चंचलता और स्थितप्रज्ञता
कम्पन और स्थिरता
संरक्षण और जिज्ञासा
प्रयत्न और फल की आशा
प्रत्युषा और निशा
तृप्ति और पिपासा
दो रूप ,किन्तु
एक ही स्वरुप -
जीवन .......!!
वसुंधरा की गोलाई नापते
आदि और अन्त के पड़ाव पर
अनंत की ओर अग्रसर
कभी मूक कभी वाचाल
समय तुम और मैं
निरंतर चलते अपनी चाल
रह रह कर पहुंचते
फिर कहीं फिर कहीं
फिर वहीं !!
अनुपमा त्रिपाठी
"सुकृती "
