाम संवार लाया हूँ मैं


घने शजर की छाँव में की दो घड़ी  की बात 

दिल अपना तेरे पास यूँ ही छोड़ आया हूँ मैं


अनुपमा त्रिपाठी

"सुकृति "


13 comments:

  1. वाह !!! शज़र की छाँव तले दो घड़ी की बात ने क्या गुल खिलाया है ,
    हर शेर सवा सेर बन कर निखर आया है ।
    लाजवाब

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  2. तेरी यादों से रची शाम....बेहद खूबसूरत, उम्दा...

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  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (31-5-22) को "भक्ति को ना बदनाम करें"'(चर्चा अंक- 4452) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा

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  4. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (5-6-22) को "भक्ति को ना बदनाम करें"'(चर्चा अंक- 4452) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा

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    Replies
    1. मेरी प्रविष्टि को चर्चा अंक में स्थान देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद कामिनी सिन्हा जी 🙏🙏

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  5. सराहनीय प्रस्तुति।

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  6. वाह ! बहुत ख़ूब !
    बेहतरीन व लाज़वाब सृजन ।

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  7. तेरी फ़िक्र से मुझमे है मेरी सांस का होना '
    वाह!!!!
    क्या बात...
    बहुत लाजवाब।

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  8. तेरी फ़िक्र से मुझमे है मेरी सांस का होना '
    वाह!!!
    क्या बात...
    बहुत लाजवाब।

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  9. खूबसूरत अहसास

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  10. मन के एहसासों से सज्जित सुंदर रचना।

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  11. बहुत सुन्दर सृजन

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