मेरी उम्मीद के अनघ सुरों में,कुछ शब्द गढ़ते हैं भाव ,
भरते हैं रंग ,
उड़ता है फाग ,
बसंत का अनुराग ,
वही है रंग ,
अबीर गुलाल सा ......
खिलता पलाश ....!!
रचना रचती है ,
रंग से भरी
उमंग से भरी ,...
होली ...!!
और तब ..
धरा के कण कण में,
फूलों के अनेक रंगों में,
खिलती है ,
खिलखिलाती है ज़िंदगी ,
हाँ .......
लगता है कोई है कहीं ....!!
आप सभी को होली की अनेक शुभकामनायें ...रंग से उमंग से जीवन भरा रहे ...!!