कहते जाना
इक फलसफा है ज़िन्दगी तेरा इस तरह
गुज़रते जाना
वक़्त है कि चलता है ,रुकता नहीं किसी के लिए ,
दो घड़ी चैन देता है अपनों का यूँठहरते जाना ,
ज़िन्दगी एक है एक ही रहेगी लेकिन,
तुझ को छू कर मेरी खाइशों का यूँ बिखरते जाना,
रात का रंग सुरमें की तरह सांवरा है ,
भर के आँखों में ख़्वाबों का यूँ संवरते जाना
अनुपमा त्रिपाठी
"सुकृति "
